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Bhadohi News: सरसों की खरीद के लिए खुलेंगे छह केंद्र
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ज्ञानपुर। जिले में गेहूं, धान और बाजरे के बाद अब सरसों की खरीद शुरू होगी। यह व्यवस्था पहली बार शुरू की जा रही है। शासन का पत्र आने के बाद सहकारिता विभाग हर ब्लॉक में एक-एक केंद्र खोलने की तैयारी में जुट गया है। इससे किसानों को समर्थन मूल्य मिल सकेगा। 15 से 20 अप्रैल तक इन केंद्रों से खरीद की शुरूआत हो जाएगी।
जिले में 70 हजार हेक्टेयर में खेती की जाती है। इसमें 50 हजार हेक्टेयर में रबी-खरीफ की खेती होती है जबकि शेष रकबे में फल, सब्जी समेत अन्य की खेती की जाती है। रबी और खरीफ सीजन में किसानों से गेहूं और धान की खरीद की जाती है। वैसे तो जिले में पहले सरसों की खेती नाममात्र की होती थी, लेकिन तेल की बढ़ती कीमतों के कारण अधिकतर किसानों ने राई-सरसों की खेती का रकबा बढ़ा दिया है। पांच से छह साल पूर्व तक जहां 50 से 80 हेक्टेयर रकबे में ही सरसों की खेती होती थी, वहीं अब यह रकबा 383 हेक्टेयर तक पहुंच गया है। रकबा बढ़ने से पैदावार भी बढ़ गई है। अकिधतर किसान अपनी जरूरत के हिसाब से सरसों की खेती करते हैं, लेकिन काफी संख्या में ऐसे किसान हैं जो व्यापारिक दृष्टिकोण से खेती करते हैं। गेहूं-धान के बजाए सरसों में उन्हें अच्छा फायदा होता है। किसानों की विवशता को समझकर व्यापारी समर्थन मूल्य करीब 5600 रुपये प्रति क्विंटल से एक हजार कम 4500 से 4800 रुपये प्रति क्विंटल ही खरीद लेते हैं। इसको देखते हुए शासन ने किसानों से सरसों खरीद के लिए क्रय केंद्र खोलने का निर्देश दिया। एआर सहकारिता राघवेंद्र शुक्ला ने बताया कि हर ब्लॉक में एक-एक केंद्र प्रस्तावित किया गया है। खरीद का कोई लक्ष्य तय नहीं है। गोपीगंज के मंडी समिति, सुरियावां, जंगीगंज, औराई, अभोली और भदोही में केंद्र खोले जाएंगे। उन्होंने उम्मीद जताई कि 15 से 20 अप्रैल के मध्य केंद्र खोले जा सकेंगे। कृषि विभाग के आंकड़ो पर गौर करें तो वित्तीय वर्ष 2023-24 में 383 हेक्टेयर रकबे में 483 एमटी उत्पादन का लक्ष्य तय किया गया है।
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जिले में 70 हजार हेक्टेयर में खेती की जाती है। इसमें 50 हजार हेक्टेयर में रबी-खरीफ की खेती होती है जबकि शेष रकबे में फल, सब्जी समेत अन्य की खेती की जाती है। रबी और खरीफ सीजन में किसानों से गेहूं और धान की खरीद की जाती है। वैसे तो जिले में पहले सरसों की खेती नाममात्र की होती थी, लेकिन तेल की बढ़ती कीमतों के कारण अधिकतर किसानों ने राई-सरसों की खेती का रकबा बढ़ा दिया है। पांच से छह साल पूर्व तक जहां 50 से 80 हेक्टेयर रकबे में ही सरसों की खेती होती थी, वहीं अब यह रकबा 383 हेक्टेयर तक पहुंच गया है। रकबा बढ़ने से पैदावार भी बढ़ गई है। अकिधतर किसान अपनी जरूरत के हिसाब से सरसों की खेती करते हैं, लेकिन काफी संख्या में ऐसे किसान हैं जो व्यापारिक दृष्टिकोण से खेती करते हैं। गेहूं-धान के बजाए सरसों में उन्हें अच्छा फायदा होता है। किसानों की विवशता को समझकर व्यापारी समर्थन मूल्य करीब 5600 रुपये प्रति क्विंटल से एक हजार कम 4500 से 4800 रुपये प्रति क्विंटल ही खरीद लेते हैं। इसको देखते हुए शासन ने किसानों से सरसों खरीद के लिए क्रय केंद्र खोलने का निर्देश दिया। एआर सहकारिता राघवेंद्र शुक्ला ने बताया कि हर ब्लॉक में एक-एक केंद्र प्रस्तावित किया गया है। खरीद का कोई लक्ष्य तय नहीं है। गोपीगंज के मंडी समिति, सुरियावां, जंगीगंज, औराई, अभोली और भदोही में केंद्र खोले जाएंगे। उन्होंने उम्मीद जताई कि 15 से 20 अप्रैल के मध्य केंद्र खोले जा सकेंगे। कृषि विभाग के आंकड़ो पर गौर करें तो वित्तीय वर्ष 2023-24 में 383 हेक्टेयर रकबे में 483 एमटी उत्पादन का लक्ष्य तय किया गया है।
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