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बजट: सौगातों पर टिकीं रहीं निगाहें, मिला झुनझुना
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ज्ञानपुर। आम बजट ने कालीन नगरी के लोगों पर मिली-जुली छाप छोड़ी। सामूहिक रूप से कई क्षेत्रों में जहां लोगों को कई सौगातें हाथ लगीं, वहीं जिले को सीधे तौर पर ज्यादा कुछ नहीं मिलने से निराशा हुई। कालीन कारोबार को सीधे तौर पर पैकेज, विशेष आर्थिक जोन का मसौदा और महत्वपूर्ण ट्रेनों के ठहराव की मांगें जस की तस रह गईं।
शनिवार को संसद में देश का बजट पेश किया गया। जिले के लोगों की निगाहें पूरे दिन बजट पर टिकी रहीं। लोग टीवी पर बजट के अनुमानों के साथ ही मिलने वाली विभिन्न सौगातों को दिलचस्पी से सुनते रहे। मोदी सरकार के बजट में वित्तमंत्री निर्मला सीतारमण ने किसानों, युवाओं, महिलाओं समेत विभिन्न वर्गों के लिए घोषणाएं तो कीं, मगर कालीन कारोबार को एक जिला-एक उत्पाद के जिक्र के अलावा और कुछ नहीं मिला। निर्विक योजना के जरिए छोटे निर्यातकों को लाभ देने की बात की गई, जो पर्याप्त नहीं मानी जा रही है। रेल बजट में जिले को झुनझुना भी नहीं मिला। जबकि जिले के दो प्रमुख रेल रूटों वाराणसी-जंघई और वाराणसी-प्रयागराज के महत्वपूर्ण स्टेशनों पर वंदे भारत और शिवगंगा जैसी ट्रेनों के ठहराव की मांग की जा रही है। एक दशक से अधिक समय से ठंडे बस्ते में पड़े विशेष आर्थिक जोन (सेज) के मसौदे को इस बजट में भी नई जान मिलने की उम्मीदें थीं, मगर वह भी वैसे ही रह गया। जबकि सेज के निर्माण के लिए जमीन का भारी-भरकम रकबा सरकार ने अधिगृहीत भी कर लिया था। मौजूदा आलम यह है कि विशेष आर्थिक क्षेत्र के लिए अधिगृहीत जमीन पर कब्जा हो रहा है। मुआवजा वितरण के बाद भी सरकार उस जमीन को नहीं सहेज पाई। यद्यपि सार्वजनिक तौर पर बजट में किए गए प्रावधानों को हर वर्ग की सराहना मिली। बजट को लेकर लोगों में सुबह से ही खूब उत्साह था। लोग टीवी पर वित्तमंत्री के बजट अभिभाषण का सीधा प्रसारण देखने के लिए जगह-जगह जुटे दिखे। इस दौरान एक-एक घोषणाओं को ध्यान से सुनकर उनकी समीक्षा की जा रही थी।
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शनिवार को संसद में देश का बजट पेश किया गया। जिले के लोगों की निगाहें पूरे दिन बजट पर टिकी रहीं। लोग टीवी पर बजट के अनुमानों के साथ ही मिलने वाली विभिन्न सौगातों को दिलचस्पी से सुनते रहे। मोदी सरकार के बजट में वित्तमंत्री निर्मला सीतारमण ने किसानों, युवाओं, महिलाओं समेत विभिन्न वर्गों के लिए घोषणाएं तो कीं, मगर कालीन कारोबार को एक जिला-एक उत्पाद के जिक्र के अलावा और कुछ नहीं मिला। निर्विक योजना के जरिए छोटे निर्यातकों को लाभ देने की बात की गई, जो पर्याप्त नहीं मानी जा रही है। रेल बजट में जिले को झुनझुना भी नहीं मिला। जबकि जिले के दो प्रमुख रेल रूटों वाराणसी-जंघई और वाराणसी-प्रयागराज के महत्वपूर्ण स्टेशनों पर वंदे भारत और शिवगंगा जैसी ट्रेनों के ठहराव की मांग की जा रही है। एक दशक से अधिक समय से ठंडे बस्ते में पड़े विशेष आर्थिक जोन (सेज) के मसौदे को इस बजट में भी नई जान मिलने की उम्मीदें थीं, मगर वह भी वैसे ही रह गया। जबकि सेज के निर्माण के लिए जमीन का भारी-भरकम रकबा सरकार ने अधिगृहीत भी कर लिया था। मौजूदा आलम यह है कि विशेष आर्थिक क्षेत्र के लिए अधिगृहीत जमीन पर कब्जा हो रहा है। मुआवजा वितरण के बाद भी सरकार उस जमीन को नहीं सहेज पाई। यद्यपि सार्वजनिक तौर पर बजट में किए गए प्रावधानों को हर वर्ग की सराहना मिली। बजट को लेकर लोगों में सुबह से ही खूब उत्साह था। लोग टीवी पर वित्तमंत्री के बजट अभिभाषण का सीधा प्रसारण देखने के लिए जगह-जगह जुटे दिखे। इस दौरान एक-एक घोषणाओं को ध्यान से सुनकर उनकी समीक्षा की जा रही थी।
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