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दलदल बने पीपा पुल मार्ग,फंसते रहे वाहन
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लालानगर। लगभग तीन माह पूर्व प्रमुख गंगा घाट रामपुर और धनतुलसी-डेंगुरपुर बने पीपा पुल को जोड़ने वाले मार्ग दलदल हो चुके हैं वाहनों चालकों समेत पैदल, साइकिल, बाइक वालों की मुश्किलें बढ़ा दिया है। गंगा आर-पार होने पहुंच रहे यात्रियों ने लोक निर्माण विभाग पर अनदेखी का आरोप लगाते हुए चेतावनी दिया है कि पुल मार्ग का समतलीकरण कराकर चकरप्लेट नहीं बिछवाया जा सका तो एक्सईएन के खिलाफ आवाज उठाने में देर नहीं लगेगी।
इस संबंध में यात्री सुरेश कुमार, कमलेश, मानबहादुर, कैलाश आदि ने आरोप लगाया है कि विभाग के उक्त पुल निर्माणकाल से लेकर सुर्खियों में रह चुके हैं। कहीं पीपे कमी तो चकर प्लेट, सुरक्षा बैरिकेडिंग लगाने में मानक की अनदेखी के बीच ही आवागमन के लिए पुल को खोल दिया गया। हवा चलने पर पीपों के हिचकोले मारने और पीपे के ऊपर लगी लकड़ियों के जर्जर होने का खामियाजा गंगा में गिर कर भुगतना पड़ता है। हल्की बारिश से पुल के दोनों को जोड़ने वाले मार्गों की हालत दयनीय होने से चल पाना मुसीबतों के समान नजर आता है।
इस क्रम में सोमवार की देर रात से अगले दिन मंगलवार की सुबह तक हुई झमाझम बारिश का पानी पुल मार्ग से होकर गंगा में पहुंचाने की सुविधा आवागमन में रुकावट का कारण बनी। घाटों के आस-पास रहने वालों को गंगा स्नान, शादी समारोह में आने-जाने वाले निजी, सवारी वाहन, दूध, सब्जी के व्यापारियों को दलदल बने मार्ग पर काफी देर तक फंसने के बाद आगे बढ़ना भारी पड़ रहा है। पुल की देखरेख करने वाले लोक निर्माण विभाग के कर्मचारी हालात से परिचित होने के बावजूद अभी तक न मार्ग पर रेत डलवाने की पहल कर सके हैं न चकर प्लेट बिछाने की। नाराजगी जताई कि इसी तरह की अनदेखी जारी रही तो घाट तक पहुंचना पहाड़ नजर आएगा। इस संबंध में एक्सईएन लोक निर्माण हीरामणि वर्मा ने बताया कि बारिश के कारण रेत युक्त मिट्टी में पानी का दबाव बढ़ने पर समस्या आई है। देखभाल के लिए तैनात कर्मचारियों को समाधान के लिए निर्देशित किया जाएगा।
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इस संबंध में यात्री सुरेश कुमार, कमलेश, मानबहादुर, कैलाश आदि ने आरोप लगाया है कि विभाग के उक्त पुल निर्माणकाल से लेकर सुर्खियों में रह चुके हैं। कहीं पीपे कमी तो चकर प्लेट, सुरक्षा बैरिकेडिंग लगाने में मानक की अनदेखी के बीच ही आवागमन के लिए पुल को खोल दिया गया। हवा चलने पर पीपों के हिचकोले मारने और पीपे के ऊपर लगी लकड़ियों के जर्जर होने का खामियाजा गंगा में गिर कर भुगतना पड़ता है। हल्की बारिश से पुल के दोनों को जोड़ने वाले मार्गों की हालत दयनीय होने से चल पाना मुसीबतों के समान नजर आता है।
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इस क्रम में सोमवार की देर रात से अगले दिन मंगलवार की सुबह तक हुई झमाझम बारिश का पानी पुल मार्ग से होकर गंगा में पहुंचाने की सुविधा आवागमन में रुकावट का कारण बनी। घाटों के आस-पास रहने वालों को गंगा स्नान, शादी समारोह में आने-जाने वाले निजी, सवारी वाहन, दूध, सब्जी के व्यापारियों को दलदल बने मार्ग पर काफी देर तक फंसने के बाद आगे बढ़ना भारी पड़ रहा है। पुल की देखरेख करने वाले लोक निर्माण विभाग के कर्मचारी हालात से परिचित होने के बावजूद अभी तक न मार्ग पर रेत डलवाने की पहल कर सके हैं न चकर प्लेट बिछाने की। नाराजगी जताई कि इसी तरह की अनदेखी जारी रही तो घाट तक पहुंचना पहाड़ नजर आएगा। इस संबंध में एक्सईएन लोक निर्माण हीरामणि वर्मा ने बताया कि बारिश के कारण रेत युक्त मिट्टी में पानी का दबाव बढ़ने पर समस्या आई है। देखभाल के लिए तैनात कर्मचारियों को समाधान के लिए निर्देशित किया जाएगा।
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