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करोड़ों खर्च के बाद भी नहीं सुधरी स्कूलों की हालत
bhadohi hindi news
Updated Fri, 01 Jul 2016 01:42 AM IST
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प्राथमिक शिक्षा की रीढ़ मजबूत करने के लिए सरकार भले ही हर साल करोड़ों रुपए खर्च कर रही है लेकिन परिषदीय स्कूलों की दशा और दिशा नहीं सुधर रही है। शासन से लेकर प्रशासन तक की तमाम सख्ती के बाद भी पठन-पाठन से लेकर व्यवस्था में बदलाव नहीं हो पा रहा है। पेयजल, बिजली और शौचालय की स्थिति बद से बदतर है। 1116 विद्यालयों में 630 का भले ही विद्युतीकरण हुआ है लेकिन 100 में भी बल्ब नहीं जलते। गत तीन साल में करीब डेढ़ हजार शिक्षकों की नियुक्ति हुई लेकिन अब भी एक हजार शिक्षकों की कमी है। करीब 100 विद्यालय अब भी एक शिक्षक के सहारे चल रहे हैं।
जनपद के 561 ग्रामसभाओं और सात नगर पंचायत, पालिकाओं में 752 प्राथमिक और 364 पूर्व माध्यमिक विद्यालय संचालित हैं। आरटीई के मानक के हिसाब से परिषदीय विद्यालय पूरे हो चुके हैं लेकिन शिक्षण व्यवस्था में सुधार नहीं हो पा रहा है। परिषदीय स्कूलों में पेयजल के लिए लगे ज्यादातर हैंडपंप खराब हो गए हैं। विभागीय आंकड़ो पर नजर डाली जाए तो 150 हैंडपंप पानी देना बंर कर दिए हैं। 1116 स्कूलों में 630 में विद्युतीकरण कराया गया है लेकिन कनेक्शन न होने से कुछ स्कूलों को छोड़ दिया जाए तो अन्य में बल्ब ही नहीं जलते। शौचालयों की व्यवस्था तो राम भरोसे है। 1116 स्कूलों में मात्र दस फीसदी यानि 115 से 120 विद्यालयों के शौचालय ही शौच जाने लायक हैं। देखरेख के अभाव में ज्यादातर शौचालय निष्प्रयोज्य हो गए हैं। वर्तमान में 3300 शिक्षक स्कूलों में नियुक्त हैं जबकि आरटीई के मुताबिक यह संख्या 4200 होनी चाहिए।
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जनपद के 561 ग्रामसभाओं और सात नगर पंचायत, पालिकाओं में 752 प्राथमिक और 364 पूर्व माध्यमिक विद्यालय संचालित हैं। आरटीई के मानक के हिसाब से परिषदीय विद्यालय पूरे हो चुके हैं लेकिन शिक्षण व्यवस्था में सुधार नहीं हो पा रहा है। परिषदीय स्कूलों में पेयजल के लिए लगे ज्यादातर हैंडपंप खराब हो गए हैं। विभागीय आंकड़ो पर नजर डाली जाए तो 150 हैंडपंप पानी देना बंर कर दिए हैं। 1116 स्कूलों में 630 में विद्युतीकरण कराया गया है लेकिन कनेक्शन न होने से कुछ स्कूलों को छोड़ दिया जाए तो अन्य में बल्ब ही नहीं जलते। शौचालयों की व्यवस्था तो राम भरोसे है। 1116 स्कूलों में मात्र दस फीसदी यानि 115 से 120 विद्यालयों के शौचालय ही शौच जाने लायक हैं। देखरेख के अभाव में ज्यादातर शौचालय निष्प्रयोज्य हो गए हैं। वर्तमान में 3300 शिक्षक स्कूलों में नियुक्त हैं जबकि आरटीई के मुताबिक यह संख्या 4200 होनी चाहिए।
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