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मानसून की पहली बारिश, किसी को मिली राहत तो कुछ को आफत
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मौसम विभाग की तरफ से 20 जून तक मानसून आने की संभावना जताई गई थी। उसी के अनुसार बुधवार की रात और बृहस्पतिवार को दिन में कहीं झमाझम तो कहीं रिमझम बारिश के साथ मानसून आ भी गया। मानसून की पहली बारिश ने कालीन नगरी में किसी को राहत दी है तो किसी को आफत भी दी है। धान की नर्सरी डालने, खेत की जोताई करने के लिए इंतजार कर रहे किसानों के लिए बारिश फायदेमंद है, वहीं बारिश शहर और गांवों के उन लोगों की परेशानी का कारण बन गई है, जिनके घर से आवागमन करने वाले रास्ते ठीक नहीं हैं। ग्रामीण इलाके की सड़कों पर गड्ढे और बारिश के बाद उनमें हुए कीचड़ के कारण लोगों की परेशानी बढ़ गई है।
मौसम विभाग के अनुसार मानसून ने आहट दे दी है। बीते बुधवार को जिले में करीब साढ़े छह एमएम और बीते बृहस्पतिवार को आठ एमएम बारिश हुई। दोनों दिन में मिलाकर 15 एमएम के करीब बारिश हुई है। बारिश के बाद ज्ञानपुर नगर पंचायत क्षेत्र में कई जगह जलभराव हो गया है। बालीपुर, पुरानी बाजार में सड़क पर पानी भर जाने से लोगों को आवागमन में परेशानी का सामना करना पड़ा। हालांकि रात भर में पानी निकल गया। बारिश के बाद शुक्रवार को दिन में तेज धूप निकलने से बीमारी की भी आशंका बढ़ गई है। ऐसे में अस्पताल प्रशासन भी अलर्ट नजर आया। उधर, बारिश होते ही किसानों ने खरीफ फसल की खेती की तैयारी शुरू कर दी है। किसानों का एक तबका अभी धान की नर्सरी डालने से वंचित हैं। बीज की दुकानों पर किसानों की भीड़ जुट रही है। बाजरों में कुल 22 प्रकार के धान के बीज उपलब्ध हैं। सरकारी बीज भंडार में कुल 800 क्विंटल बीज आया था, जिसमें से करीब 700 क्विंटल बीज किसान ले जा चुके हैं। कृषि विशेषज्ञ डॉ. आरपी चौधरी का कहना है कि जुलाई के पहले सप्ताह तक किसान नर्सरी डाल सकते हैं। जिला कृषि अधिकारी अशोक कुमार ने सुझाव दिया कि किसान बीज शोधन करके ही नर्सरी डालें। उधर, राजकीय बीज गोदाम प्रभारी सूरज कुमार ने बताया कि धान की तीन प्रजातियों की बीज आई थी। इसमें सियाट्स-1, सियाट्स-4 ,एचयूआर 917 शामिल हैं। तीनों का ही वितरण किया गया है। ज्ञानपुर दुर्गागंज तिराहा के प्राइवेट दुकानदार ओम प्रकाश मौर्या और रोहित मौर्या ने बताया कि गंगा कावेरी, दामिनी, मोती, मोती गोल्ड, कोमल आदि धान की प्रजातियाें के बीज उपलब्ध हैं। इस साल किसान सबसे ज्यादा गंगा कावेरी धान खरीद रहे हैं, क्योंकि यह धान 135 से 140 दिन में तैयार हो जाता है।
उधर, डीघ के करवंधिया गांव को जोड़ने वाली मात्र एक किमी सड़क मरम्मत नहीं होने से क्षतिग्रस्त हो गई है। हल्की बारिश होने पर सड़क की मिट्टी कीचड़ में तब्दील हो गई है। इससे सड़क पर पैदल चल पाना भी मुश्किल हो गया है। पवन मिश्रा ने बताया कि इस सड़क का निर्माण जिला पंचायत की तरफ से वर्ष 2005 में कराया गया था। धीरे-धीरे यह पक्की सड़क अब पूरी तरह गिट्टी विहीन होकर कच्ची सड़क में परिवर्तित हो चुकी है। इस मार्ग से आवागमन में स्कूली बच्चों को ज्यादा दिक्कत होती है। सड़क पर कीचड़, मिट्टी तथा गंदगी एकत्र हो गई है। साथ ही कई जगह बड़े- बड़े गड्ढे हो गए हैं। ग्रामीणों का कहना है कि करवंधिया बस्ती के लिए यह एकमात्र सड़क है। बाइक और साइकिल सवार कीचड़ में फिसल कर गिर जाते हैं। ग्रामीणों ने जिला पंचायत अध्यक्ष और अधिशासी अधिकारी को पत्र लिखकर क्षतिग्रस्त सड़क की मरम्मत कराने की मांग की है।
