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सुमंगला योजना: सत्यापन में ब्लॉक और शिक्षा विभाग फिसड्डी
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ज्ञानपुर। प्रदेश सरकार की महत्वाकांक्षी कन्या सुमंगला योजना के आवेदनों के सत्यापन का कार्य कच्छप गति से चल रहा है। विभिन्न विभागों से आए 2145 ऑनलाइन आवेदनों में 10 फीसदी का भी सत्यापन नहीं हो सका है। इससे पात्रों को समय से लाभ नहीं मिल पा रहा है। ब्लॉक और शिक्षा विभाग की हालत सबसे खराब है। सत्यापन को लेकर संजीदा नहीं हो रहे विभागों को डीएम ने तीन दिन का अल्टीमेटम दे दिया है।
बेटियों को आत्मनिर्भर बनाने के लिए सरकार कन्या सुमंगला योजना को प्रभावी किया है। इसमें बालिकाओं को जन्म से लेकर पढ़ाई तक कुल छह चरणों में 15 हजार रुपये से लाभान्वित करने का प्रावधान है। मुख्यमंत्री कन्या सुमंगला योजना के लिए वैसे तो आवेदन दो से तीन माह पूर्व से लिया जा रहा है, लेकिन इसका आगाज 25 अक्तूबर को हुआ। शुरुआती दौर में ऑफलाइन की मांग की गई तो 15 हजार आवेदन आए। कुछ दिन बाद ऑनलाइन की मांग की गई और अब तक 2145 आवेदन आए। उक्त आवेदनों का सत्यापन करने के लिए कहा गया, लेकिन विभागों की ओर से इसमें उदासीनता बरती जा रही है। आलम यह है कि बेसिक शिक्षा अधिकारी कार्यालय की ओर से 15, सभी बीईओ की ओर से 849, डीआईओएस की ओर से 657, सभी बीडीओ की ओर से 607, एसडीएम स्तर से 28 आवेदन सत्यापन के लिए लंबित हैं। प्रथम चरण में जन्म लेने वाली बालिकाओं में 117, टीकाकरण में 174, छठवीं कक्षा में 583, नौवीं कक्षा में 503, स्नातक स्तर पर 667 और तकनीकी कोर्स के लिए 101 आवेदन आए है। सत्यापन में देरी होने पर डीएम ने सख्ती बरती है। डीएम राजेंद्र प्रसाद ने लंबित प्रकरण का निस्तारण तीन दिन के अंदर करने का निर्देश दिया। सत्यापन के बाद डिजिटल सिग्नेचर करते हुए जिला प्रोबेशन अधिकारी के पोर्टल पर भेजने का निर्देश दिया है।
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बेटियों को आत्मनिर्भर बनाने के लिए सरकार कन्या सुमंगला योजना को प्रभावी किया है। इसमें बालिकाओं को जन्म से लेकर पढ़ाई तक कुल छह चरणों में 15 हजार रुपये से लाभान्वित करने का प्रावधान है। मुख्यमंत्री कन्या सुमंगला योजना के लिए वैसे तो आवेदन दो से तीन माह पूर्व से लिया जा रहा है, लेकिन इसका आगाज 25 अक्तूबर को हुआ। शुरुआती दौर में ऑफलाइन की मांग की गई तो 15 हजार आवेदन आए। कुछ दिन बाद ऑनलाइन की मांग की गई और अब तक 2145 आवेदन आए। उक्त आवेदनों का सत्यापन करने के लिए कहा गया, लेकिन विभागों की ओर से इसमें उदासीनता बरती जा रही है। आलम यह है कि बेसिक शिक्षा अधिकारी कार्यालय की ओर से 15, सभी बीईओ की ओर से 849, डीआईओएस की ओर से 657, सभी बीडीओ की ओर से 607, एसडीएम स्तर से 28 आवेदन सत्यापन के लिए लंबित हैं। प्रथम चरण में जन्म लेने वाली बालिकाओं में 117, टीकाकरण में 174, छठवीं कक्षा में 583, नौवीं कक्षा में 503, स्नातक स्तर पर 667 और तकनीकी कोर्स के लिए 101 आवेदन आए है। सत्यापन में देरी होने पर डीएम ने सख्ती बरती है। डीएम राजेंद्र प्रसाद ने लंबित प्रकरण का निस्तारण तीन दिन के अंदर करने का निर्देश दिया। सत्यापन के बाद डिजिटल सिग्नेचर करते हुए जिला प्रोबेशन अधिकारी के पोर्टल पर भेजने का निर्देश दिया है।
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