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सपा-बसपा का नहीं लिया नाम
अमर उजाला ब्यूरो , भदोही
Updated Thu, 15 Sep 2016 02:07 AM IST
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गोपीगंज के गुलाबधर मिश्र इंटरमीडिएट कॉलेज में आयोजित स्वागत सभा में बोलते राहुल गांधी।
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गोपीगंज। किसान रथयात्रा लेकर बुधवार को जिले में पहुंचे कांग्रेस के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष राहुल गांधी ने अपने भाषण के दौरान समाजवादी पार्टी और बहुजन समाज पार्टी का एक बार भी नाम नहीं लिया। ना ही उन्होंने यूपी की सियासत पर कोई टिप्पणी की। उनका अपना पूरा फोकस केवल प्रधानमंत्री मोदी और केंद्र सरकार पर रहा। इससे एक बात तो जाहिर हो गई कि यूपी विधानसभा चुनाव के दौरान रथयात्रा लेकर निकले कांग्रेस के युवराज का असली निशाना 2017 नहीं बल्कि 2019 का लोकसभा चुनाव है।
राहुल के इस स्टंट के कई सियासी मायने निकाले जाने लगे हैं।
जिले के सियासी गलियारे में चर्चा आम हो गई कि कहीं ऐसा तो नहीं कि प्रदेश में खोई जमीन हासिल करने के लिए जूझ रही कांग्रेस इस बार भी यूपी फतह की गुंजाइश कम लग रही है। या फिर राहुल यूपी के प्रमुख दलों समाजवादी पार्टी और बहुजन समाज पार्टी के साथ भविष्य में तालमेल के संकेत देना चाहते थे। इस बात को हाल के दिनों में यूपी के सीएम अखिलेश यादव के सार्वजनिक तौर पर राहुल के साथ दोस्ती की गुंजाइश से इनकार न करने के बयान से और बल मिल गया है। राहुल ने विधानसभा चुनाव की बात भी नहीं की। ना ही यूपी के सत्ताधारी दल पर कोई कटाक्ष किया। इसके पीछे राजनीतिक मकसद क्या है, यह तो समय बताएगा, लेकिन उनके इस रवैये को लेकर चर्चाओं का बाजार गर्म हो गया है।
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राहुल के इस स्टंट के कई सियासी मायने निकाले जाने लगे हैं।
जिले के सियासी गलियारे में चर्चा आम हो गई कि कहीं ऐसा तो नहीं कि प्रदेश में खोई जमीन हासिल करने के लिए जूझ रही कांग्रेस इस बार भी यूपी फतह की गुंजाइश कम लग रही है। या फिर राहुल यूपी के प्रमुख दलों समाजवादी पार्टी और बहुजन समाज पार्टी के साथ भविष्य में तालमेल के संकेत देना चाहते थे। इस बात को हाल के दिनों में यूपी के सीएम अखिलेश यादव के सार्वजनिक तौर पर राहुल के साथ दोस्ती की गुंजाइश से इनकार न करने के बयान से और बल मिल गया है। राहुल ने विधानसभा चुनाव की बात भी नहीं की। ना ही यूपी के सत्ताधारी दल पर कोई कटाक्ष किया। इसके पीछे राजनीतिक मकसद क्या है, यह तो समय बताएगा, लेकिन उनके इस रवैये को लेकर चर्चाओं का बाजार गर्म हो गया है।
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