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Bhadohi News: धान की फसल गिरी, पैदावार घटने की आशंका
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बेरासपुर में बारिश से गिरी धान की फसल। संवाद
बंगाल की खाड़ी से उठे अर्नब चक्रवात के कारण पिछले 40 घंटे से जिले में रुक-रुककर बारिश हो रही है। बृहस्पतिवार की रात में तेज हवाओं संग बारिश से धान की 50 फीसदी फसल गिर गई। काटकर खेतों में छोड़ी गई फसल भी पानी में डूब गई। 40 घंटे में 46 मिलीमीटर बारिश रिकॉर्ड की गई है। कृषि विभाग के मुताबिक, हवा से 60 फीसदी तक फसल गिरी है। इससे 25 फीसदी पैदावार प्रभावित होने की आशंका जताई गई है। धान की गिरी फसल के दाने काले पड़ने की आशंका है।
जिले में करीब 40 हजार हेक्टेयर में धान की खेती हुई है। इसके अलावा बाजारा, सब्जी की खेती की जाती है। चक्रवात के कारण दो दिनों से बेमौसम बारिश से किसानों को सबसे अधिक नुकसान हुआ है। धान के साथ ही सरसों और आलू की फसल भी प्रभावित हुई है। बुधवार रात से रुक-रुक हो रही बारिश बृहस्पतिवार और शुक्रवार को दिनभर होती रही। कभी तेज तो कभी हल्की फुहारें पड़ीं। रात में 25 से 30 किमी की रफ्तार से चली हवाओं के चलते धान, बाजारे की फसल खेत में गिर गई। गांव की पगडंडी कीचड़ में सन गई। इससे आवागमन में दिक्कतें हुई।
कटाई के समय बारिश होने से धान की फसल या खलिहान या खेतों में ही पानी से सन गई है। इससे किसानों की मेहनत पर पूरी तरह से पानी फिर गया है। किसान कलिंदर मिश्रा, योगेश पांडेय, रमेश मिश्रा, पप्पू यादव, सुभाष मौर्या, अजय सिंह आदि ने जिलाधिकारी से फसल क्षतिपूर्ति की मांग की है।
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पिछले साल अक्तूबर में 50 मिमी बारिश हुई थी
मौसम विभाग के अनुसार, बीते दो दिनों में 46 मिलीमीटर बारिश दर्ज की गई। बृहस्पतिवार को 15 एमएम और शुक्रवार को 33 एमएम बारिश हुई। ये बारिश किसानों के लिए आफत बन कर आई। बीते साल भी अक्तूबर महीने में 50 मिलीमीटर और इस साल 46 मिलीमीटर बारिश दर्ज की गई है।
अधिकतम तापमान छह डिग्री गिरा
बारिश और हवाओं का असर तापमान पर भी पड़ा है। इस कारण अधिकतम पारा छह डिग्री गिरकर 25 डिग्री सेल्सियस पर पहुंच गया। वहीं न्यूनतम तापमान एक डिग्री गिरकर 18 डिग्री सेल्सियस पर आ गया। अचानक ठंड में इजाफा होने और बारिश के कारण ज्यादातर लोग घरों में रहे। रोजाना की अपेक्षा शाम को बाजारों में सन्नाटा पसरा रहा।
गिरी हुई धान के चावल में कालापन आ जाएगा। धूप होने के बाद किसान इसे अच्छी तरह से सुखवाएं। इसके बाद मड़ाई कार्य करें। तेज हवा के कारण 20 से 50 फीसदी फसल गिरी है। फसल गिरने से 25 फीसदी पैदावार घटने की आशंका है। - डॉ. आरपी चौधरी, कृषि विशेषज्ञ बेजवां।
यहां गिरी धान की फसल
हरिहरपुर, अबरना, कवडर, बेला, विसापुर, बालीपुर, कुसौदा, सहोदरपुर, इकौनी, छनौरा, पट्टी बेजाब, कपूरपुर, अर्जुनपुर, छत्तमा, तुलापुर, कीर्तिपुर, महुआपुर, सनाथपुर, चकिया, मांगुरा, बेरासपुर, सेमराध, इनारगाव, सोनैचा, बैरीबीसा, बिरनई में धान की फसल गिरी है। कुलमनपुर, महुआरी, बड़ागांव, कलनुआ, बलीपुर, नई बाजार, धौरहरा, पिपरी शिवरामपुर , कुकरौठी, अस्ति, उमरी, रया, रड़ाई, तुलसीचक और होरैयापुर, ऊंज, कुरमैचा, नवधन, सीतामढ़ी, अमवां, तुलापुर, पूरेमनोहर अभिया सहित जिले के 546 गांवों में फसल गिरी है।
