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Bhadohi News: अब मां विंध्यवासिनी विश्वविद्यालय से मिलेगी 23 महाविद्यालयों को डिग्री
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ज्ञानपुर। जिले के काशी नरेश राजकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय समेत 23 कॉलेजों में अब मां विंध्यवासिनी विश्वविद्यालय की डिग्री विद्यार्थियों को मिलेगी। तीन राजकीय और 20 निजी महाविद्यालय की महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ वाराणसी विश्वविद्यालय से संबद्धता अब समाप्त हो गई है।
सभी कॉलेज अब मां विंध्यवासिनी विश्वविद्यालय से संबद्ध हो गए हैं। नए शैक्षिक सत्र 2025-26 में स्नातक और परास्नातक की कक्षाओं में होने वाले छात्रों का प्रवेश मां विंध्यवासिनी विश्वविद्यालय मिर्जापुर के समर्थ पोर्टल पर पंजीकरण के माध्यम से होंगे।
जिले का अति प्राचीन काशी नरेश राजकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय अपने 75 साल के सफर में पांचवीं बार नई यूनिवर्सिटी से संबद्ध हो रहा है। महाविद्यालय की स्थापना एक अगस्त 1951 को पूर्व काशी नरेश डाॅ. विभूति नारायण सिंह के विद्यानुराग, दानवृत्ति व सदासह्यता व तत्कालीन शिक्षा मंत्री डाॅ. संपूर्णानंद के विशेष प्रयास से हुई। इस प्राचीन महाविद्यालय में शामिल केएनपीजी में स्थानीय और दूर-राज के विद्यार्थी अध्ययन करने के लिए आते हैं।
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स्थापना के प्रारंभ में आगरा विश्वविद्यालय से तो साल 1975 से गोरखपुर विश्वविद्यालय से कॉलेज संबद्ध रहा। साल 1989 से 2008 तक पूर्वांचल विश्वविद्यालय से संबद्ध रहा, जबकि 2009 से मौजूदा समय तक महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ वाराणसी विश्वविद्यालय से संबद्धता रही।
अब इसे मां विंध्यवासिनी विश्वविद्यालय मिर्जापुर से जोड़ दिया गया है। महाविद्यालय के प्राचार्य प्रो. रमेशचंद्र यादव ने बताया कि नए सत्र में जिले के सभी महाविद्यालय मां विंध्यवासिनी विश्वविद्यालय से संबद्ध होकर चलेंगे। इसमें तीन राजकीय और 20 मान्यता प्राप्त महाविद्यालय शामिल हैं।
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सभी कॉलेज अब मां विंध्यवासिनी विश्वविद्यालय से संबद्ध हो गए हैं। नए शैक्षिक सत्र 2025-26 में स्नातक और परास्नातक की कक्षाओं में होने वाले छात्रों का प्रवेश मां विंध्यवासिनी विश्वविद्यालय मिर्जापुर के समर्थ पोर्टल पर पंजीकरण के माध्यम से होंगे।
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जिले का अति प्राचीन काशी नरेश राजकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय अपने 75 साल के सफर में पांचवीं बार नई यूनिवर्सिटी से संबद्ध हो रहा है। महाविद्यालय की स्थापना एक अगस्त 1951 को पूर्व काशी नरेश डाॅ. विभूति नारायण सिंह के विद्यानुराग, दानवृत्ति व सदासह्यता व तत्कालीन शिक्षा मंत्री डाॅ. संपूर्णानंद के विशेष प्रयास से हुई। इस प्राचीन महाविद्यालय में शामिल केएनपीजी में स्थानीय और दूर-राज के विद्यार्थी अध्ययन करने के लिए आते हैं।
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स्थापना के प्रारंभ में आगरा विश्वविद्यालय से तो साल 1975 से गोरखपुर विश्वविद्यालय से कॉलेज संबद्ध रहा। साल 1989 से 2008 तक पूर्वांचल विश्वविद्यालय से संबद्ध रहा, जबकि 2009 से मौजूदा समय तक महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ वाराणसी विश्वविद्यालय से संबद्धता रही।
अब इसे मां विंध्यवासिनी विश्वविद्यालय मिर्जापुर से जोड़ दिया गया है। महाविद्यालय के प्राचार्य प्रो. रमेशचंद्र यादव ने बताया कि नए सत्र में जिले के सभी महाविद्यालय मां विंध्यवासिनी विश्वविद्यालय से संबद्ध होकर चलेंगे। इसमें तीन राजकीय और 20 मान्यता प्राप्त महाविद्यालय शामिल हैं।