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मौनी अमावस्या : आज गंगा में आस्था की डुबकी लगाएंगे श्रद्धालु
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माघ मास के कृष्ण पक्ष की अमावस्या तिथि के मौनी अमावस्या पर बड़ी संख्या में श्रद्धालु गंगा में आस्था की डुबकी लगाएंगे।
जिले में रामपुर, सीतामढ़ी, सेमराध समेत अन्य गंगा घाटों पर बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ती है। श्रद्धालु गंगा में डुबकी लगाकर दान-पुण्य करते हैं। भारतीय संस्कृति और धर्मों के अनुसार मौनी अमावस्या को मौन व्रत की परंपरा रही है।
डुहिया भावसिंहपुर निवासी पंडित दीनानाथ शुक्ल ने बताया कि 29 जनवरी को मौनी अमावस्या है। मौनी अमावस्या पर मौन धारण करने का विशेष महत्व होता है। शास्त्रों के मुख से ईश्वर का जाप करने से जो फल मिलता है। उससे कही ज्यादा फल मौन रहकर जप करने से मिलता है। मान्यता है कि आज के दिन दान करने से पहले सवा घंटे तक मौन रख लिया जाए तो पुण्य फल 16 गुना बढ़ जाता है।
इसके अलावा इस दिन मौन रहकर स्नान दान करने से मनुष्य के कई जन्मों के पाप नष्ट हो जाते हैं। बताया कि पीपल के वृक्ष का जल से सिंचन कपूजा के पश्चात 108 बार परिक्रमा करने से सौभाग्य में वृद्धि होती है। वहीं ब्राह्मणों को आमंत्रित कर चावल दूध मिश्री, चीनी, खोवा, मिठाई सफेद वस्त्र चांदी आदि का दान करना चाहिए।
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जिले में रामपुर, सीतामढ़ी, सेमराध समेत अन्य गंगा घाटों पर बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ती है। श्रद्धालु गंगा में डुबकी लगाकर दान-पुण्य करते हैं। भारतीय संस्कृति और धर्मों के अनुसार मौनी अमावस्या को मौन व्रत की परंपरा रही है।
डुहिया भावसिंहपुर निवासी पंडित दीनानाथ शुक्ल ने बताया कि 29 जनवरी को मौनी अमावस्या है। मौनी अमावस्या पर मौन धारण करने का विशेष महत्व होता है। शास्त्रों के मुख से ईश्वर का जाप करने से जो फल मिलता है। उससे कही ज्यादा फल मौन रहकर जप करने से मिलता है। मान्यता है कि आज के दिन दान करने से पहले सवा घंटे तक मौन रख लिया जाए तो पुण्य फल 16 गुना बढ़ जाता है।
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इसके अलावा इस दिन मौन रहकर स्नान दान करने से मनुष्य के कई जन्मों के पाप नष्ट हो जाते हैं। बताया कि पीपल के वृक्ष का जल से सिंचन कपूजा के पश्चात 108 बार परिक्रमा करने से सौभाग्य में वृद्धि होती है। वहीं ब्राह्मणों को आमंत्रित कर चावल दूध मिश्री, चीनी, खोवा, मिठाई सफेद वस्त्र चांदी आदि का दान करना चाहिए।
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