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चहेतों के लिए ताक पर नियम-कानून

Fri, 10 Jan 2020 11:24 PM IST
Varanasi Bureau वाराणसी ब्यूरो
Updated Fri, 10 Jan 2020 11:24 PM IST
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Rule of law
ज्ञानपुर। अक्सर किसी ने किसी प्रकरण को लेकर सुर्खियों में रहा स्वास्थ्य विभाग एक बार फिर विवादों में घिर गया है। चहेतों को लाभ पहुंचाने के लिए शासन से तय नियम और कानून ताक पर रख दिया जा रहा है। सरकारी अस्पतालों में प्रसूताओं के भोजन से लेकर साफ-सफाई में काम करने वाली दो फर्मे चार साल से काम कर रही हैं। मैनुअल से लेकर ई-टेंडरिंग की व्यस्था में मठाधीश खेल कर जा रहे हैं, जबकि आला अफसर अनजान हैं।
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सरकारी स्वास्थ्य सुविधाओं के लिहाज से दो जिला अस्पताल, पांच सीएचसी और 16 पीएचसी जिले में स्थापित हैं। अस्पतालों में प्रसूताओं को नाश्ते से लेकर खाना आदि की सुविधाएं दी जाती हैं। इसके अलावा इमरजेंसी, सामान्य और प्रसूताओं के बेड की समय-समय पर साफ-सफाई भी जाती है। इसके लिए स्वास्थ्य विभाग की ओर से हर वित्तीय वर्ष में फर्में चयनित की जाती हैं, लेकिन जिले में दो फर्में चार साल से काम कर रही हैं। अस्पतालों में व्यस्थाएं सही हो या नहीं, लेकिन तालमेल बेहतर होने पर कोई दिक्कत नहीं है। सूत्रों की मानें तो मैनुअल में कागजी दिक्कत और ई-टेंडरिंग में तकनीकी समस्या दिखाकर आवेदन करने वाली दूसरी फर्में बाहर कर दी जाती हैं। अस्पतालों की व्यवस्था न बिगड़े, इसके लिए निदेेशालय स्तर से काम जारी रखने के लिए कह दिया जाता है। धीरे-धीरे चार साल हो गए, लेकिन दूसरी फर्में चयनित नहीं हो सकीं। मजे की बात यह है कि महिला होने के नाते मुख्य चिकित्सा अधिकारी भी इससे अनजान ही बनी रह जाती हैं। सीएमओ डॉ. लक्ष्मी सिंह ने कहा कि फर्म चयन में ई- टेंडरिंग की व्यवस्था है। अगर कहीं कोई समस्या है तो उसमें सुधार किया जाएगा। बताते चलें कि दो जिला अस्पतालों संग अन्य पीएचसी और सीएचसी पर हर साल भोजन और सफाई पर लाखों खर्च होता है।
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