भदोही। भारतीय कालीन प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईसीटी) और सेंट्रल सिल्क बोर्ड (सीएसबी) वाराणसी की ओर से शनिवार को आईआईसीटी कैंपस में बीटेक के छात्रों के लिए जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन किया गया। छात्र-छात्राओं को सीएसबी के वैज्ञानिक डॉ. देवाशीष चट्टोपाध्याय व नितिन कुमार ने सिल्क यार्न प्रोसेसिंग के बारे में विस्तार से जानकारी दी।
डॉ. देवाशीष ने कहा कि इंजीनियरिंग विशेषकर कारपेट टेक्नालाॅजी के छात्रों को सिल्क यार्न के बारे में बारीक जानकारी होनी चाहिए। सत्र में कोकून प्रोसेसिंग के बाद की तकनीक व उच्चीकृत पहलुओं पर प्रकाश डाला। कोकून स्टिफलिंग, सॉर्टिंग और ग्रेडिंग, कोकून कुकिंग, ब्रशिंग, मॉडर्न रीलिंग सिस्टम, री-रीलिंग और क्वालिटी कंट्रोल के साथ ही स्पन सिल्क उत्पादन के बारे में विस्तृत जानकारी दी गई। छात्रों को कोकून से हाई-क्वालिटी कच्चा सिल्क बनाने की प्रक्रिया के बारे में बताया। विशेषज्ञों ने विद्यार्थियों के इनोवेशन पर जोर दिया। कहा कि इससे वे फाइबर की शुद्धता, मजबूती और इको-फ्रेंडली प्रोसेसिंग को बेहतर बना सकते हैं। आईआईसीटी के निदेशक डाॅ. राजीव कुमार वार्ष्णेय ने कहा कि सत्र हमारे छात्रों के लिए काफी उपयोगी रहा। इसमें उन्हें सिल्क तकनीक और इसके औद्योगिक इस्तेमाल के बारे में महत्वपूर्ण जानकारी प्राप्त हुई।