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मौसम विभाग के अनुसार मानसून ने आहट दे दी है। बीते बुधवार को जिले में करीब साढ़े छह एमएम और बीते बृहस्पतिवार को आठ एमएम बारिश हुई। दोनों दिन में मिलाकर 15 एमएम के करीब बारिश हुई है। बारिश के बाद ज्ञानपुर नगर पंचायत क्षेत्र में कई जगह जलभराव हो गया है। बालीपुर, पुरानी बाजार में सड़क पर पानी भर जाने से लोगों को आवागमन में परेशानी का सामना करना पड़ा। हालांकि रात भर में पानी निकल गया। बारिश के बाद शुक्रवार को दिन में तेज धूप निकलने से बीमारी की भी आशंका बढ़ गई है। ऐसे में अस्पताल प्रशासन भी अलर्ट नजर आया। उधर, बारिश होते ही किसानों ने खरीफ फसल की खेती की तैयारी शुरू कर दी है। किसानों का एक तबका अभी धान की नर्सरी डालने से वंचित हैं। बीज की दुकानों पर किसानों की भीड़ जुट रही है। बाजरों में कुल 22 प्रकार के धान के बीज उपलब्ध हैं। सरकारी बीज भंडार में कुल 800 क्विंटल बीज आया था, जिसमें से करीब 700 क्विंटल बीज किसान ले जा चुके हैं। कृषि विशेषज्ञ डॉ. आरपी चौधरी का कहना है कि जुलाई के पहले सप्ताह तक किसान नर्सरी डाल सकते हैं। जिला कृषि अधिकारी अशोक कुमार ने सुझाव दिया कि किसान बीज शोधन करके ही नर्सरी डालें। उधर, राजकीय बीज गोदाम प्रभारी सूरज कुमार ने बताया कि धान की तीन प्रजातियों की बीज आई थी। इसमें सियाट्स-1, सियाट्स-4 ,एचयूआर 917 शामिल हैं। तीनों का ही वितरण किया गया है। ज्ञानपुर दुर्गागंज तिराहा के प्राइवेट दुकानदार ओम प्रकाश मौर्या और रोहित मौर्या ने बताया कि गंगा कावेरी, दामिनी, मोती, मोती गोल्ड, कोमल आदि धान की प्रजातियाें के बीज उपलब्ध हैं। इस साल किसान सबसे ज्यादा गंगा कावेरी धान खरीद रहे हैं, क्योंकि यह धान 135 से 140 दिन में तैयार हो जाता है।
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उधर, डीघ के करवंधिया गांव को जोड़ने वाली मात्र एक किमी सड़क मरम्मत नहीं होने से क्षतिग्रस्त हो गई है। हल्की बारिश होने पर सड़क की मिट्टी कीचड़ में तब्दील हो गई है। इससे सड़क पर पैदल चल पाना भी मुश्किल हो गया है। पवन मिश्रा ने बताया कि इस सड़क का निर्माण जिला पंचायत की तरफ से वर्ष 2005 में कराया गया था। धीरे-धीरे यह पक्की सड़क अब पूरी तरह गिट्टी विहीन होकर कच्ची सड़क में परिवर्तित हो चुकी है। इस मार्ग से आवागमन में स्कूली बच्चों को ज्यादा दिक्कत होती है। सड़क पर कीचड़, मिट्टी तथा गंदगी एकत्र हो गई है। साथ ही कई जगह बड़े- बड़े गड्ढे हो गए हैं। ग्रामीणों का कहना है कि करवंधिया बस्ती के लिए यह एकमात्र सड़क है। बाइक और साइकिल सवार कीचड़ में फिसल कर गिर जाते हैं। ग्रामीणों ने जिला पंचायत अध्यक्ष और अधिशासी अधिकारी को पत्र लिखकर क्षतिग्रस्त सड़क की मरम्मत कराने की मांग की है।
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