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सिक्सलेन निर्माण: अब मुआवजे को लेकर बढ़ी रार
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ज्ञानपुर। हाइवे पर सिक्सलेन निर्माण में अब मुुआवजे को लेकर रार बढ़ गई है। एनएचएआई और जिला प्रशासन के लचर रवैये से भीटी से बाबूसराय तक प्रभावित 450 पीड़ितों को कृषि रेट पर मुआवजा देने की तैयारी की गई है, जबकि व्यावसायिक सर्किल रेट को लेकर लोग मुखर हैं। भूमि आध्याप्ति विभाग से लेकर डीएम को प्रार्थना पत्र देकर मुआवजे की राशि सही ढंग से करने की मांग की गई।
प्रयागराज से वाराणसी तक हाईवे को सिक्सलेन बनाया जा रहा है। भीटी से लेकर बाबूसराय तक करीब 45 किमी से अधिक का एरिया भदोही प्रशासन के अधीन है। करीब एक साल पूर्व से चौड़ीकरण की प्रक्रिया अंतिम दौर में पहुंच गई है। गोपीगंज नगर में ओवरब्रिज बनने से दुकान या घर नहीं टूटे, लेकिन जंगीगंज, सूफीनगर, वहिदानगर, भीटी, महराजगंज, घोसिया, माधोसिंह और बाबूसराय बाजार के अलावा अन्य क्षेत्रों में सड़क के किनारे चलने वाले प्रतिष्ठान चौड़ीकरण के दायरे में आ गई है। नेशनल हाईवे अथारटी ऑफ इंडिया (एनएचएआई) की ओर से अधिग्रहण करने के बाद जिला प्रशासन के सहयोग से मुआवजा तय किया जा रहा है। सिक्सलेन निर्माण में प्रभावित 450 से अधिक लोगों को एनएचएआई की ओर से कृषि रेट पर मुआवजा देने का प्लान बनाया गया है, जिसको लेकर पीड़ित मुखर हो गए हैं। उनका कहना है कि वह हाइवे के किनारे व्यावसायिक दृष्टिकोण से जमीन ली थी और अभिलेखों में भी वह दर्ज है, लेकिन उन्हें व्यावसायिक रेट 60 हजार प्रति वर्ग मीटर के बजाए 14 हजार प्रति वर्ग मीटर दिया जा रहा है। औराई के हुसैनीपुर गांव निवासी विंध्यवासिनी पांडेय, महेश कुमार पांडेय, दिनेश कुमार पांडेय और गणेश कुमार पांडेय ने डीएम और भूमि अध्याप्ति अधिकारी को पत्र देकर सर्किल रेट व्यावसायिक दर्ज करने की मांग की। विंध्यवासिनी पांडेय ने कहा कि आराजी नंबर 161 के रकबा 0.025 हेक्टेयर में वह काबिज है। खसरा-खतौनी में भी उक्त जमीन व्यवसायिक दर्ज है। 13 नवंबर को एनएचआई की ओर से जारी नोटिस में यह स्पष्ट नहीं किया गया कि किस सर्किल रेट पर मुआवजा मिलेगा। यह इकलौता मामला नहीं है। ऐसे कई लोग हैं जो प्रतिदिन मुआवजे को लेकर भूमि अध्याप्ति विभाग के दफ्तर का चक्कर लगा रहे हैं।
चौड़ीकरण को लेकर हो चुका है विवाद
ज्ञानपुर। हाईवे के चौड़ीकरण को लेकर घोसिया, माधोसिंह, सूफीनगर, वहिदानगर समेत अन्य क्षेत्रों में विवाद हो चुका है। करीब छह से सात माह पूर्व जब चौड़ीकरण के जद में आने वाले मकानों को ढहाया जा रहा है था तब लोगों ने विरोध किया। आश्वासन के बाद भी अब तक न्याय नहीं मिल सका।
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भूमि अध्याप्ति विभाग कर रहा खेल
ज्ञानपुर। सिक्सलेन निर्माण में अधिग्रहित जमीनों के मुआवजे में व्यापक स्तर पर खेल किया जा रहा है। सूत्रों की माने तो भूमि अध्याप्ति विभाग के तालमेल से नागरिकों को कृषि रेट पर मुआवजा लेने का दबाव बनाया जा रहा है। पीड़ितों की माने तो अगर उन्हें उचित मुआवजा नहीं मिलेगा तो वह कोर्ट की शरण में जाएंगे।
