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मदरसे के प्रधानाचार्य समेत पांच को नोटिस
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ज्ञानपुर। मदरसा दारुल उलूम सईदिया खमरिया में हुए दो सहायक शिक्षकों की नियुक्ति के मामले में डीएम आर्यका अखौरी की गोपनीय रिपोर्ट शुक्रवार को अल्पसंख्यक विभाग पहुंच गई। शनिवार को विभाग ने मदरसा के प्रधानाचार्य, प्रबंधक, दो शिक्षक, एक शिकायतकर्ता को नोटिस भेजकर आठ जून को रजिस्टार उत्तर प्रदेश मदरसा शिक्षा परिषद लखनऊ के समक्ष बयान दर्ज कराने का निर्देश दिया।
खमरिया निवासी शिकायतकर्ता शाकिब अंसारी ने जिला से लेकर मुख्यमंत्री कार्यालय तक प्रार्थनापत्र देकर आरोप लगाया था कि मदरसा प्रबंध तंत्र ने गत वर्ष दो सहायक शिक्षक पदों के लिए आवेदन मांगा था। आवेदन करने वाले युवक-युवतियों समेत दिव्यांगों को यह कहते हुए बुलाया कि लिखित परीक्षा होगी। मदरसा पहुंचने पर यह कहते हुए उन्हें वापस कर दिया कि लिखित परीक्षा नहीं होगी और दूसरे दिन साक्षात्कार लिया जाएगा। तब से अब तक न उन्हें बुलाया गया और न कोई जानकारी हो सकी। बाद में पता चला कि प्रबंध तंत्र ने शिक्षक पदों पर भाई-भतीजावाद, रिश्तेदारी निभाकर नियुक्ति देते हुए वेतन का आहरण भी कराया जाने लगा है। मामले की जांच कराकर नियुक्ति को निरस्त कराया जाए। मामला तूल पकड़ते औराई तहसील प्रशासन ने तीन बार जांच कराकर अपनी रिपोर्ट जिला प्रशासन को भेज दिया।
कोई सुनवाई न होने पर जिले की कार्यभार संभालने आई डीएम आर्यका अखौरी से शिकायत की जिस पर एसडीएम औराई एसके मिश्रा ने तीन सदस्यीय टीम गठित कर बिंदुवार जांच कराते हुए नियुक्ति में बरती गई मनमानियों का साक्ष्य समेत रिपोर्ट डीएम कार्यालय में उपलब्ध करा दिया। लगभग 15 दिन से चल रही आंखमिचौली पर विराम लगाते हुए डीएम ने गोपनीय रिपोर्ट अल्पसंख्यक विभाग को भेजकर मदरसा के रजिस्ट्रेशन, प्रबंध तंत्र की संख्या, विभाग से मिले अनुदान, नियुक्त शिक्षकों का ब्यौरा, मदरसा में छात्र-छात्राओं की संख्या आदि बिंदुओं पर मांगी गई रिपोर्ट से प्रशासनिक शिकंजा कसते ही विभाग भी हरकत में आ गया। जबकि शिकायतकर्ताओं ने यहां तक आरोप लगाया है कि विभाग से सात मदरसा अनुदान पर और लगभग 60 गैर अनुदान पर संचालित कराए जाते हैं सभी में प्रबंध तंत्र की मनमानी, शासनादेश को ताक पर रखकर ही नियुक्तियां की गई है।
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विभागीय अधिकारी सहित वक्फ बोर्ड निरीक्षक दो से तीन जिलों का अतिरिक्त प्रभार लेकर जिले में जड़ जमाकर भ्रष्टाचार को बढ़ावा दे रहे हैं। लगभग आठ माह से चल रहे इस बहुचर्चित प्रकरण में गोपनीय रिपोर्ट ने असर दिखाया तो रजिस्टार समेत कई लोगों की गर्दन फंसते देर नहीं लगेगी। प्रभारी अल्पसंख्यक अधिकारी बिनोद कुमार जायसवाल ने बताया कि मामले में दो शिक्षक, प्रधानाचार्य, मदरसा प्रबंधक, शिकायतकर्ता को नोटिस भेजकर आठ जून को रजिस्टार कार्यालय में बयान दर्ज कराने का निर्देश दिया जा चुका है।
