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भूमि हड़पने के फर्जी आदेश के मामले में बयान दर्ज
bhadohi hindi news
Updated Sat, 18 Jun 2016 02:05 AM IST
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तहसील क्षेत्र के हरियांव ज्ञानपुर रोड पर कतिपय लोगों द्वारा साजिश के तहत उपजिलाधिकारी न्यायालय से फर्जी आदेश कराकर जमीन हड़पने के प्रयास के मामले में शुक्रवार को एसडीएम न्यायालय के पेशकार, अहलमद, पूर्व एसडीएम आशाराम और तहसीलदार का बयान दर्ज किया गया। एडीएम हरिलाल यादव ने बताया कि इस मामले में लाभार्थी विनीत कुमार ने जबाव देने के लिए एक सप्ताह का समय मांगा है।
एसडीएम आशाराम ने गत 12 जून को डीएम को भेजी अपनी रिपोर्ट में बताया कि आठ जून को उनका तबादला अपर उपजिलाधिकारी के रूप में ज्ञानपुर हो गया। उन्होंने उसी दिन नवागत एसडीएम रामजी लाल को कार्यभार भी सौंप दिया, लेकिन तहसील परिसर के ही अपने आवास में रह रहे थे। बताया कि इस दौरान उन्हें सूत्रों से मालूम हुआ कि 12 जून (रविवार) को उपजिलाधिकारी न्यायालय का कार्यालय खुला हुआ है और एक फर्जी आदेश की प्रक्रिया की जा रही है तो वे तहसीलदार और नायब तहसीलदार को साथ लेकर एसडीएम कार्यालय धमक पड़े। वहां होरीलाल, संबद्ध राजस्व अहलमद काम कर रहे थे और उनके पास न्यायालय की फाईलें रखी हुई थीं। उसमें से एक पत्रावली विनीत कुमार बनाम सरकार भी थी। इसमें दो जून 2016 का आदेश भी संलग्न था और उसकी नकल के लिए कार्यालय की मुहर लगी प्रति एवं परवाना अमलदरामद चार प्रतियों में पत्रावली तैयार थी। उन्होंने बताया कि आदेश और परवाना पर एसडीएम भदोही के स्थान पर उनके हस्ताक्षर जैसा फर्जी हस्ताक्षर अंकित किया गया था। जबकि उक्त पत्रावली, सुनवाई और आदेश के लिए उनके पास ना तो आई और ना ही परवाना अमलदरामद, आदेश पर ही उनके हस्ताक्षर हैं। उन्होंने डीएम को बताया कि इस साजिश में एसडीएम न्यायालय भदोही के कर्मचारी विश्वनाथ यादव पेशकार, होरीलाल संबद्ध अहमलद और लाभान्वित पक्ष विनीत कुमार शामिल हैं। उन्होंने उपरोक्त तीनों के खिलाफ प्रथम सूचना रिपोर्ट दर्ज कराने की संस्तुति करने के साथ साथ विनीत कुमार बनाम सरकार वाद की पत्रावली को सील करने की अनुमति भी डीएम से मांगी। एसडीएम की रिपोर्ट मिलते ही मामले को पूरी गंभीरता से लेते हुए डीएम ने प्रकरण की जांच के लिए एडीएम को सुपुर्द कर उनसे आख्या मांगी थी। एडीएम ने मामले में पेशकार, अहलमद, तत्कालीन एसडीएम, तहसीलदार समेत लाभार्थी पक्ष विनीत कुमार पुत्र श्याम सुंदर लाल निवासी हरियांव को नोटिस देकर शुक्रवार (17 जून) को अपने कार्यालय बुलाकर उनके बयान दर्ज किए। बताया कि सभी के बयान हो चुके हैं लेकिन लाभार्थी विनीत कुमार ने जबाव के लिए सप्ताह भर का समय मांगा है।
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एसडीएम आशाराम ने गत 12 जून को डीएम को भेजी अपनी रिपोर्ट में बताया कि आठ जून को उनका तबादला अपर उपजिलाधिकारी के रूप में ज्ञानपुर हो गया। उन्होंने उसी दिन नवागत एसडीएम रामजी लाल को कार्यभार भी सौंप दिया, लेकिन तहसील परिसर के ही अपने आवास में रह रहे थे। बताया कि इस दौरान उन्हें सूत्रों से मालूम हुआ कि 12 जून (रविवार) को उपजिलाधिकारी न्यायालय का कार्यालय खुला हुआ है और एक फर्जी आदेश की प्रक्रिया की जा रही है तो वे तहसीलदार और नायब तहसीलदार को साथ लेकर एसडीएम कार्यालय धमक पड़े। वहां होरीलाल, संबद्ध राजस्व अहलमद काम कर रहे थे और उनके पास न्यायालय की फाईलें रखी हुई थीं। उसमें से एक पत्रावली विनीत कुमार बनाम सरकार भी थी। इसमें दो जून 2016 का आदेश भी संलग्न था और उसकी नकल के लिए कार्यालय की मुहर लगी प्रति एवं परवाना अमलदरामद चार प्रतियों में पत्रावली तैयार थी। उन्होंने बताया कि आदेश और परवाना पर एसडीएम भदोही के स्थान पर उनके हस्ताक्षर जैसा फर्जी हस्ताक्षर अंकित किया गया था। जबकि उक्त पत्रावली, सुनवाई और आदेश के लिए उनके पास ना तो आई और ना ही परवाना अमलदरामद, आदेश पर ही उनके हस्ताक्षर हैं। उन्होंने डीएम को बताया कि इस साजिश में एसडीएम न्यायालय भदोही के कर्मचारी विश्वनाथ यादव पेशकार, होरीलाल संबद्ध अहमलद और लाभान्वित पक्ष विनीत कुमार शामिल हैं। उन्होंने उपरोक्त तीनों के खिलाफ प्रथम सूचना रिपोर्ट दर्ज कराने की संस्तुति करने के साथ साथ विनीत कुमार बनाम सरकार वाद की पत्रावली को सील करने की अनुमति भी डीएम से मांगी। एसडीएम की रिपोर्ट मिलते ही मामले को पूरी गंभीरता से लेते हुए डीएम ने प्रकरण की जांच के लिए एडीएम को सुपुर्द कर उनसे आख्या मांगी थी। एडीएम ने मामले में पेशकार, अहलमद, तत्कालीन एसडीएम, तहसीलदार समेत लाभार्थी पक्ष विनीत कुमार पुत्र श्याम सुंदर लाल निवासी हरियांव को नोटिस देकर शुक्रवार (17 जून) को अपने कार्यालय बुलाकर उनके बयान दर्ज किए। बताया कि सभी के बयान हो चुके हैं लेकिन लाभार्थी विनीत कुमार ने जबाव के लिए सप्ताह भर का समय मांगा है।
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