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Bhadohi News: लहलहाएगी हरी खाद की फसल, मिला 100 क्विंटल ढैंचा बीज
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ज्ञानपुर। बारिश का मौसम शुरु होने से पूर्व एक बार फिर खेतों में हरी खाद की फसल लहलहाएगी। बुधवार को जिले में 100 क्विंटल ढैंचा का बीज कृषि विभाग को प्राप्त हो गया। विभाग इसके वितरण की तैयारियां में जुट गया है। बीज का वितरण गोधना, सुरियावां, औराई, अभोली, भदोही ब्लॉक गोदामों से होगा। विभाग के अनुसार आगामी तीन दिनों के भीतर प्रभारियों को नामित कर निर्धारित मूल्य पर 50 फीसदी अनुदान से साथ बीज वितरित किया जाएगा।
कृषि विशेषज्ञों के मुताबिक खरीफ, रबी सीजन में दलहनी-तिलहनी फसल की बुआई करने से पहले खेतों में ढैंचायुक्त हरी खाद खेतों की उर्वरा शक्ति को बढ़ाती है। इसके अलावा पर्याप्त मात्रा में नाइट्रोजन की पूर्ति भी होती है। इसे प्राकृतिक खाद भी कहा जाता है। जिससे रासायनिक उर्वरक का उपयोग काफी कम मात्रा करना पड़ता है। जिले के किसानों को ढैंचा बीज का इंतजार कर रहे थे।
हालांकि बीते साल के ढैचा बीच की सब्सिडी अब तक किसानों को प्राप्त नहीं हो सकी है। जिसके कारण किसान विभाग का चक्कर लगाने को विवश हैं। हालांकि किसानों की जरूरत को देखते हुए शासन की ओर से जिले में 100 क्विटंल ढैंचा बीज कृषि विभाग को भेजा है। जिला कृषि अधिकारी एके प्रजापति ने बताया कि विभाग को ढैंचा बीज प्राप्त हो चुका है। वितरण में देर नहीं की जाएगी। आगामी तीन दिनों के भीतर गोदामों पर प्रभारियों को नामित कर बीज वितरण शुरू कराया जाएगा। बताया कि किसानों को 50 फीसदी अनुदान पर बीज प्राप्त होगा।
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काली, चिकनी मिट्टी के साथ किसी भी तरह की भूमि में ढैंचा बीज के माध्यम से हरी खाद बनाया जा सकता है। इसके लिए विशेष जलवायु की जरूरत नहीं होती, लेकिन हरी खाद बनाने में सामान्य बारिश की जरूरत होती है। प्रति बीघे 10 किलोग्राम बीज का प्रयोग किसान कर 45 दिन के अंतराल पर पानी के साथ जुताई करायें। अग्रिम बुआई का न्यूनतम समय 15 अप्रैल, पिछैती बुआई मई तक की जा सकती है।
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कृषि विशेषज्ञों के मुताबिक खरीफ, रबी सीजन में दलहनी-तिलहनी फसल की बुआई करने से पहले खेतों में ढैंचायुक्त हरी खाद खेतों की उर्वरा शक्ति को बढ़ाती है। इसके अलावा पर्याप्त मात्रा में नाइट्रोजन की पूर्ति भी होती है। इसे प्राकृतिक खाद भी कहा जाता है। जिससे रासायनिक उर्वरक का उपयोग काफी कम मात्रा करना पड़ता है। जिले के किसानों को ढैंचा बीज का इंतजार कर रहे थे।
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हालांकि बीते साल के ढैचा बीच की सब्सिडी अब तक किसानों को प्राप्त नहीं हो सकी है। जिसके कारण किसान विभाग का चक्कर लगाने को विवश हैं। हालांकि किसानों की जरूरत को देखते हुए शासन की ओर से जिले में 100 क्विटंल ढैंचा बीज कृषि विभाग को भेजा है। जिला कृषि अधिकारी एके प्रजापति ने बताया कि विभाग को ढैंचा बीज प्राप्त हो चुका है। वितरण में देर नहीं की जाएगी। आगामी तीन दिनों के भीतर गोदामों पर प्रभारियों को नामित कर बीज वितरण शुरू कराया जाएगा। बताया कि किसानों को 50 फीसदी अनुदान पर बीज प्राप्त होगा।
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काली, चिकनी मिट्टी के साथ किसी भी तरह की भूमि में ढैंचा बीज के माध्यम से हरी खाद बनाया जा सकता है। इसके लिए विशेष जलवायु की जरूरत नहीं होती, लेकिन हरी खाद बनाने में सामान्य बारिश की जरूरत होती है। प्रति बीघे 10 किलोग्राम बीज का प्रयोग किसान कर 45 दिन के अंतराल पर पानी के साथ जुताई करायें। अग्रिम बुआई का न्यूनतम समय 15 अप्रैल, पिछैती बुआई मई तक की जा सकती है।