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Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Bhadohi News ›   Open drain stretches for 35 km along the Varanasi-Prayagraj highway; a 'black spot' for accidents.

Bhadohi News: वाराणसी-प्रयागराज हाईवे पर 35 किमी तक खुला है नाला, हादसे का ब्लैक स्पाट

Fri, 23 Oct 2026 02:04 AM IST
Varanasi Bureau वाराणसी ब्यूरो
Updated Fri, 23 Oct 2026 02:04 AM IST
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Open drain stretches for 35 km along the Varanasi-Prayagraj highway; a 'black spot' for accidents.
गोपीगंज के पास हाईवे के किनारे खुला नाला। संवाद - फोटो : Samvad
सबसे हाईटेक व सुरक्षित हाईवे में से एक वाराणसी-प्रयागराज हाईवे के खुले नाले हादसे का ब्लैक स्पॉट बन गए हैं। जिले में हाईवे के 45 किमी के दायरे में करीब 35 किमी तक नाला खुला हुआ है। बाजारों को छोड़ दिया जाए तो कुछ ही जगहों पर हाईवे प्राधिकरण ने नालियों पर ढक्कन लगाए हैं। यह स्थित उत्तरी व दक्षिणी दोनों लेन पर होने से अक्सर हादसे होते रहते हैं।
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वाराणसी-प्रयागराज हाईवे पर औराई कोतवाली के इटवां गांव के पास 18 अक्तूबर को हाईवे के खुले नाले में गिरने से तीन युवकों की मौत हो गई थी। हादसे के बाद एक फिर से हाईवे पर सुरक्षित सफर को लेकर सवाल खड़े होने लगे। हंडिया-राजातालाब खंड के 83 किमी दायरे का 45 किमी भदोही जिला से होकर गुजरता है। हाईवे प्राधिकरण की ओर से घटनाओं के रोकथाम को तमाम इंतजाम तो किए गए हैं, लेकिन हाईवे के खुले नाले दुर्घटनाओं की एक बड़ी वजह बने हुए हैं। 45 किमी में करीब 35 किमी हिस्सा ऐसा है जहां सर्विसलेन के दोनों तरफ का नाला खुला हुआ है। करीब तीन से चार फीट चौड़ाई और चार से पांच फीट गहराई वाले खुले नाले से हादसे का सबब बन गए हैं। हमारी टीम ने बृहस्पतिवार को हाईवे पर नालों की स्थिति देखी। जहां कई जगह नाले कचरे से पटे नजर आए तो कई नालों की स्थिति ऐसी रही कि पानी भरा है, लेकिन निकासी नहीं हो रही है। बाजार व उसके आसपास को छोड़कर कहीं भी नालियों पर ढक्कन नहीं लगाए गए थे।
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कचरे से भी पटीं नालियां
हाईवे के नाले खुले होने से न सिर्फ हादसे का खतरा है, बल्कि यह नाले कचरे से पट जाते हैं। खुला होने के कारण सारा कचरा इन नालों में जमा होता है और नाला पूरी तरह से कचरे से पट जाती है। मानसून सीजन आने पर प्राधिकरण इसे साफ करने का दावा तो करता है, लेकिन आधा-अधूरा होने करने के बाद अपनी जिम्मेदारी पूरी कर लेता है।
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खुले नाले में होने वाली घटनाओं के मुख्य कारण
-सुरक्षा बैरिकेडिंग और स्लैब का न होना
-अंधेरा और दृश्यता की कमी
-चेतावनी बोर्ड का न होना
सर्विसलेन पर गंदा पानी बहाना
-सर्विसलेन की नालियों का सड़क से ऊंचा होना
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केस एक : कटका निवासी रविंदर सिंह (55) इसी साल मई महीने में नाले में गिर गए। जिससे गंभीर रूप से घायल हो गए। दो दिन अस्पताल में उपचार के बाद उनकी मौत हो गई।

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केस दो : दो माह पहले ही गोपीगंज कोतवाली के कौलापुर के पास खुले नाले में गिरने से सुजातपुर निवासी दिनेश तिवारी (55) साल गंभीर रूप से घायल हो गए थे।
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केस तीन : गोपीगंज कोतवाली के गिराई के पास कुछ दिन पहले हाईवे के पास के खुले नाले में बाइक सवार दो युवक बाइक समेत गिर गए थे। घटना में दोनों को चोटें आई थीं। स्थानीय लोगों की मदद से उन्हें नाले से बाइक समेत निकाला गया था।
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क्या बोले लोग
हाईवे नाले इतने बड़े होते हैं कि अगर उसमें कोई गिर जाए तो निकलना मुश्किल है। इस तरह के नाले को ढक कर रही रखना चाहिए। - विनोद सिंह, बाबूसराय।
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खुले नाले हादसे के कारण तो बनते ही हैं, दूसरी तरफ नालियां कचरे से पट जाती हैं, जब बारिश होती है तो यही नाली ओवरफ्लो होकर बहने लगी है। - मंटू पांडेय, कौलापुर।
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खुली नालियों से अक्सर हादसों का डर बना रहता है। अगर कोई वाहन उसमें गिर जाएगा तो निकल नहीं पाएगा। नाले ढके रहेंगे तो शायद भीषण दुर्घटनाएं नहीं होंगी। - सोहित बिंद, कटवा, गोदाम।
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वर्जन
जब हाईवे का निर्माण हुआ था तो जहां आबादी का क्षेत्र था। वहां की नालियों को पटिया लगाकर ढंक दिया गया था। यहां पर आबादी नहीं थी वहां की नालियां खुली थी, लेकिन कई वर्षों के बीत जाने के बाद अब गैर आबादी वाले क्षेत्रों में भी आबादी और घनी बस्ती हो गई है। जिससे नालिया अभी तक खुली है। इस समस्या को लेकर प्रोजेक्ट हेड ऑफिस प्रयागराज के अधिकारियों को पत्राचार किया गया है। कमिश्नर और जिलाधिकारी कार्यालय से भी इसे ढकने का निर्देश मिला है। जल्द ही इसे ढका जाएगा। -शेषनाथ यादव, इंजीनियर, रखरखाव, एनएचएआई।
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