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निजी अस्पतालों में बढ़ा ऑपरेशन का खर्च

Thu, 17 Jun 2021 11:03 PM IST
Varanasi Bureau वाराणसी ब्यूरो
Updated Thu, 17 Jun 2021 11:03 PM IST
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Increased operation cost in private hospitals
कोरोना संक्रमण की दूसरी लहर जिले में तेजी से पांव पसारा। इससे बचने के लिए कोरोना कर्फ्यू के साथ सरकारी अस्पतालों के ओपीडी तक बंद हो गए। ऐसे में निजी अस्पतालों में लोग इलाज कराने के लिए मजबूर हो गए। वहीं निजी अस्पताल और झोलझाप ने गरीब मरीजों से इलाज के नाम पर मनमाना कीमत वसूल भी किए। अब कोरोना संक्रमण की रफ्तार कम होने पर निजी अस्पतालों में ऑपरेशन महंगे हो गए हैं। इनमें 30 फीसदी तक खर्च बढ़ गया है। कोराना संक्रमण काल में करीब डेढ़ महीने सरकारी और कुछ निजी अस्पतालों की ओपीडी बंद थी। शहर के अधिकांश बड़े अस्पतालों में ऑपरेशन का खर्च कोविड संक्रमण के पहले और कोविड के दौरान एक सामान रहा। लेकिन कुछ अस्पतालों में कोविड काल के दौरान और बाद में भी मरीजों की मनमानी वसूली की जो अभी भी जारी है। हालांकि चिकित्सकों का कहना है कि कोविड काल के दौरान ऑपरेशन करना खतरा मोल लेने के बराबर था। मरीज की जांच किए बिना ऑपरेशन नहीं किया जा सकता था। साथ ही ऑपरेशन करने वाले डॉक्टरों को अपने बचाव के लिए पीपीई किट के साथ अन्य जरूरी सामान का उपयोग करना अनिवार्य हो गया था। इस खर्च को कुछ डॉक्टर ऑपरेशन के खर्च में जोड़कर मरीज से वसूल लेते थे। जबकि कुछ डॉक्टर इस अतिरिक्त खर्च को मरीज के खर्च में नहीं शामिल करते थे। लेकिन अब स्थिति सामान्य होने पर भी कुछ डॉक्टर कोविड काल की तरह वसूली करने में लगे है। जिससे संबंधित मरीजों के तीमारदारों को परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। जल्द इलाज के लिए मजबूरी में चिकित्सकों के शोषण का चुपचाप शिकार होने को मजबूर है। सीएमओ डॉ. लक्ष्मी सिंह ने बताया है कि मरीजों से ऑपरेशन के नाम पर कोई खर्च नहीं लिया जाता है। शासन की मंशा के अनुरूप मरीजों को अस्पताल से दवाएं और अन्य सुविधाएं भी मुहैया कराई जाती है। यदि अस्पताल में इलाज के नाम पर मरीज से पैसे लेने की शिकायत मिलती है तो संबंधित के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी ।
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इनसेट
डॉक्टरों ने बताई खर्च बढ़ने की वजह
ज्ञानपुर। प्रति ऑपरेशन चार से पांच हजार रुपये पीपीई किट का खर्चा, एक पीपीई किट के लिए 800 से 1000 रुपये लिए जाते हैं। हर ऑपरेशन के बाद उपकरण, ओटी टेबिल समेत पूरे ऑपरेशन थिएटर कक्ष के सैनिटाइजेशन में 500 से 800 रुपये का खर्च। साफ-सफाई के लिए चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी बढ़ाए गए, इस पर 300 से 500 रुपये अतिरिक्त खर्च हो रहे हैं। दूरबीन विधि से होने वाले ऑपरेशनों में भी 30 फीसदी तक का खर्च बढ़ा है। लेकिन चिकित्सक गरीब और जरूरतमंद मरीज का रियायत पर भी ऑपरेशन कर रहे हैं। एक बड़े अस्पताल के संचालक ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि कोरोना काल में गाइडलाइन का पालन कराने में अधिक पैसे खर्च होते हैं। जिसके कारण उसकी भरपाई के लिए आपरेशन का खर्च बढ़ाया गया है।
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