कौलापुर। भगवान परशुराम की जयंती शनिवार को परंपरागत तरीके से मनाई गई। लॉकडाउन के कारण एकांत में लोगों ने भगवान परशुराम की विधि विधान पूर्वक पूजन किया। उनके बताए मार्ग पर चलने का संकल्प लिया गया। धनापुर में आयोजित कार्यक्रम में आचार्य रामानुज पांडेय ने वैदिक मंत्रोच्चार के साथ पूजन संपन्न कराया। ज्ञानपुर विधायक विजय मिश्र ने कहा कि भगवान परशुराम अन्याय को कभी नहीं सहते। भगवान परशुराम भारत की ऋषि परंपरा के महान वाहक हैं, उनका शस्त्र और शास्त्र दोनों पर ही समान अधिकार था। गंगा पुत्र भीष्म, आचार्य द्रोण और कुंती पुत्र कर्ण जैसे महायोद्धा उनके शिष्य थे। भगवान परशुराम का मानना था कि अन्याय करना और सहना दोनों ही पाप हैं। इसलिए उनका फरसा सदैव अन्याय के खिलाफ उठा है। जब उन्हें यह ज्ञात हो गया कि धरती पर भगवान श्रीहरि ने सातवां अवतार श्रीराम के रूप में ले लिया है, तब उन्होंने अपने क्रोध की ज्वाला को शांत करने और तपस्या के उद्देश्य से महेंद्रगिरि पर्वत का रुख किया। मान्यता है कि भगवान परशुराम आज भी महेंद्रगिरि पर्वत पर चिरकाल से तपस्यारत हैं। उन्होंने घोषणा किया कि वहिदा मोड़ पर विशालकाय भव्य परशुराम मंदिर बनेगा। उसके साथ ही भगवान शिव, दुर्गा और कृष्ण मंदिर भी बनेंगे। वेदपाठी संस्कृत विद्यालय संग एक आधुनिक गौशाला भी बनेगा। लॉकडाउन खत्म होने के बाद सभी काम शुरू हो जाएंगे। वेद पाठशाला में गरीबों को 10 रूपये में पेट भर भोजन ट्रस्ट की ओर से दिया जाएगा। इस मौके पर श्रीनिवास चतुर्वेदी, बुल्लारी शुक्ला, मुन्ना पांडेय, विनोद तिवारी, सत्यम शुक्ल, राहुल तिवारी, उत्सव तिवारी, शिवम तिवारी, ऋतिक, शिवा तिवारी, ऋतुराज शुक्ला, पवन मालवीय, अंबुज, प्रज्जवल, रजत, प्रभात, पवन, अंकुर पांडेय आदि रहे। परशुराम सेवा समिति की ओर से ज्ञानपुर नगर में जयंती मनाई गई। लॉकडाउन के कारण सभी ने घरों में भगवान परशुराम के चित्र पर माल्यार्पण कर नमन किया। इस मौके पर ब्रह्मजीत शुक्ला, रामेश्वर उपाध्याय, कल्लू तिवारी, उत्तम पाठक, धनी उपाध्याय आदि रहे।