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नहरों में पानी नहीं, 500 बीघे फसल पर संकट
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सीतामढ़ी। धान के सीजन में फसल को हमेशा सिंचाई की जरूरत होती है, लेकिन कोनिया क्षेत्र की नहरों में टेल तक पानी पहुंचने की बात सपना जैसा हो गया है। सैकड़ों किसानों की तकरीबन पांच सौ बीघे धान की फसल सिंचाई के अभाव में सूखने लगी है। बिजली आपूर्ति का आलम यह है कि कब बिजली आएगी और कब जाएगी, कोई नहीं जानता। ऐसे में किसानों के समक्ष सिंचाई की बड़ी समस्या खड़ी हो गई है।
ज्ञानपुर पंप नहर परियोजना के तहत डीघ रजवाहा और इससे जुड़ी बारीपुर, सीतामढ़ी माइनर में टेल तक पानी नहीं पहुंच पा रहा है। गंगा के तटवर्ती क्षेत्र में बलुई मिट्टी होने के कारण बारिश का पानी भी चंद घंटे में ही सूख जाता है। किसानों का आरोप है कि नहर विभाग किसानों की समस्याओं को लेकर संजीदा नहीं है। डीघ विकास खंड के कोनिया क्षेत्र के दर्जनों गांव के हजारों बीघे खेतों की सिंचाई के लिए डीघ रजवाहा नहर चार दशक पूर्व बनी थी, लेकिन इसका इतिहास रहा है कि किसानों को जब पानी की आवश्यकता होती है, तब इस रजवाहे में टेल तक पानी नहीं पहुंचता है। कलातुलसी के किसान रमाशंकर शुक्ला, आदर्श पांडेय कहते हैं कि नहर में पानी नहीं आने से किसान धान की फसलों की खेती करना ही बंद कर दिए। बहपूरा के ग्राम प्रधान शिवचंद शुक्ला, ओम प्रकाश दूबे, इटहरा के कमला शंकर मिश्रा, डीघ के माताचरन तिवारी, बनकट के रामकैलाश तिवारी, नारेपार के ठाकुर हंसराज सिंह ने कहा कि नहरों का बुरा हाल है। जब जरूरत होती है तब नहरों में पानी नहीं छोड़ा जाता है। बनकट, डीघ, खेमापुर, अरई, दुगुना, इटहरा, शेरपुर, कूड़ी कला, कूड़ी खुर्द, धनतुलसी, बहपूरा, भुर्रा आदि गांवों के किसानों को सिंचाई के पानी के लिए जद्दोजहद करनी पड़ती है।
इसी तरह बारीपुर माइनर पर आश्रित किसानों को धान के सिंचाई के लिए पानी नहीं मिल पा रहा है। इस माइनर में भी टेल तक पानी नहीं पहुंच रहा है। इससे सिंचाई के पानी को लेकर आए दिन किसानों में किचकिच होती रहती है। मठहा, शुक्लान, मनोहरपुर, केवटाही, बारीपुर, कुढ़वा आदि गांवों के किसानों को धान की सिंचाई के लिए परेशानी झेलनी पड़ रही है।
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ज्ञानपुर पंप नहर परियोजना के तहत डीघ रजवाहा और इससे जुड़ी बारीपुर, सीतामढ़ी माइनर में टेल तक पानी नहीं पहुंच पा रहा है। गंगा के तटवर्ती क्षेत्र में बलुई मिट्टी होने के कारण बारिश का पानी भी चंद घंटे में ही सूख जाता है। किसानों का आरोप है कि नहर विभाग किसानों की समस्याओं को लेकर संजीदा नहीं है। डीघ विकास खंड के कोनिया क्षेत्र के दर्जनों गांव के हजारों बीघे खेतों की सिंचाई के लिए डीघ रजवाहा नहर चार दशक पूर्व बनी थी, लेकिन इसका इतिहास रहा है कि किसानों को जब पानी की आवश्यकता होती है, तब इस रजवाहे में टेल तक पानी नहीं पहुंचता है। कलातुलसी के किसान रमाशंकर शुक्ला, आदर्श पांडेय कहते हैं कि नहर में पानी नहीं आने से किसान धान की फसलों की खेती करना ही बंद कर दिए। बहपूरा के ग्राम प्रधान शिवचंद शुक्ला, ओम प्रकाश दूबे, इटहरा के कमला शंकर मिश्रा, डीघ के माताचरन तिवारी, बनकट के रामकैलाश तिवारी, नारेपार के ठाकुर हंसराज सिंह ने कहा कि नहरों का बुरा हाल है। जब जरूरत होती है तब नहरों में पानी नहीं छोड़ा जाता है। बनकट, डीघ, खेमापुर, अरई, दुगुना, इटहरा, शेरपुर, कूड़ी कला, कूड़ी खुर्द, धनतुलसी, बहपूरा, भुर्रा आदि गांवों के किसानों को सिंचाई के पानी के लिए जद्दोजहद करनी पड़ती है।
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इसी तरह बारीपुर माइनर पर आश्रित किसानों को धान के सिंचाई के लिए पानी नहीं मिल पा रहा है। इस माइनर में भी टेल तक पानी नहीं पहुंच रहा है। इससे सिंचाई के पानी को लेकर आए दिन किसानों में किचकिच होती रहती है। मठहा, शुक्लान, मनोहरपुर, केवटाही, बारीपुर, कुढ़वा आदि गांवों के किसानों को धान की सिंचाई के लिए परेशानी झेलनी पड़ रही है।
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