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डाक विभाग के गले की फांस बनेंगे ग्रामीण खाताधारक
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ज्ञानपुर। आठ जून से डाक विभाग विशेष अभियान चलाकर गांव-गांव जरुरतमंदों तक सरकारी पैसा पहुंचाएगा। हालांकि बैंक के खाताधारक उनके लिए परेशानी बनेंगे। लॉकडाउन के 90 दिनों में मात्र दो दिन ही डाक विभाग अपने स्तर से जमा-निकासी करा सका है।
मार्च के तीसरे सप्ताह से कोरोना वायरस की महामारी को लेकर देश व्यापी लॉकडाउन की घोषणा केंद्र सरकार ने की थी। अब अनलॉक होने के बाद भी लॉकडाउन से कहीं अधिक लापरवाही कभी भी भारी पड़ सकती है। लॉकडाउन में आम लोगों की परेशानी को देखते हुए सरकार ने जनधन खातों में प्रति माह 500, श्रमिक खातों में 1000, उज्ज्वला योजना में 1000 आदि जैसी सहायता राशि अप्रैल से जून तक भेजने की बात कही है। अप्रैल-मई में किस्त भेजी गई। उसी समय भीड़भाड़ की अधिकता को देख डाक विभाग, फीनो बैंक, ग्रामीण और जिले में संचालित अन्य बैंकों से निकालने की व्यवस्था दी गई लेकिन ग्रामीण बैंक के हजारों खाताधारक डाक विभाग के गले की फांस बन गए।
मुख्य कारण यह रहा कि मार्च तक यूबीआई से लिंक होने पर ग्रामीण बैंक की सुविधा लोगों को सरल रही लेकिन एक अप्रैल से बैंक आफ बड़ौदा के अधीन हो जाने के कारण खाताधारक उपडाक घर हो या फिर शाखा डाकघरों का चक्कर लगाना शुरू कर दिया। जबकि अन्य बैंकों की अपेक्षा जिले में चल रही काशी गोमती संयुत ग्रामीण बैंक की कुल 23 शाखाओं में दिव्यांग, विधवा, वृद्धा, जनधन आदि के खातों की संख्या में बहुत अधिक है, जो बैंक ऑफ बड़ौदा के अधीन होने के तीन माह बाद भी खाते सर्वर से मर्ज नहीं हो सके।
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एलडीएम उमेश कुमार ने जिम्मेदारी से हाथ पीछे खींच लिया। वहीं उप मंडलीय निरीक्षक डाक शशिकांत का कहना रहा कि इस बाबत अधिकारियों तक लिखापढ़ी की जा चुकी है। वहीं ग्रामीण बैंक के रीजनल मैनेजर एचके मौर्या का कहना रहा कि मामला संज्ञान में न होने के कारण समस्या आ रही थी, अब उचित कदम उठाकर खाताधारकों की समस्या का समाधान कराया जाएगा।
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मार्च के तीसरे सप्ताह से कोरोना वायरस की महामारी को लेकर देश व्यापी लॉकडाउन की घोषणा केंद्र सरकार ने की थी। अब अनलॉक होने के बाद भी लॉकडाउन से कहीं अधिक लापरवाही कभी भी भारी पड़ सकती है। लॉकडाउन में आम लोगों की परेशानी को देखते हुए सरकार ने जनधन खातों में प्रति माह 500, श्रमिक खातों में 1000, उज्ज्वला योजना में 1000 आदि जैसी सहायता राशि अप्रैल से जून तक भेजने की बात कही है। अप्रैल-मई में किस्त भेजी गई। उसी समय भीड़भाड़ की अधिकता को देख डाक विभाग, फीनो बैंक, ग्रामीण और जिले में संचालित अन्य बैंकों से निकालने की व्यवस्था दी गई लेकिन ग्रामीण बैंक के हजारों खाताधारक डाक विभाग के गले की फांस बन गए।
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मुख्य कारण यह रहा कि मार्च तक यूबीआई से लिंक होने पर ग्रामीण बैंक की सुविधा लोगों को सरल रही लेकिन एक अप्रैल से बैंक आफ बड़ौदा के अधीन हो जाने के कारण खाताधारक उपडाक घर हो या फिर शाखा डाकघरों का चक्कर लगाना शुरू कर दिया। जबकि अन्य बैंकों की अपेक्षा जिले में चल रही काशी गोमती संयुत ग्रामीण बैंक की कुल 23 शाखाओं में दिव्यांग, विधवा, वृद्धा, जनधन आदि के खातों की संख्या में बहुत अधिक है, जो बैंक ऑफ बड़ौदा के अधीन होने के तीन माह बाद भी खाते सर्वर से मर्ज नहीं हो सके।
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एलडीएम उमेश कुमार ने जिम्मेदारी से हाथ पीछे खींच लिया। वहीं उप मंडलीय निरीक्षक डाक शशिकांत का कहना रहा कि इस बाबत अधिकारियों तक लिखापढ़ी की जा चुकी है। वहीं ग्रामीण बैंक के रीजनल मैनेजर एचके मौर्या का कहना रहा कि मामला संज्ञान में न होने के कारण समस्या आ रही थी, अब उचित कदम उठाकर खाताधारकों की समस्या का समाधान कराया जाएगा।