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स्कूल में कैद बेजुबानों को नहीं मिली जगह,वाहन के तोड़े शीशे
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लालानगर। गुदरीपुर पूर्व माध्यमिक विद्यालय में ग्रामीणों के जरिए बंद किए गए छुट्टा पशुओं को समुचित संरक्षण नहीं मिल सका। प्रशासनिक अधिकारियों ने पशुओं को गोशाला में भिजवाने का फरमान जारी कर अपने फर्ज की इतिश्री कर ली, लेकिन प्रकरण को अंजाम तक पहुंचाने से पहले ही पीछा छुड़ा कर हट गए। अधिकारियों के निर्देश पर पशुओं को गोशाला पहुंचाने जा रहे ग्राम प्रधान को उन गांवों के लोगों का विरोध झेलना पड़ा और उसके वाहन का शीशा भी तोड़ दिया गया। इससे लाचार होकर ग्राम प्रधान ने भूख प्यास से तड़प रहे पशुओं को दोबारा सिवान में छोड़वा दिया।
डीघ विकास खंड के गुदरीपुर गांव स्थित पूर्व माध्यमिक विद्यालय में बृहस्पतिवार को खेतीबारी को बर्बाद कर रहे दो दर्जन से अधिक छुट्टा पशुओं को ग्रामीणों ने बंद कर दिया था। ग्रामीणों ने उन पशुओं को गोशाला भिजवाने की मांग की थी, लेकिन दूसरे दिन शुक्रवार तक उन्हें न आश्रय स्थलों में जगह मिल सकी और न ही चारा-पानी। प्रशासनिक अधिकारियों ने पशुओं को गोशाला भिजवाने की जिम्मेदारी प्रधान छोटेलाल को देकर मामले को निपटा दिया, लेकिन उसके बाद की समस्या से भी मुंह फेर लिया। ग्राम प्रधान का कहना है कि जब वह पशुओं को वाहनों पर लादकर विभिन्न गौशालाओं में पहुंचाने जा रहे थे तो कंचनपुर, फुलवरिया के लोगों ने पशुओं से लदे वाहन का शीशा तोड़कर वापस लौटने को विवश कर दिया। उनका कहना था कि यहां की गोशालाओं में इसी गांव के पशुओं को शरण नहीं मिल पा रही है तो दूसरे गांवों के पशु कहां से इसमें रखे जा सकेंगे और वापस कर दिया। उधर 36 घंटे से बिना चारा-पानी के विद्यालय में बंद पशुओं की हालत भी बिगड़ती जा रही थी। इस पर लाचार होकर पशुओं को दोबारा सिवान में छोड़वा दिया गया।
उधर पशुपालन विभाग यह दावा करता रहा कि मीनापुर, भावापुर, कंचनपुर और फुलवरिया गौशाला में सभी पशुओं को संरक्षित करा दिया गया है। बीएसए, पशु चिकित्सक जंगीगंज रामसिंह, डीघ संतोष शुक्ला से देर शाम बात करने का प्रयास किया गया, लेकिन उनके फोन रिसीव नहीं हुए।
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डीघ विकास खंड के गुदरीपुर गांव स्थित पूर्व माध्यमिक विद्यालय में बृहस्पतिवार को खेतीबारी को बर्बाद कर रहे दो दर्जन से अधिक छुट्टा पशुओं को ग्रामीणों ने बंद कर दिया था। ग्रामीणों ने उन पशुओं को गोशाला भिजवाने की मांग की थी, लेकिन दूसरे दिन शुक्रवार तक उन्हें न आश्रय स्थलों में जगह मिल सकी और न ही चारा-पानी। प्रशासनिक अधिकारियों ने पशुओं को गोशाला भिजवाने की जिम्मेदारी प्रधान छोटेलाल को देकर मामले को निपटा दिया, लेकिन उसके बाद की समस्या से भी मुंह फेर लिया। ग्राम प्रधान का कहना है कि जब वह पशुओं को वाहनों पर लादकर विभिन्न गौशालाओं में पहुंचाने जा रहे थे तो कंचनपुर, फुलवरिया के लोगों ने पशुओं से लदे वाहन का शीशा तोड़कर वापस लौटने को विवश कर दिया। उनका कहना था कि यहां की गोशालाओं में इसी गांव के पशुओं को शरण नहीं मिल पा रही है तो दूसरे गांवों के पशु कहां से इसमें रखे जा सकेंगे और वापस कर दिया। उधर 36 घंटे से बिना चारा-पानी के विद्यालय में बंद पशुओं की हालत भी बिगड़ती जा रही थी। इस पर लाचार होकर पशुओं को दोबारा सिवान में छोड़वा दिया गया।
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उधर पशुपालन विभाग यह दावा करता रहा कि मीनापुर, भावापुर, कंचनपुर और फुलवरिया गौशाला में सभी पशुओं को संरक्षित करा दिया गया है। बीएसए, पशु चिकित्सक जंगीगंज रामसिंह, डीघ संतोष शुक्ला से देर शाम बात करने का प्रयास किया गया, लेकिन उनके फोन रिसीव नहीं हुए।
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