72 घंटे में करें शिकायत
प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के तहत खरीफ सीजन की फसल क्षति की शिकायत किसान 72 घंटे के भीतर दर्ज करा सकते हैं। उप कृषि निदेशक डॉ. राम प्रवेश ने बताया कि प्राकृतिक आपदाओं से हुए नुकसान की भरपाई के लिए धान का 17,785 और बाजारे का 140 किसानों ने बीमा करवाया है। शिकायत दर्ज कराने के लिए कई विकल्प उपलब्ध कराए गए हैं। किसान टोल फ्री नंबर 14447 पर कॉल कर सकते हैं। व्हाट्सएप नंबर 7065514447 का भी उपयोग किया जा सकता है।
किसानों की प्रतिक्रिया
20 बीघे में धान की खेती की है। बारिश ने सारी फसल चौपट कर दी है। पहले दिन कुछ बची थी, दूसरे दिन हुई बारिश में सारी फसल गिर गई। फसल की क्षूतिपूर्ति दिलाई जाए। मौसम खराब होने के कारण कटाई नहीं हो सकी। - प्रेम बिहारी उपाध्याय हरिहरपुर।
15 बीघे में धान की खेती की है। कटाई शुरू होने वाला था, बेमौसम बारिश से सारी फसल गिर गई है। गांव में ज्यादातर किसानों का यही हाल है। बरसात का पानी खेत में लग गया है। बड़े पैमाने पर धान की फसल का नुकसान हुआ है। - अनिल कुमार सिंह, अभियां।
डेढ़ हेक्टेयर क्षेत्रफल में धान की खेती की है। लेकिन बेमौसम बारिश होने से पचास फीसदी से ज्यादा फसल गिर गई है। यही साल भर की कमाई होती है। आलू में भी पानी लग गया है। - रमाशंकर बिंद, कुरमैचा।
चार हेक्टेयर में धान की खेती की है। धान की फसल पककर तैयार है, हार्वेस्टर के इंतजार में कटाई कार्य नहीं शुरू हो सका है। बारिश के कारण एक बीघे की धान की फसल गिरी है। - श्यामधर सिंह, औराई।
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जिले में करीब 40 हजार हेक्टेयर में धान की खेती हुई है। इसके अलावा बाजारा, सब्जी की खेती की जाती है। चक्रवात के कारण दो दिनों से बेमौसम बारिश से किसानों को सबसे अधिक नुकसान हुआ है। धान के साथ ही सरसों और आलू की फसल भी प्रभावित हुई है। बुधवार रात से रुक-रुक हो रही बारिश बृहस्पतिवार और शुक्रवार को दिनभर होती रही। कभी तेज तो कभी हल्की फुहारें पड़ीं। रात में 25 से 30 किमी की रफ्तार से चली हवाओं के चलते धान, बाजारे की फसल खेत में गिर गई। गांव की पगडंडी कीचड़ में सन गई। इससे आवागमन में दिक्कतें हुई।
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कटाई के समय बारिश होने से धान की फसल या खलिहान या खेतों में ही पानी से सन गई है। इससे किसानों की मेहनत पर पूरी तरह से पानी फिर गया है। किसान कलिंदर मिश्रा, योगेश पांडेय, रमेश मिश्रा, पप्पू यादव, सुभाष मौर्या, अजय सिंह आदि ने जिलाधिकारी से फसल क्षतिपूर्ति की मांग की है।
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पिछले साल अक्तूबर में 50 मिमी बारिश हुई थी
