पूर्व विधायक विजय मिश्रा समेत छह को राहत: दो साल की सजा निरस्त, मजिस्ट्रेट कोर्ट का फैसला; 2002 में हुआ था FIR
भदोही में पूर्व विधायक विजय मिश्रा समेत छह लोगों को राहत मिली है। अदालत ने फरवरी 2025 में एमपी-एमएलए मजिस्ट्रेट कोर्ट से सुनाई गई दो साल की सजा को निरस्त कर दिया। मामला 2002 में दर्ज प्राथमिकी से जुड़ा है, जिसे पूर्व सांसद गोरखनाथ के भाई ने दर्ज कराया था। अदालत के फैसले से आरोपियों को राहत मिली है।
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सपा व निषाद पार्टी के पूर्व विधायक विजय मिश्रा, डीघ ब्लॉक प्रमुख मनीष मिश्रा समेत छह लोगों को कोर्ट से बड़ी राहत मिली है। पूर्व सांसद गोरखनाथ पांडेय के भाई को धमकी मामले में एक साल पूर्व हुई दो साल की सजा को एमपीएमएल कोर्ट ने निरस्त कर दिया। जिले में 2002 के विधानसभा चुनावों के दौरान ज्ञानपुर विधानसभा सीट से तत्कालीन विधायक व पूर्व सांसद गोरखनाथ पांडेय भाजपा और विजय मिश्रा सपा के टिकट पर चुनाव लड़ रहे थे।
बताया जा रहा है कि दोनों के बीच कांटे का मुकाबला चल रहा था। कोईरौना क्षेत्र के मदनपुरा बूथ पर रिपोलिंग के दौरान गोरखनाथ पांडेय के भाई त्रंयबकेश्वर पांडेय और रामेश्वरनाथ पांडेय के अलावा पूर्व विधायक विजय मिश्रा और मनीष मिश्रा भी मौजूद थे। रिपोलिंग के दौरान ही दोनों पक्षों के बीच विवाद शुरू हो गया। विवाद और मारपीट के बीच विजय मिश्रा और मनीष मिश्रा ने रामेश्वर पांडेय और त्रंयबकेश्वर पांडेय पर गोली चला दी। जिसमें दोनों घायल हो गए।
हमले में त्रंयबकेश्वर पांडेय तो बच गए, लेकिन रामेश्वर पांडेय की मौत हो गई। पूर्व सांसद के भतीजे रामकृष्ण पांडेय ने दोनों पर हत्या का मुकदमा दर्ज कराया। इसी मामले में छह जून 2002 को विधायक पेशी पर आए थे। आरोप है कि इस दौरान विधायक समेत उनके भतीजे मनोज मिश्रा उर्फ लाला, गुलाब शंकर मिश्रा और रिश्तेदार कृष्णमोहन तिवारी व आद्या प्रसाद ने रामकृष्ण को जान से मारने की धमकी दी। जिस मामले में पुलिस ने सभी के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया।
इस मामले में फरवरी 2025 में एमपीएमलए मजिस्ट्रेट कोर्ट ने पूर्व विधायक समेत छह को दो-दो साल की सजा सुनाई थी। जिसके बाद पूर्व विधायक ने अपने अधिवक्ता के माध्यम से एमपीएमएलए सेशन कोर्ट में सजा के खिलाफ अपील दाखिल किया। बृहस्पतिवार को मामले की सुनवाई करते हुए न्यायाधीश पुष्पा सिंह ने सजा को निरस्त कर दिया।