औराई में माधोसिंह के पास 100 करोड़ रुपये की लागत से बना कंटेनर डिपो वीरान पड़ा हुआ है। कालीन निर्माताओं की सुविधा और निर्यात को बढ़ावा देने के उद्देश्य से बनाए गए इस कंटेनर डिपो से कभी रोजना करोड़ों का निर्यात किया जाता था, लेकिन अचानक बंद होने से अब यह शोपीस बनकर रह गया है। निर्यातक काफी लंबे समय से इसे फिर से चालू करने की मांग कर रहे हैं।
पूर्वोत्तर रेलवे के माधोसिंह स्टेशन यार्ड में करीब 100 करोड़ से बनकर तैयार कानकोर कंटेनर डिपो को मिर्जापुर-भदोही के कालीन और चुनार की चमकीली मिट्टी के बर्तन संबंधी उद्योग को बढ़ावा देने के लिए बनाया गया था। एक जमाने में जिले कि विश्व विख्यात कालीन, मिर्जापुर से पीतल, चुनार की मिट्टी से बने बर्तन के व्यापार के लिए मुंबई, दिल्ली, कोलकाता, जौनपुर, प्रयागराज, कानपुर तक के व्यापारी यहां आते थे। इससे कंटेनर डिपो से करोड़ों का निर्यात होता था। समय के साथ रेलवे प्रशासन न तो कंटेनर डिपो की ओर ध्यान दे पा रहा है और न माधोसिंह-चिल्ह रेल खंड की खाली पड़ी जमीनों का संरक्षण कर पा रहा है। इस समय परिसर में न तो रैक दिखती है और न ही लोडिंग होने वाले सामान। डिपो का बंद गेट, परिसर के रखरखाव आदि के नाम पर केवल खानापूर्ति की जा रही है। मुख्य जनसंपर्क अधिकारी कानकोर कंटेनर निगम दिल्ली अरशद खान ने बताया कि सामानों की उपलब्धता न होने के कारण माधोसिंह का कंटेनर डिपो बंद हुआ था। औद्योगिक घराने सामान की उपलब्धता कराएं तो आगे का निर्णय लिया जा सकता है।