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3.40 करोड़ से नमामि गंगे योजना को लगेगा पंख
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बजट के अभाव में करीब एक साल से कच्छप गति से चल रही नमामि गंगे योजना को तीन करोड़ 40 लाख रुपये से पंख लगेंगे। पांच हजार से अधिक किसान अनुदानित उपकरण, बीज आदि की खरीदारी करेंगे। गंगा से सटे 47 गांवों में 4700 हेक्टेयर में जैविक खेती की जा रही है।
किसानों की आय दोगुनी करने के लिए सरकार कई योजनाएं चला रही है। किसानों को आत्मनिर्भर बनाने के साथ ही आधुनिक बनाने के लिए प्रशिक्षण भी दिया जा रहा है, लेकिन गेहूं, धान सहित अन्य फसलों के बेहतर उत्पादन के लिए ज्यादातर किसान रासायनिक खाद और कीटनाशक दवाओं का अधिक इस्तेमाल करते हैं। बारिश में पानी के साथ रासायनिक खाद और कीटनाशक गंगा में पहुंचकर जलीय जीव-जंतुओं को नुकसान पहुंचाते हैं। ऐसे में प्रदूषण को रोकने के लिए ही नमामि गंगे योजना के तहत गंगा से सटे 47 गांवों में जैविक खेती कराई जा रही है। करीब एक साल से बजट के अभाव में योजना से जुड़े कामकाज कच्छप गति से चल रहे थे। उप निदेशक कृषि अरविंद सिंह ने कहा कि तीन करोड़ 40 लाख की स्वीकृति मिल गई है। करीब पांच हजार से अधिक किसानों को इससे लाभ मिलेगा।
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अब 100 हेक्टेयर में होगी बागवानी
गंगा को निर्मल करने की मुहिम में अब उद्यान विभाग बागवानी कराएगा। नमामि गंगे योजना के तहत गंगा के तटवर्ती गांवों के औद्यानिक विकास के लिए 100 हेक्टेयर क्षेत्रफल में बागवानी कराने की तैयारी में जुट गया है। बागवानी करने वाले किसानों को प्रति हेक्टेयर की बागवानी पर आने वाली कुल लागत 2.36 लाख रुपये की 50 फीसद धनराशि यानी कुल 1.8 लाख रुपये अनुदान मिलेगा। इसमें आम, अमरूद, बेल, बेर, आंवला और कागदी नींबू के कलमी पौधों का रोपण किया जाएगा।
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इनसेट
इस गांवों में होगी जैविक खेती और बागवानी
डीघ ब्लॉक के बारीपुर उपरवार, बेरासपुर उपरवार, बेरवां पहाड़पुर, भभौरी, बिहरोजपुर, छेछुआं उपरवार, दीनापट्टी उपरवार, धनतुलसी, दुगुना, फुलवरिया, गोपालपुर, गुलौरी, हरिरामपुर, इब्राहिमपुर, इटहरा, कलिक मवैया, केदारपुर, खेमापुर, मवैयाथानसिंह, नगरदह, नारेपार, ओझापुर, पुरवां, सेमराध व तुलसीकला में जैविक खेती और बागवानी होगी। औराई ब्लॉक के भवानीपुर उपरवार, चकनिरंजन, डेरवां, द्वारिकापुर, इटवा, जहंगीराबाद, कठारी, मूलापुर, रामपुर, सहसेपुर हरचारपट्टी, उमापुर, बर्जीकला, अमिलौर, अरई उपरवार एनवारपुर, बहपुरा, बनकट, बिट्ठलपुर गांव में योजना में शामिल हैं।
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किसानों की आय दोगुनी करने के लिए सरकार कई योजनाएं चला रही है। किसानों को आत्मनिर्भर बनाने के साथ ही आधुनिक बनाने के लिए प्रशिक्षण भी दिया जा रहा है, लेकिन गेहूं, धान सहित अन्य फसलों के बेहतर उत्पादन के लिए ज्यादातर किसान रासायनिक खाद और कीटनाशक दवाओं का अधिक इस्तेमाल करते हैं। बारिश में पानी के साथ रासायनिक खाद और कीटनाशक गंगा में पहुंचकर जलीय जीव-जंतुओं को नुकसान पहुंचाते हैं। ऐसे में प्रदूषण को रोकने के लिए ही नमामि गंगे योजना के तहत गंगा से सटे 47 गांवों में जैविक खेती कराई जा रही है। करीब एक साल से बजट के अभाव में योजना से जुड़े कामकाज कच्छप गति से चल रहे थे। उप निदेशक कृषि अरविंद सिंह ने कहा कि तीन करोड़ 40 लाख की स्वीकृति मिल गई है। करीब पांच हजार से अधिक किसानों को इससे लाभ मिलेगा।
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अब 100 हेक्टेयर में होगी बागवानी
गंगा को निर्मल करने की मुहिम में अब उद्यान विभाग बागवानी कराएगा। नमामि गंगे योजना के तहत गंगा के तटवर्ती गांवों के औद्यानिक विकास के लिए 100 हेक्टेयर क्षेत्रफल में बागवानी कराने की तैयारी में जुट गया है। बागवानी करने वाले किसानों को प्रति हेक्टेयर की बागवानी पर आने वाली कुल लागत 2.36 लाख रुपये की 50 फीसद धनराशि यानी कुल 1.8 लाख रुपये अनुदान मिलेगा। इसमें आम, अमरूद, बेल, बेर, आंवला और कागदी नींबू के कलमी पौधों का रोपण किया जाएगा।
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इस गांवों में होगी जैविक खेती और बागवानी
डीघ ब्लॉक के बारीपुर उपरवार, बेरासपुर उपरवार, बेरवां पहाड़पुर, भभौरी, बिहरोजपुर, छेछुआं उपरवार, दीनापट्टी उपरवार, धनतुलसी, दुगुना, फुलवरिया, गोपालपुर, गुलौरी, हरिरामपुर, इब्राहिमपुर, इटहरा, कलिक मवैया, केदारपुर, खेमापुर, मवैयाथानसिंह, नगरदह, नारेपार, ओझापुर, पुरवां, सेमराध व तुलसीकला में जैविक खेती और बागवानी होगी। औराई ब्लॉक के भवानीपुर उपरवार, चकनिरंजन, डेरवां, द्वारिकापुर, इटवा, जहंगीराबाद, कठारी, मूलापुर, रामपुर, सहसेपुर हरचारपट्टी, उमापुर, बर्जीकला, अमिलौर, अरई उपरवार एनवारपुर, बहपुरा, बनकट, बिट्ठलपुर गांव में योजना में शामिल हैं।