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डोमोटेक्स (जर्मनी) में भारतीय पवेलियन का शुभारंभ
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भदोही। जर्मनी के हनोवर शहर में शुक्रवार को चार दिवसीय कालीन एवं फ्लोर कवरिंग महाकुंभ डोमोटेक्स का शुभारंभ हो गया। फेयर में देश भर से 300 से अधिक निर्यातक हिस्सा ले रहे हैं, जिसमें से 116 निर्यातक कालीन निर्यात संवर्धन परिषद (सीईपीसी) के बैनर तले भागीदारी कर रहे हैं। फेयर के पहले दिन भारतीय पवेलियन का उद्घाटन केंद्रीय वस्त्र मंत्रालय के अपर सचिव व आर्थिक सलाहकार विजय कुमार सिंह ने फीता काट कर किया।
सीईपीसी के अधिशासी निदेशक संजय कुमार ने जर्मनी से बताया कि जिस हाल में भारतीय पवेलियन बना है उसमे भारत के हैंडटफ्टेड कालीन पर बनी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की छवि आकर्षण का मुख्य केंद्र है। इसके अलावा पवेलियन को भारतीय संस्कृति से ओत प्रोत लुक दिया गया है। पवेलिनय की खास बात यह है कि परिषद द्वारा वहां भारतीय परंपरागत लूम, बुनाई उपकरणों और चरखे आदि भी प्रदर्शन के लिए रखे हैं। भारतीय कालीन निर्यातकों में काफी उत्साह है। लोगों को उम्मीद है दुनिया भर से आ रहे हजारो विजिटरों को भारतीय डिजाइनें, रंगामेजी और हस्तकला आकर्षित करने में कामयाब होगा।
परिषद के चेयरमैन सिद्धनाथ सिंह ने बताया कि सब जानते हैं कि भदोही की कालीनों को भौगोलिक संकेतक के रूप में मान्यता मिल गई है। विदेशी धरती पर पहली बार इसे भुनाने का प्रयास किया गया है। जीआई की उपयोगिता तथा भदोही की कालीनो के प्रति लोगों को जागरूक करने के लिए जीआई विशेषज्ञ पद्मश्री डा.रजनीकांत भी भारतीय दल में शामिल हैं। बताया कि इस बार डोमोटेक्स अधिकारियों ने इस वर्ष भारत को हाल नंबर 9 में जगह दी है। इस मौके पर पहुंचे मदन लाल रैगर, कानसुलेट जनरल भारत सरकार ने भारतीय दल का स्वागत और उत्साहवर्धन किया। उमेश कुमार गुप्ता, बोधराज मल्होत्रा, हाजी फिरोज वजीरी, श्रीराम मौर्य आदि मौजूद रहे।
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सीईपीसी के अधिशासी निदेशक संजय कुमार ने जर्मनी से बताया कि जिस हाल में भारतीय पवेलियन बना है उसमे भारत के हैंडटफ्टेड कालीन पर बनी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की छवि आकर्षण का मुख्य केंद्र है। इसके अलावा पवेलियन को भारतीय संस्कृति से ओत प्रोत लुक दिया गया है। पवेलिनय की खास बात यह है कि परिषद द्वारा वहां भारतीय परंपरागत लूम, बुनाई उपकरणों और चरखे आदि भी प्रदर्शन के लिए रखे हैं। भारतीय कालीन निर्यातकों में काफी उत्साह है। लोगों को उम्मीद है दुनिया भर से आ रहे हजारो विजिटरों को भारतीय डिजाइनें, रंगामेजी और हस्तकला आकर्षित करने में कामयाब होगा।
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परिषद के चेयरमैन सिद्धनाथ सिंह ने बताया कि सब जानते हैं कि भदोही की कालीनों को भौगोलिक संकेतक के रूप में मान्यता मिल गई है। विदेशी धरती पर पहली बार इसे भुनाने का प्रयास किया गया है। जीआई की उपयोगिता तथा भदोही की कालीनो के प्रति लोगों को जागरूक करने के लिए जीआई विशेषज्ञ पद्मश्री डा.रजनीकांत भी भारतीय दल में शामिल हैं। बताया कि इस बार डोमोटेक्स अधिकारियों ने इस वर्ष भारत को हाल नंबर 9 में जगह दी है। इस मौके पर पहुंचे मदन लाल रैगर, कानसुलेट जनरल भारत सरकार ने भारतीय दल का स्वागत और उत्साहवर्धन किया। उमेश कुमार गुप्ता, बोधराज मल्होत्रा, हाजी फिरोज वजीरी, श्रीराम मौर्य आदि मौजूद रहे।
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