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छह डिग्री लुढ़का पारा, गलन से ठिठुरा जनजीवन
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ज्ञानपुर नगर में कोहरे में हेडलाइट जलाकर जाता वाहन।
- फोटो : BHADOHI
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ज्ञानपुर। दक्षिण-पूर्व की गलन भरी हल्की से तेज हवाओं ने शनिवार को कालीन नगरी के जनजीवन को ठिठुरा दिया। पारे में भारी गिरावट से लोग धूप खिलने के बावजूद गलन से बेहाल रहे। जिले के अधिकतम तापमान में लगभग छह डिग्री सेल्शियस की गिरावट दर्ज की गई। यह गिरावट शनिवार को लगातार तीसरे दिन जारी रही। जबकि न्यूनतम तापमान नौ डिग्री सेल्सियस के आसपास बना रहा। सुबह-शाम घने कोहरे से जनजीवन प्रभावित हुआ।
शुक्रवार की रात पड़े घने कोहरे का असर शनिवार को सुबह भी दिखा। कोहरे के कारण दृश्यता कम होने से ट्रेन से लेकर सड़क यातायात तक प्रभावित हुआ। कई ट्रेनें विलंबित हुईं और सड़कों पर वाहन रेंगते नजर आए। शनिवार को पौ फटी तो कोहरे की चादर तनी थी। धीरे-धीरे नौ बजे के बाद कोहरा कम हुआ। इस दौरान वाहनों को दिन में भी हेडलाइट जलाकर चलना पड़ा। चिंता की बात यह रही कि लगभग पांच किमी प्रति घंटे की रफ्तार से चलने वाली दक्षिण-पूर्व की मध्यम गति हवाओं के साथ आने वाले कोहरे का गुबार यातायात के साथ जिंदगी की रफ्तार भी रोकता दिख रहा था। सर्द हवाओं के कारण अधिकतम तापमान में लगभग छह डिग्री की गिरावट दर्ज की गई। शनिवार को अधिकतम तापमान 17.9 डिग्री सेल्सियस था, जबकि एक दिन पूर्व यह 23.3 डिग्री सेल्सियस रिकार्ड किया गया था। अधिकतम तापमान में लगातार तीसरे दिन गिरावट दर्ज की गई। इससे गलन बढ़ी रही और लोग बेहाल रहे। शनिवार को न्यूनतम तापमान 9.5 डिग्री सेल्सियस रहा। मौसम में ठंड बढ़ने के कारण धूप खिले रहने के बावजूद लोग ठिठुरे रहे। बरबस ही लोगों के मुंह से निकल रहा था कि गलन के आगे धूप बेअसर हो गई है। दिन में भी लोग जगह-जगह अलाव के पास बैठकर आग तापते नजर आए। कृषि विज्ञान केंद्र बेजवां के कृषि मौसम विशेषज्ञ डॉ. सर्वेश बरनवाल ने बताया कि आने वाले दो-तीन दिनों में हवा की गति शांत रहेगी। आसमान साफ रहेगा, जिससे बारिश की संभावना नहीं है।
बेजुबानों को ठंड से बचाएं
ज्ञानपुर। ठंड के बढ़ते प्रकोप को देखते हुए विशेषज्ञों ने मवेशियों का खास ध्यान देने की सलाह दी है। डॉ. बरनवाल के मुताबिक यह ठंड पशुओं की सेहत के लिए खतरनाक हो सकती है। सबसे ज्यादा गाय का ध्यान देने की आवश्यकता है। मवेशी बांधने के स्थान पर धान के पुआल को बिछावन के रूप में इस्तेमाल करना चाहिए। पशुओं के निवास स्थान पर ठंडी हवाओं को रोकने के लिए तिरपाल का प्रयोग करें। या प्रवेश मार्ग को इस तरह बंद किया जाना चाहिए कि ठंडी हवा पशुओं को सीधी न लगे। अन्यथा पशु बीमार हो सकते हैं।
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शुक्रवार की रात पड़े घने कोहरे का असर शनिवार को सुबह भी दिखा। कोहरे के कारण दृश्यता कम होने से ट्रेन से लेकर सड़क यातायात तक प्रभावित हुआ। कई ट्रेनें विलंबित हुईं और सड़कों पर वाहन रेंगते नजर आए। शनिवार को पौ फटी तो कोहरे की चादर तनी थी। धीरे-धीरे नौ बजे के बाद कोहरा कम हुआ। इस दौरान वाहनों को दिन में भी हेडलाइट जलाकर चलना पड़ा। चिंता की बात यह रही कि लगभग पांच किमी प्रति घंटे की रफ्तार से चलने वाली दक्षिण-पूर्व की मध्यम गति हवाओं के साथ आने वाले कोहरे का गुबार यातायात के साथ जिंदगी की रफ्तार भी रोकता दिख रहा था। सर्द हवाओं के कारण अधिकतम तापमान में लगभग छह डिग्री की गिरावट दर्ज की गई। शनिवार को अधिकतम तापमान 17.9 डिग्री सेल्सियस था, जबकि एक दिन पूर्व यह 23.3 डिग्री सेल्सियस रिकार्ड किया गया था। अधिकतम तापमान में लगातार तीसरे दिन गिरावट दर्ज की गई। इससे गलन बढ़ी रही और लोग बेहाल रहे। शनिवार को न्यूनतम तापमान 9.5 डिग्री सेल्सियस रहा। मौसम में ठंड बढ़ने के कारण धूप खिले रहने के बावजूद लोग ठिठुरे रहे। बरबस ही लोगों के मुंह से निकल रहा था कि गलन के आगे धूप बेअसर हो गई है। दिन में भी लोग जगह-जगह अलाव के पास बैठकर आग तापते नजर आए। कृषि विज्ञान केंद्र बेजवां के कृषि मौसम विशेषज्ञ डॉ. सर्वेश बरनवाल ने बताया कि आने वाले दो-तीन दिनों में हवा की गति शांत रहेगी। आसमान साफ रहेगा, जिससे बारिश की संभावना नहीं है।
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बेजुबानों को ठंड से बचाएं
ज्ञानपुर। ठंड के बढ़ते प्रकोप को देखते हुए विशेषज्ञों ने मवेशियों का खास ध्यान देने की सलाह दी है। डॉ. बरनवाल के मुताबिक यह ठंड पशुओं की सेहत के लिए खतरनाक हो सकती है। सबसे ज्यादा गाय का ध्यान देने की आवश्यकता है। मवेशी बांधने के स्थान पर धान के पुआल को बिछावन के रूप में इस्तेमाल करना चाहिए। पशुओं के निवास स्थान पर ठंडी हवाओं को रोकने के लिए तिरपाल का प्रयोग करें। या प्रवेश मार्ग को इस तरह बंद किया जाना चाहिए कि ठंडी हवा पशुओं को सीधी न लगे। अन्यथा पशु बीमार हो सकते हैं।
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