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पांचवें दिन भी केंद्रों पर नहीं हुई धान की खरीद
ब्यूरो,अमर उजाला,भदोही
Updated Thu, 06 Apr 2017 12:38 AM IST
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एक अप्रैल से शुरू हुए गेहूं खरीद सीजन के पांचवे दिन बुधवार को भी क्रय केंद्रों पर धान की खरीद नही हुई।
जिले में फसलों की कटाई से लेकर मढ़ाई तक देरी में होने से क्रय केंद्रों पर किसानों की आमद समय से नहीं हो पाती। एजेंसियों के बहुत मेहनत पर ही सीजन के पहले पखवारे में खरीद की बो हनी हो पाती है। क्योंकि प्रदेश के पश्चिम के जिलों में गेहूं हो या धान की पैदावार पूर्वांचल की अपेक्षा पहले होती है। इसके चलते वहां पर सीजन शुरू होते ही खरीदारी शुरू हो जाती है। जबकि पूर्वांचल क्षेत्र में महीना या 15 दिन बीतने के बाद खरीदारी शुरू हो पाती है। इस के चलते शासन की ओर से पूर्वांचल में पिछले साल धान खरीद के सीजन में एक माह की कटौती कर दी गई। इससे एक नवंबर से शुरू हुए सीजन में कुछ समय बाद ही खरीदारी शुरू हो गई। कुछ इसी तरह गेहूं के फसलों की तैयारी से लेकर कटाई, मढ़ाई में देरी होने से किसानों का मानना है कि समय और क्षेत्र के हिसाब से खरीदारी का सीजन शुरू होना चाहिए।
जिले में भारतीय किसान यूनियन के पदाधिकारी ईश्वरचंद मौर्य का कहना है कि धान की तरह गेहूं के भी क्रय सीजन में कटौती कर देनी चाहिए। क्योंकि अप्रैल में नाम मात्र की खरीदारी होती है। जबकि आधी अधूरी तैयारी को पूर्ण करके ही क्रय केंद्र खोलने चाहिए। जिससे किसानों को क्रय केंद्र में अनाज बिक्री करने में दिक्कत न आए। इसी तरह किसान यूनियन के पदाधिकारी सालिक राम यादव भी मानते हैं कि धान हो या गेहूं किसानों को बिक्री करने में सुविधा मिले। उन्हें उपज का पूरा दाम भी मिले तब उनका उत्साह बढ़ेगा। क्षेत्रवार के हिसाब से किसानों के लिए सुविधा की व्यवस्था की जाए। किसानों के साथ विभागीय अधिकारी भी मानते हैं कि धान की तरह गेहूं के खरीदारी सीजन में कटौती होनी चाहिए। इससे समय से खरीदारी शुरू होगी, शेष बचे समय में किसानों को जानकारी देकर जागरूक किया जाए।
जिले में फसलों की कटाई से लेकर मढ़ाई तक देरी में होने से क्रय केंद्रों पर किसानों की आमद समय से नहीं हो पाती। एजेंसियों के बहुत मेहनत पर ही सीजन के पहले पखवारे में खरीद की बो हनी हो पाती है। क्योंकि प्रदेश के पश्चिम के जिलों में गेहूं हो या धान की पैदावार पूर्वांचल की अपेक्षा पहले होती है। इसके चलते वहां पर सीजन शुरू होते ही खरीदारी शुरू हो जाती है। जबकि पूर्वांचल क्षेत्र में महीना या 15 दिन बीतने के बाद खरीदारी शुरू हो पाती है। इस के चलते शासन की ओर से पूर्वांचल में पिछले साल धान खरीद के सीजन में एक माह की कटौती कर दी गई। इससे एक नवंबर से शुरू हुए सीजन में कुछ समय बाद ही खरीदारी शुरू हो गई। कुछ इसी तरह गेहूं के फसलों की तैयारी से लेकर कटाई, मढ़ाई में देरी होने से किसानों का मानना है कि समय और क्षेत्र के हिसाब से खरीदारी का सीजन शुरू होना चाहिए।
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जिले में भारतीय किसान यूनियन के पदाधिकारी ईश्वरचंद मौर्य का कहना है कि धान की तरह गेहूं के भी क्रय सीजन में कटौती कर देनी चाहिए। क्योंकि अप्रैल में नाम मात्र की खरीदारी होती है। जबकि आधी अधूरी तैयारी को पूर्ण करके ही क्रय केंद्र खोलने चाहिए। जिससे किसानों को क्रय केंद्र में अनाज बिक्री करने में दिक्कत न आए। इसी तरह किसान यूनियन के पदाधिकारी सालिक राम यादव भी मानते हैं कि धान हो या गेहूं किसानों को बिक्री करने में सुविधा मिले। उन्हें उपज का पूरा दाम भी मिले तब उनका उत्साह बढ़ेगा। क्षेत्रवार के हिसाब से किसानों के लिए सुविधा की व्यवस्था की जाए। किसानों के साथ विभागीय अधिकारी भी मानते हैं कि धान की तरह गेहूं के खरीदारी सीजन में कटौती होनी चाहिए। इससे समय से खरीदारी शुरू होगी, शेष बचे समय में किसानों को जानकारी देकर जागरूक किया जाए।
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