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गजिया आरओबी का मुआवजा लेने से किया इंकार
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भदोही। अहमदगंज गजिया रेलवे ओवरब्रिज के जद में आ रहे गृहस्वामियों ने शुक्रवार को मकान गिराने के सहमति पत्र पर हस्ताक्षर करने से इंकार कर दिया। सहमति पत्र का प्रारूप लेकर पहुंचे लेखपालों के मुआवजे की दर बताने पर गृहस्वामी भड़क गए और उन्हें बैरंग लौटा दिया। लेखपालों ने बताया कि शासन ने प्रति वर्ग मीटर भूमि की कीमत साढ़े 38 हजार रुपये आंकी है। इस पर लोगों का कहना था कि प्रशासन ने 31 जुलाई को मुख्यालय बुलाकर कहा था कि दोगुनी कीमत दी जाएगी।
लंबे अरसे से रुके गजिया आरओबी की सभी बाधाएं दूर हो चुकी हैं। प्रशासन निर्माण कार्य प्रारंभ कराने के लिए सूचीबद्ध 64 लोगों को शीघ्र मुआवजे की रकम देकर निर्माण कार्य शुरू कराना चाहता है। इसी क्रम में शुक्रवार को तहसील के दो लेखपाल सहमति पत्र लेकर हस्ताक्षर कराने पहुंचे। बताते हैं कि 6-7 गृहस्वामियों ने हस्ताक्षर कर दिए थे। तभी कुछ लोगों को जानकारी हुई तो हस्तारक्ष करने से मना कर दिया। लोगों ने कहा कि पहले तो किसी सक्षम अधिकारी को हम लोगों के साथ बैठक कर हमारी भूमि की कीमत बतानी चाहिए। इसके बाद सोच विचार के बाद हम हस्ताक्षर करेंगे। विकास सेठ ने कहा कि प्रशासन ने 31 जुलाई को जिला मुख्यालय पर हुई बैठक में जो कहा था, उस पर अमल करे। बैठक में तय हुआ था कि होने वाले निर्णय से हम लोगों को अवगत कराने के बाद ही कोई कार्रवाई की जाएगी। लेकिन बगैर किसी सूचना के आज लेखपाल सिद्धनाथ और रामा गिरी आ धमके और अंधेरे में रखकर कुछ लोगों से सहमति पत्र पर हस्ताक्षर भी करा लिया। कहा कि हम लोगों ने चार गुना मुआवजे की मांग रखी थी, लेकिन प्रशासन ने आज के रेट से दोगुनी कीमत देने की बात कही थी। लोगों ने कहा कि पहले प्रशासन हम लोगों के साथ बैठक करे। हमें हमारी जमीन की कीमत बताए इसके बाद हस्ताक्षर कराए।
डविरोध जताने वालों में विक्की गुप्ता, राजू मिश्र, आलोक दूबे, नवीन चौरसिया, पीयूष बरनवाल, मुख्तार अहमद, गणेश गुप्ता, प्रिंस गुप्ता, संजय गुप्ता आदि रहे। उधर सहमती पत्र लेकर आए लेखपालों ने बताया कि उप्र राज्य सेतु निगम ने 64 लोगो का लगभग 8 करोड़ का मुआवजा तैयार किया है।
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लंबे अरसे से रुके गजिया आरओबी की सभी बाधाएं दूर हो चुकी हैं। प्रशासन निर्माण कार्य प्रारंभ कराने के लिए सूचीबद्ध 64 लोगों को शीघ्र मुआवजे की रकम देकर निर्माण कार्य शुरू कराना चाहता है। इसी क्रम में शुक्रवार को तहसील के दो लेखपाल सहमति पत्र लेकर हस्ताक्षर कराने पहुंचे। बताते हैं कि 6-7 गृहस्वामियों ने हस्ताक्षर कर दिए थे। तभी कुछ लोगों को जानकारी हुई तो हस्तारक्ष करने से मना कर दिया। लोगों ने कहा कि पहले तो किसी सक्षम अधिकारी को हम लोगों के साथ बैठक कर हमारी भूमि की कीमत बतानी चाहिए। इसके बाद सोच विचार के बाद हम हस्ताक्षर करेंगे। विकास सेठ ने कहा कि प्रशासन ने 31 जुलाई को जिला मुख्यालय पर हुई बैठक में जो कहा था, उस पर अमल करे। बैठक में तय हुआ था कि होने वाले निर्णय से हम लोगों को अवगत कराने के बाद ही कोई कार्रवाई की जाएगी। लेकिन बगैर किसी सूचना के आज लेखपाल सिद्धनाथ और रामा गिरी आ धमके और अंधेरे में रखकर कुछ लोगों से सहमति पत्र पर हस्ताक्षर भी करा लिया। कहा कि हम लोगों ने चार गुना मुआवजे की मांग रखी थी, लेकिन प्रशासन ने आज के रेट से दोगुनी कीमत देने की बात कही थी। लोगों ने कहा कि पहले प्रशासन हम लोगों के साथ बैठक करे। हमें हमारी जमीन की कीमत बताए इसके बाद हस्ताक्षर कराए।
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डविरोध जताने वालों में विक्की गुप्ता, राजू मिश्र, आलोक दूबे, नवीन चौरसिया, पीयूष बरनवाल, मुख्तार अहमद, गणेश गुप्ता, प्रिंस गुप्ता, संजय गुप्ता आदि रहे। उधर सहमती पत्र लेकर आए लेखपालों ने बताया कि उप्र राज्य सेतु निगम ने 64 लोगो का लगभग 8 करोड़ का मुआवजा तैयार किया है।
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