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खमरिया निवासी शिकायतकर्ता शाकिब अंसारी ने जिला से लेकर मुख्यमंत्री कार्यालय तक प्रार्थनापत्र देकर आरोप लगाया था कि मदरसा प्रबंध तंत्र ने गत वर्ष दो सहायक शिक्षक पदों के लिए आवेदन मांगा था। आवेदन करने वाले युवक-युवतियों समेत दिव्यांगों को यह कहते हुए बुलाया कि लिखित परीक्षा होगी। मदरसा पहुंचने पर यह कहते हुए उन्हें वापस कर दिया कि लिखित परीक्षा नहीं होगी और दूसरे दिन साक्षात्कार लिया जाएगा। तब से अब तक न उन्हें बुलाया गया और न कोई जानकारी हो सकी। बाद में पता चला कि प्रबंध तंत्र ने शिक्षक पदों पर भाई-भतीजावाद, रिश्तेदारी निभाकर नियुक्ति देते हुए वेतन का आहरण भी कराया जाने लगा है। मामले की जांच कराकर नियुक्ति को निरस्त कराया जाए। मामला तूल पकड़ते औराई तहसील प्रशासन ने तीन बार जांच कराकर अपनी रिपोर्ट जिला प्रशासन को भेज दिया।
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कोई सुनवाई न होने पर जिले की कार्यभार संभालने आई डीएम आर्यका अखौरी से शिकायत की जिस पर एसडीएम औराई एसके मिश्रा ने तीन सदस्यीय टीम गठित कर बिंदुवार जांच कराते हुए नियुक्ति में बरती गई मनमानियों का साक्ष्य समेत रिपोर्ट डीएम कार्यालय में उपलब्ध करा दिया। लगभग 15 दिन से चल रही आंखमिचौली पर विराम लगाते हुए डीएम ने गोपनीय रिपोर्ट अल्पसंख्यक विभाग को भेजकर मदरसा के रजिस्ट्रेशन, प्रबंध तंत्र की संख्या, विभाग से मिले अनुदान, नियुक्त शिक्षकों का ब्यौरा, मदरसा में छात्र-छात्राओं की संख्या आदि बिंदुओं पर मांगी गई रिपोर्ट से प्रशासनिक शिकंजा कसते ही विभाग भी हरकत में आ गया। जबकि शिकायतकर्ताओं ने यहां तक आरोप लगाया है कि विभाग से सात मदरसा अनुदान पर और लगभग 60 गैर अनुदान पर संचालित कराए जाते हैं सभी में प्रबंध तंत्र की मनमानी, शासनादेश को ताक पर रखकर ही नियुक्तियां की गई है।
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विभागीय अधिकारी सहित वक्फ बोर्ड निरीक्षक दो से तीन जिलों का अतिरिक्त प्रभार लेकर जिले में जड़ जमाकर भ्रष्टाचार को बढ़ावा दे रहे हैं। लगभग आठ माह से चल रहे इस बहुचर्चित प्रकरण में गोपनीय रिपोर्ट ने असर दिखाया तो रजिस्टार समेत कई लोगों की गर्दन फंसते देर नहीं लगेगी। प्रभारी अल्पसंख्यक अधिकारी बिनोद कुमार जायसवाल ने बताया कि मामले में दो शिक्षक, प्रधानाचार्य, मदरसा प्रबंधक, शिकायतकर्ता को नोटिस भेजकर आठ जून को रजिस्टार कार्यालय में बयान दर्ज कराने का निर्देश दिया जा चुका है।