मौसम विभाग के अनुसार, बीते दो दिनों में 46 मिलीमीटर बारिश दर्ज की गई। बृहस्पतिवार को 15 एमएम और शुक्रवार को 33 एमएम बारिश हुई। ये बारिश किसानों के लिए आफत बन कर आई। बीते साल भी अक्तूबर महीने में 50 मिलीमीटर और इस साल 46 मिलीमीटर बारिश दर्ज की गई है।
अधिकतम तापमान छह डिग्री गिरा
बारिश और हवाओं का असर तापमान पर भी पड़ा है। इस कारण अधिकतम पारा छह डिग्री गिरकर 25 डिग्री सेल्सियस पर पहुंच गया। वहीं न्यूनतम तापमान एक डिग्री गिरकर 18 डिग्री सेल्सियस पर आ गया। अचानक ठंड में इजाफा होने और बारिश के कारण ज्यादातर लोग घरों में रहे। रोजाना की अपेक्षा शाम को बाजारों में सन्नाटा पसरा रहा।
गिरी हुई धान के चावल में कालापन आ जाएगा। धूप होने के बाद किसान इसे अच्छी तरह से सुखवाएं। इसके बाद मड़ाई कार्य करें। तेज हवा के कारण 20 से 50 फीसदी फसल गिरी है। फसल गिरने से 25 फीसदी पैदावार घटने की आशंका है। - डॉ. आरपी चौधरी, कृषि विशेषज्ञ बेजवां।
यहां गिरी धान की फसल
हरिहरपुर, अबरना, कवडर, बेला, विसापुर, बालीपुर, कुसौदा, सहोदरपुर, इकौनी, छनौरा, पट्टी बेजाब, कपूरपुर, अर्जुनपुर, छत्तमा, तुलापुर, कीर्तिपुर, महुआपुर, सनाथपुर, चकिया, मांगुरा, बेरासपुर, सेमराध, इनारगाव, सोनैचा, बैरीबीसा, बिरनई में धान की फसल गिरी है। कुलमनपुर, महुआरी, बड़ागांव, कलनुआ, बलीपुर, नई बाजार, धौरहरा, पिपरी शिवरामपुर , कुकरौठी, अस्ति, उमरी, रया, रड़ाई, तुलसीचक और होरैयापुर, ऊंज, कुरमैचा, नवधन, सीतामढ़ी, अमवां, तुलापुर, पूरेमनोहर अभिया सहित जिले के 546 गांवों में फसल गिरी है।
72 घंटे में करें शिकायत
प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के तहत खरीफ सीजन की फसल क्षति की शिकायत किसान 72 घंटे के भीतर दर्ज करा सकते हैं। उप कृषि निदेशक डॉ. राम प्रवेश ने बताया कि प्राकृतिक आपदाओं से हुए नुकसान की भरपाई के लिए धान का 17,785 और बाजारे का 140 किसानों ने बीमा करवाया है। शिकायत दर्ज कराने के लिए कई विकल्प उपलब्ध कराए गए हैं। किसान टोल फ्री नंबर 14447 पर कॉल कर सकते हैं। व्हाट्सएप नंबर 7065514447 का भी उपयोग किया जा सकता है।
किसानों की प्रतिक्रिया
20 बीघे में धान की खेती की है। बारिश ने सारी फसल चौपट कर दी है। पहले दिन कुछ बची थी, दूसरे दिन हुई बारिश में सारी फसल गिर गई। फसल की क्षूतिपूर्ति दिलाई जाए। मौसम खराब होने के कारण कटाई नहीं हो सकी। - प्रेम बिहारी उपाध्याय हरिहरपुर।
15 बीघे में धान की खेती की है। कटाई शुरू होने वाला था, बेमौसम बारिश से सारी फसल गिर गई है। गांव में ज्यादातर किसानों का यही हाल है। बरसात का पानी खेत में लग गया है। बड़े पैमाने पर धान की फसल का नुकसान हुआ है। - अनिल कुमार सिंह, अभियां।
डेढ़ हेक्टेयर क्षेत्रफल में धान की खेती की है। लेकिन बेमौसम बारिश होने से पचास फीसदी से ज्यादा फसल गिर गई है। यही साल भर की कमाई होती है। आलू में भी पानी लग गया है। - रमाशंकर बिंद, कुरमैचा।
चार हेक्टेयर में धान की खेती की है। धान की फसल पककर तैयार है, हार्वेस्टर के इंतजार में कटाई कार्य नहीं शुरू हो सका है। बारिश के कारण एक बीघे की धान की फसल गिरी है। - श्यामधर सिंह, औराई।