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Bhadohi News: भदोही में इंटर कॉलेज के प्रधानाचार्य को मारीं छह गोलियां, मौत
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भदोही। बाइक सवार दो बदमाशों ने सोमवार को दिनदहाड़े कोतवाली क्षेत्र के बसावनपुर गांव के पास इंद्रबहादुर सिंह नेशनल इंटर कॉलेज के प्रभारी प्रधानाचार्य योगेंद्र बहादुर सिंह (56) की गोली मारकर हत्या कर दी। पोस्टमार्टम से पता चला कि बदमाशों ने प्रधानाचार्य को करीब छह गोली मारी और भाग निकले। प्रधानाचार्य के सीने में दो, पेट में दो, हाथ और पैर में एक- एक गोली लगी है।
एक गोली कार के टायर पर मारी गई ताकि प्रधानाचार्य को इलाज के लिए अस्पताल न ले जाया जा सके। स्थानीय लोगों का कहना था कि बदमाश जिस तरह से ताबड़तोड़ गोली बरसा रहे थे, उससे रहा था कि प्रधानाचार्य को हर हाल में मौत के घाट उतारना चाह रहे थे। पुलिस के मुताबिक प्रथम दृष्टया मामला आपसी रंजिश का लग रहा है। फिलहाल हत्या की असली वजह की जांच की जा रही है। मामले में कार चालक संतोष सिंह से पूछताछ की जा रही है। घटना से शिक्षकों में नाराजगी है। शिक्षकों ने बड़े आंदोलन की चेतावनी दी है।
कोतवाली के अमिलौरी निवासी प्रधानाचार्य योगेंद्र बहादुर सिंह घर से कार में सवार होकर भदोही के नेशनल इंटर कॉलेज जा रहे थे। कार उनका ड्राइवर संतोष सिंह चल रहा था। प्रधानाचार्य आगे की बाईं सीट पर बैठे थे। घर से करीब 800 मीटर दूर बसावनपुर के पास पहुंचे थे कि बाइक सवार दो युवकों ने बाईं तरफ से ओवरटेक किया और हाथ देकर कार रोकवा लिया। दोनों बाइक से उतरकर कार के पास पहुंचे और प्रधानाचार्य से कहा कि आपका मोबाइल रह गया था। प्रधानाचार्य ने जैसे ही कार का शीशा नीचे किया, वैसे ही दोनों ने ताबड़तोड़ गोलियां बरसानी शुरू कर दी। जब प्रधानाचार्य अचेत हो गए, तब बदमाश कार की टायर में गोली मारते हुए भाग निकले। इससे कार का टायर फट गया। घटना के बाद चालक उसी कार से प्रधानाचार्य को लेकर अस्पताल पहुंचा, जहां डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। डॉक्टरों ने ही मामले की सूचना कोतवाली थाने की पुलिस को दी। इसके बाद पुलिस अस्पताल पहुंची, फिर फॉरेंसिक टीम और डॉग स्क्वॉड के साथ घटनास्थल पर पहुंची। मौका मुआयना करके साक्ष्य जुटाए। पुलिस अब आसपास लगे सीसी कैमरों की जांच कर रही है। डीआईजी आरपी सिंह और एसपी डॉ मीनाक्षी कात्यायन ने भी घटनास्थल पर जाकर जानकारी ली है। एसपी डॉ. मीनाक्षी ने बताया कि घटना के सभी पहलुओं की जांच की जा रही है। जल्द ही घटना का खुलासा किया जाएगा।
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2009 से ही कार चला रहा है संतोष
योगेंद्र बहादुर सिंह ने गत तीन जुलाई को ही कार्यवाहक प्रधानाचार्य का कार्यभार संभाला था। पुलिस के मुताबिक रयां गांव निवासी संतोष सिंह 2009 से ही योगेंद्र बहादुर की कार चला रहा है। घटना के बाद चालक संतोष तेजी से कार लेकर एमबीएस हॉस्पिटल पहुंचा, जहां चिकित्सकों ने प्रधानाचार्य को मृत घोषित कर दिया।
भाजपा नेता हैं इंटर कॉलेज के प्रबंधक
जिस इंटर कॉलेज के प्रधानाचार्य की हत्या हुई है, उसके प्रबंधक भाजपा काशी प्रांत के मंत्री आशीष सिंह बघेल हैं। उन्होंने घटना को दुर्भाग्यपूर्ण करार दिया। साथ ही कहा कि पुलिस मामले की जांच कर रही है। मामले में कड़ी कार्रवाई की अपेक्षा है। कॉलेज प्रबंधन पीड़ित परिवार के साथ खड़ा है। हर संभव मदद दिलाई जाएगी।
प्रधानाचार्य के घर से निकलने के पहले रेकी किए थे हत्यारे
