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नगदी संकट से दस प्रतिशत बढ़े जरूरी वस्तुओं के दाम
अमर उजाला ब्यूरो , भदोही
Updated Sat, 19 Nov 2016 12:32 AM IST
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नगदी के किल्लत से दुकानों पर घटे ग्राहक
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भदोही। जब से 1000 और 500 के नोटबंदी की घोषणा हुई है हर तरफ नगदी के लिए मारा मारी शुरू हो गई है। इसका बड़े किराना व्यवसाई भरपूर लाभ उठा रहे हैं। जिनके पास स्टाक है वे आटा, दाल, चावल की कीमतें दस प्रतिशत तक बढ़ाकर बता रहे हैं। लेकिन उनकी समस्या यह है कि बाजार में नगदी नहीं है। मझोले दुकानदार उधारी से परेशान हो उठे हैं। वे इस स्थिति से जद्दोजहद करने में लगे हैं। लोगों की जेब में रुपये नहीं होने से लोग दुकानों पर नहीं पहुंच रहे हैं। जिनके पास संसाधन है वे इस स्थिति का भरपूर लाभ उठाने के प्रयास में हैं।
किराना व्यवसाय यहां के नागरिकों के साथ साथ शहर में फैले दर्जनों कालीन कारखानो में बुनाई कर रहे सैक़ड़ो बुनकरों पर आश्रृत हैं। बीते 8 नवंबर को प्रधानमंत्री की घोषणा के बाद से 1000 और 500 के नोटबंदी से खरीदारी 100 और 50 के नोटो पर आ गई। मोहल्ला बंधवा स्थित कालीन कारखाने के बुनकर सेराज ने बताया कि हम लोगों की जेब में रुपये नहीं है और आटा, दाल चावल की कीमतें बढ़ गई हैं। हम लोगों के पास तो पैसे ही नहीं हैं। ऐसे में हम 100 और 50 के नोट कहां से लाएं? कहा कि जिनके पास छोटे नोट थे वे दबाकर रख लिए और जिनके पास छोटे नोट नहीं थे वे उन्हें देखने को तरस गए हैं। शहर में कई बड़े व्यापारी ऐसे हैं जो चावल, दाल, गेहूं का स्टाक बनाकर रखे हुए है। वे कीमतें बढ़ाने के लिए उसे दबाकर रखे हुए हैं। कोई पूछने आ रहा है तो कीमतों में दस प्रतिशत तक बढ़ोत्तरी कर बता रहे हैं। कहा जा रहा है कि यदि कैश की किल्लत दूर नहीं हुई तो जरूरी सामानों की कीमतें उछाल मार सकती हैं। समाचार पत्र विक्रेता दीनानाथ बरनवाल ने कहा कि ग्राहक 500 या 1000 के नोट थमा रहे हैं। छोटे नोटों के अभाव में हम लोगों को भुगतान करने में भारी समस्या हो रही है। रोजमर्रा की वस्तुएं खरीदने के लिए भी हमारे पास छोटे नोट नहीं रह गए। रही सही कसर बैंकों में नगदी की किल्लत ने पूरी कर दी। जिसका खामियाजा हम लोग आज तक भुगत रहे हैं।ठकुरा रोड स्थित किराना दुकानदार देवेंद्र तिवारी ने सवाल करने पर बताया कि कोई कीमत नहीं बढ़ी है। बल्कि हम लोग उधार दे दे कर परेशान हो चुके हैं। कहा कि बाजार में छोटे नोट नहीं है। या तो हम लोग हांथ पर हांथ धरे बैठे रहें अथवा उधारी देकर कुछ बिक्री करें। भुगतान तो मिलना ही है थोड़ी देर हो सकती है।
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