सिक्सलेन निर्माण के चौड़ीकरण में जिन लोगों की जमीन अधिग्रहित की जा रही है उन्हें तय मुआवजा दिया जाएगा। खसरा-खतौनी में जो अंकित होगा उसी के आधार पर मुआवजा मिलेगा।
राम सिंह वर्मा, एडीएम
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प्रयागराज से वाराणसी तक हाईवे को सिक्सलेन बनाया जा रहा है। भीटी से लेकर बाबूसराय तक करीब 45 किमी से अधिक का एरिया भदोही प्रशासन के अधीन है। करीब एक साल पूर्व से चौड़ीकरण की प्रक्रिया अंतिम दौर में पहुंच गई है। गोपीगंज नगर में ओवरब्रिज बनने से दुकान या घर नहीं टूटे, लेकिन जंगीगंज, सूफीनगर, वहिदानगर, भीटी, महराजगंज, घोसिया, माधोसिंह और बाबूसराय बाजार के अलावा अन्य क्षेत्रों में सड़क के किनारे चलने वाले प्रतिष्ठान चौड़ीकरण के दायरे में आ गई है। नेशनल हाईवे अथारटी ऑफ इंडिया (एनएचएआई) की ओर से अधिग्रहण करने के बाद जिला प्रशासन के सहयोग से मुआवजा तय किया जा रहा है। सिक्सलेन निर्माण में प्रभावित 450 से अधिक लोगों को एनएचएआई की ओर से कृषि रेट पर मुआवजा देने का प्लान बनाया गया है, जिसको लेकर पीड़ित मुखर हो गए हैं। उनका कहना है कि वह हाइवे के किनारे व्यावसायिक दृष्टिकोण से जमीन ली थी और अभिलेखों में भी वह दर्ज है, लेकिन उन्हें व्यावसायिक रेट 60 हजार प्रति वर्ग मीटर के बजाए 14 हजार प्रति वर्ग मीटर दिया जा रहा है। औराई के हुसैनीपुर गांव निवासी विंध्यवासिनी पांडेय, महेश कुमार पांडेय, दिनेश कुमार पांडेय और गणेश कुमार पांडेय ने डीएम और भूमि अध्याप्ति अधिकारी को पत्र देकर सर्किल रेट व्यावसायिक दर्ज करने की मांग की। विंध्यवासिनी पांडेय ने कहा कि आराजी नंबर 161 के रकबा 0.025 हेक्टेयर में वह काबिज है। खसरा-खतौनी में भी उक्त जमीन व्यवसायिक दर्ज है। 13 नवंबर को एनएचआई की ओर से जारी नोटिस में यह स्पष्ट नहीं किया गया कि किस सर्किल रेट पर मुआवजा मिलेगा। यह इकलौता मामला नहीं है। ऐसे कई लोग हैं जो प्रतिदिन मुआवजे को लेकर भूमि अध्याप्ति विभाग के दफ्तर का चक्कर लगा रहे हैं।
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चौड़ीकरण को लेकर हो चुका है विवाद
ज्ञानपुर। हाईवे के चौड़ीकरण को लेकर घोसिया, माधोसिंह, सूफीनगर, वहिदानगर समेत अन्य क्षेत्रों में विवाद हो चुका है। करीब छह से सात माह पूर्व जब चौड़ीकरण के जद में आने वाले मकानों को ढहाया जा रहा है था तब लोगों ने विरोध किया। आश्वासन के बाद भी अब तक न्याय नहीं मिल सका।
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भूमि अध्याप्ति विभाग कर रहा खेल
ज्ञानपुर। सिक्सलेन निर्माण में अधिग्रहित जमीनों के मुआवजे में व्यापक स्तर पर खेल किया जा रहा है। सूत्रों की माने तो भूमि अध्याप्ति विभाग के तालमेल से नागरिकों को कृषि रेट पर मुआवजा लेने का दबाव बनाया जा रहा है। पीड़ितों की माने तो अगर उन्हें उचित मुआवजा नहीं मिलेगा तो वह कोर्ट की शरण में जाएंगे।
सिक्सलेन निर्माण के चौड़ीकरण में जिन लोगों की जमीन अधिग्रहित की जा रही है उन्हें तय मुआवजा दिया जाएगा। खसरा-खतौनी में जो अंकित होगा उसी के आधार पर मुआवजा मिलेगा।
राम सिंह वर्मा, एडीएम