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उम्भा नरसंहार के दोषियों को मिले फांसी की सजा : गोंगपा
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गोंडवाना गणतंत्र पार्टी ने शनिवार को जिला मुख्यालय पर उम्भा नरसंहार की बरसी मनाकर 12 गोंड आदिवासी परिवारों के साथ जुल्म करने वालों को फांसी की सजा दिलाने की मांग की। इस दौरान जिलाध्यक्ष महेंद्र कुमार गोंड ने राष्ट्रपति के नाम संबोधित मांगपत्र डीएम आर्यका अखौरी को सौंपा।
जिलाध्यक्ष ने डीएम को सौपे ज्ञापन में कहा कि नरसंहार में शामिल अपराधियों को सजा नहीं हो सकी तो पार्टी कार्यकर्ता सड़क पर उतरने के लिए मजबूर होंगे। बताया कि कार्यकर्ताओं ने अफसोस जताया कि केंद्र और प्रदेश में शासन सत्ता के मद में चूर सरकार सिर्फ गरीबों, मजदूरों, किसानों, बेरोजगारों को चिह्नित कर हत्याएं कराई जा रही है। 17 जुलाई 2019 को जब आदिवासी परिवार अपने पुश्तैनी जमीन पर जुताई-बुआई करने गए थे। उस दौरान पुलिस प्रशासन ने सूझबूझ नहीं दिखाया। पुलिस से मिलकर अपराधियों ने ऐसी खून की होली खेली कि पुरा कुनबा ही उजड़ गया। कहा कि आज भी उम्भा के लोग उस दिन को याद कर आंसू नहीं रोक पा रहे हैं और यज्ञदत्त भूर्तिया, प्रभात कुमार मिश्रा, स्टेशन मास्टर कोमल सिंह समेत लगभग 80 लोगों पर अभी तक जुर्म तय नहीं किया जा रहा है।
नरसंहार की जांच सीबीआई से कराई जाए, मृतक परिजनों को 50-50 तो घायलों को 25-25 लाख मुआवजा मिले, मृतक परिवार के एक सदस्य को सरकारी नौकरी दी जाए, भूमाफियाओं की सुनवाई फास्ट ट्रैक कोर्ट में कर फांसी की सजा सुनाई जाए, घटना के जिम्मेदार डीएम को बर्खास्त कर 302 का अभियोग चलाया जाए, आदिवासियों का नाम राजस्व खतौनी में दर्ज कराया जाए, आदिवासी जनजाति को न्याय के लिए सख्त कानून पारित किया जाए।
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जिलाध्यक्ष ने डीएम को सौपे ज्ञापन में कहा कि नरसंहार में शामिल अपराधियों को सजा नहीं हो सकी तो पार्टी कार्यकर्ता सड़क पर उतरने के लिए मजबूर होंगे। बताया कि कार्यकर्ताओं ने अफसोस जताया कि केंद्र और प्रदेश में शासन सत्ता के मद में चूर सरकार सिर्फ गरीबों, मजदूरों, किसानों, बेरोजगारों को चिह्नित कर हत्याएं कराई जा रही है। 17 जुलाई 2019 को जब आदिवासी परिवार अपने पुश्तैनी जमीन पर जुताई-बुआई करने गए थे। उस दौरान पुलिस प्रशासन ने सूझबूझ नहीं दिखाया। पुलिस से मिलकर अपराधियों ने ऐसी खून की होली खेली कि पुरा कुनबा ही उजड़ गया। कहा कि आज भी उम्भा के लोग उस दिन को याद कर आंसू नहीं रोक पा रहे हैं और यज्ञदत्त भूर्तिया, प्रभात कुमार मिश्रा, स्टेशन मास्टर कोमल सिंह समेत लगभग 80 लोगों पर अभी तक जुर्म तय नहीं किया जा रहा है।
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नरसंहार की जांच सीबीआई से कराई जाए, मृतक परिजनों को 50-50 तो घायलों को 25-25 लाख मुआवजा मिले, मृतक परिवार के एक सदस्य को सरकारी नौकरी दी जाए, भूमाफियाओं की सुनवाई फास्ट ट्रैक कोर्ट में कर फांसी की सजा सुनाई जाए, घटना के जिम्मेदार डीएम को बर्खास्त कर 302 का अभियोग चलाया जाए, आदिवासियों का नाम राजस्व खतौनी में दर्ज कराया जाए, आदिवासी जनजाति को न्याय के लिए सख्त कानून पारित किया जाए।
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