ज्ञानपुर। कोविड-19 में पूर्वोत्तर रेलवे प्रशासन नई-नई तकनीकियों को इजाद कर सुरक्षित रेल संचालन में उच्च स्तरीय सफलता हासिल कर रहा है। प्रवासियों के लिए कोरोना स्पेशल ट्रेन चलाकर लॉकडाउन में आवश्यक सामानों की ढुलाई के लिए सस्ते दर पर रैकों का संचालन, ई-संवाद कक्ष, जल संरक्षण के लिए क्विक सिस्टम में सफलता पाकर अब रेल पटरियों की सुरक्षा के प्रति गंभीरता दिखाते हुए वाटर लेवल मॉनीटरिंग सिस्टम से नदियों में बढ़-घट रहे जल स्तर पर नियंत्रण पाना शुरू कर दिया है।
जानकारी देते हुए पीआरओ वाराणसी मंडल अशोक कुमार ने बताया कि पहले पुरानी तकनीकी से जल स्तर पर नजर रखी जा रही थी, लेकिन इस कार्य में कई-कई कर्मचारियों के लगने और समय भी काफी लगता था, लेकिन नई तकनीक आ जाने से त्वरित निगरानी संभव होगी। पूर्वोत्तर के तीन मंडलों के अधीन दर्जन भर से अधिक स्थानों को जोड़ते हुए नदियों पर पुल बनाए गए हैं। भारी बरसात के समय नदियों का जल स्तर बढ़ते ही पटरियों की सुरक्षा और संरक्षा पर सवाल उठना शुरू हो जाता रहा है, लेकिन अब उस पर नियंत्रण रहेगा। सोलर से चलने वाले नए सिस्टम को पुलों पर लगाने चिपयुक्त सेंसर सहायक मंडल इंजीनियर, कार्य निरीक्षक, रेल पथ निरीक्षकों का मोबाइल नंबर फीड होने से जल स्तर बढ़ने और घटने की जानकारी अपनेआप एसएमएस के जरिए मिलेगी जो त्वरित कदम उठाकर सुरक्षा-संरक्षा के हित में कार्य करना शुरू देंगे। प्रथम चरण में गंगा नदी दारागंज-झूंसी के मध्य बने आइजट ब्रिज, मांझी-बकुलहा के पुल संख्या-16, पनियहवा-वाल्मीकि नगर के बीच बने पुल संख्या-50 और शारदा नदी केपुल संख्या-97 पर लगाकर निगरानी शुरू करा दी है। सिस्टम कामयाब रहा हो तो अन्य बड़े पुलों और ब्रिजों पर सिस्टम को लगा दिया जाएगा।