ज्ञानपुर (भदोही)। प्रधानाचार्य योगेंद्र बहादुर सिंह की हत्या के तरीके से यह माना जा रहा है कि हत्या के लिए बदमाश पूरी तैयारी के साथ आए थे। इसके लिए बहुत पहले से ही बदमाश रेकी कर रहे थे। सोमवार को सटीक मौका देख उन्होंने घटना को अंजाम दिया।
प्रधानाचार्य योगेंद्र की हत्या घर से करीब 800 मीटर दूर ऐसी जगह की गई, जहां दूर तक न तो कोई घर था और न ही कोई सीसी कैमरा। बदमाश उनके घर से निकलने के बाद घर से गांव के बाहर जंगमबाड़ी रोड पर आते ही उनके पीछे लग गए थे। घटना के तरीके से पुलिस को ये यकीन है कि बदमाश काफी दिनों से प्रधानाचार्य की हर एक गतिविधि पर नजर रखे हुए थे। उनके कॉलेज आने-जाने की टाइमिंग, रास्ते को भी बखूबी जान चुके थे।
ऐसे रहा घटनाक्रम
8.44 बजे सुबह : प्रधानाचार्य घर से बाहर निकले
9.01 बजे सुबह : बदमाशों ने कार रोक फायरिंग की
9.36 बजे सुबह : ड्राइवर संतोष कार लेकर अस्पताल पहुंचा
छह भाइयों में तीसरे नंबर थे योगेंद्र, चंडीगढ़ रहता है बेटा
प्रधानाचार्य छह भाइयों में तीसरे नंबर पर थे। 1998 में इनकी नियुक्ति नेशनल इंटर कॉलेज में काॅमर्स के शिक्षक पद पर हुई थी। बीते तीन जुलाई को उन्होंने कॉलेज में बतौर प्रभारी प्रधानाचार्य पदभार ग्रहण किया। गांव में उनके साथ उनकी पत्नी किरन सिंह रहती थीं। दो बेटियों की शादी हो चुकी है। बेटा चंड़ीगढ़ के किसी कंपनी में कार्यरत है। छह भाइयों में ज्यादातर बाहर रहते हैं। एक भाई घर पर ही थे। हालांकि महिलाएं घर पर ही रहती हैं। 15 दिसंबर को इनके घर में भतीजे की शादी तय है। स्थानीय लोगों के अनुसार गांव में भी इनका किसी से कोई विवाद नहीं था।
रोज की तुलना में 15 मिनट पहले निकले थे घर से
योगेंद्र बहादुर सिंह रोज की तुलना में सोमवार को 15 मिनट पहले ही घर से कॉलेज के निकल गए थे। स्थानीय लोगों के मुताबिक हर दिन वे नौ से सवा नौ बजे के बीच घर से निकलते थे। सोमवार को वह करीब 15 मिनट पहले ही घर से निकले थे। लोगों का कहना था कि वह काफी सरल स्वाभाव के थे। प्रधानाचार्य बनने के बाद ही उन्होंने कार से कॉलेज आना-जाना शुरू किया।
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एक गोली कार के टायर पर मारी गई ताकि प्रधानाचार्य को इलाज के लिए अस्पताल न ले जाया जा सके। स्थानीय लोगों का कहना था कि बदमाश जिस तरह से ताबड़तोड़ गोली बरसा रहे थे, उससे रहा था कि प्रधानाचार्य को हर हाल में मौत के घाट उतारना चाह रहे थे। पुलिस के मुताबिक प्रथम दृष्टया मामला आपसी रंजिश का लग रहा है। फिलहाल हत्या की असली वजह की जांच की जा रही है। मामले में कार चालक संतोष सिंह से पूछताछ की जा रही है। घटना से शिक्षकों में नाराजगी है। शिक्षकों ने बड़े आंदोलन की चेतावनी दी है।
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कोतवाली के अमिलौरी निवासी प्रधानाचार्य योगेंद्र बहादुर सिंह घर से कार में सवार होकर भदोही के नेशनल इंटर कॉलेज जा रहे थे। कार उनका ड्राइवर संतोष सिंह चल रहा था। प्रधानाचार्य आगे की बाईं सीट पर बैठे थे। घर से करीब 800 मीटर दूर बसावनपुर के पास पहुंचे थे कि बाइक सवार दो युवकों ने बाईं तरफ से ओवरटेक किया और हाथ देकर कार रोकवा लिया। दोनों बाइक से उतरकर कार के पास पहुंचे और प्रधानाचार्य से कहा कि आपका मोबाइल रह गया था। प्रधानाचार्य ने जैसे ही कार का शीशा नीचे किया, वैसे ही दोनों ने ताबड़तोड़ गोलियां बरसानी शुरू कर दी। जब प्रधानाचार्य अचेत हो गए, तब बदमाश कार की टायर में गोली मारते हुए भाग निकले। इससे कार का टायर फट गया। घटना के बाद चालक उसी कार से प्रधानाचार्य को लेकर अस्पताल पहुंचा, जहां डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। डॉक्टरों ने ही मामले की सूचना कोतवाली थाने की पुलिस को दी। इसके बाद पुलिस अस्पताल पहुंची, फिर फॉरेंसिक टीम और डॉग स्क्वॉड के साथ घटनास्थल पर पहुंची। मौका मुआयना करके साक्ष्य जुटाए। पुलिस अब आसपास लगे सीसी कैमरों की जांच कर रही है। डीआईजी आरपी सिंह और एसपी डॉ मीनाक्षी कात्यायन ने भी घटनास्थल पर जाकर जानकारी ली है। एसपी डॉ. मीनाक्षी ने बताया कि घटना के सभी पहलुओं की जांच की जा रही है। जल्द ही घटना का खुलासा किया जाएगा।
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2009 से ही कार चला रहा है संतोष
योगेंद्र बहादुर सिंह ने गत तीन जुलाई को ही कार्यवाहक प्रधानाचार्य का कार्यभार संभाला था। पुलिस के मुताबिक रयां गांव निवासी संतोष सिंह 2009 से ही योगेंद्र बहादुर की कार चला रहा है। घटना के बाद चालक संतोष तेजी से कार लेकर एमबीएस हॉस्पिटल पहुंचा, जहां चिकित्सकों ने प्रधानाचार्य को मृत घोषित कर दिया।
भाजपा नेता हैं इंटर कॉलेज के प्रबंधक
जिस इंटर कॉलेज के प्रधानाचार्य की हत्या हुई है, उसके प्रबंधक भाजपा काशी प्रांत के मंत्री आशीष सिंह बघेल हैं। उन्होंने घटना को दुर्भाग्यपूर्ण करार दिया। साथ ही कहा कि पुलिस मामले की जांच कर रही है। मामले में कड़ी कार्रवाई की अपेक्षा है। कॉलेज प्रबंधन पीड़ित परिवार के साथ खड़ा है। हर संभव मदद दिलाई जाएगी।
प्रधानाचार्य के घर से निकलने के पहले रेकी किए थे हत्यारे
ज्ञानपुर (भदोही)। प्रधानाचार्य योगेंद्र बहादुर सिंह की हत्या के तरीके से यह माना जा रहा है कि हत्या के लिए बदमाश पूरी तैयारी के साथ आए थे। इसके लिए बहुत पहले से ही बदमाश रेकी कर रहे थे। सोमवार को सटीक मौका देख उन्होंने घटना को अंजाम दिया।
प्रधानाचार्य योगेंद्र की हत्या घर से करीब 800 मीटर दूर ऐसी जगह की गई, जहां दूर तक न तो कोई घर था और न ही कोई सीसी कैमरा। बदमाश उनके घर से निकलने के बाद घर से गांव के बाहर जंगमबाड़ी रोड पर आते ही उनके पीछे लग गए थे। घटना के तरीके से पुलिस को ये यकीन है कि बदमाश काफी दिनों से प्रधानाचार्य की हर एक गतिविधि पर नजर रखे हुए थे। उनके कॉलेज आने-जाने की टाइमिंग, रास्ते को भी बखूबी जान चुके थे।
ऐसे रहा घटनाक्रम
8.44 बजे सुबह : प्रधानाचार्य घर से बाहर निकले
9.01 बजे सुबह : बदमाशों ने कार रोक फायरिंग की
9.36 बजे सुबह : ड्राइवर संतोष कार लेकर अस्पताल पहुंचा
छह भाइयों में तीसरे नंबर थे योगेंद्र, चंडीगढ़ रहता है बेटा
प्रधानाचार्य छह भाइयों में तीसरे नंबर पर थे। 1998 में इनकी नियुक्ति नेशनल इंटर कॉलेज में काॅमर्स के शिक्षक पद पर हुई थी। बीते तीन जुलाई को उन्होंने कॉलेज में बतौर प्रभारी प्रधानाचार्य पदभार ग्रहण किया। गांव में उनके साथ उनकी पत्नी किरन सिंह रहती थीं। दो बेटियों की शादी हो चुकी है। बेटा चंड़ीगढ़ के किसी कंपनी में कार्यरत है। छह भाइयों में ज्यादातर बाहर रहते हैं। एक भाई घर पर ही थे। हालांकि महिलाएं घर पर ही रहती हैं। 15 दिसंबर को इनके घर में भतीजे की शादी तय है। स्थानीय लोगों के अनुसार गांव में भी इनका किसी से कोई विवाद नहीं था।
रोज की तुलना में 15 मिनट पहले निकले थे घर से
योगेंद्र बहादुर सिंह रोज की तुलना में सोमवार को 15 मिनट पहले ही घर से कॉलेज के निकल गए थे। स्थानीय लोगों के मुताबिक हर दिन वे नौ से सवा नौ बजे के बीच घर से निकलते थे। सोमवार को वह करीब 15 मिनट पहले ही घर से निकले थे। लोगों का कहना था कि वह काफी सरल स्वाभाव के थे। प्रधानाचार्य बनने के बाद ही उन्होंने कार से कॉलेज आना-जाना शुरू किया।