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सेमराधनाथ में विंध्य, काशी एवं प्रयाग-सा पुण्य
ब्यूरो ज्ञानपुर अमर उजाला
Updated Tue, 13 Jan 2015 01:54 AM IST
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काशी, प्रयाग और विंध्य के मध्य उत्तरवाहिनी गंगा तट पर स्थित प्राचीन बाबा सेमराधनाथ पर कल्पवास काफी अद्भुत है। यह धार्मिक स्थली अपने आप में बड़े इतिहास को समेटे हुए है।
वेदों और पुराणों में सेमराधनाथ का इतिहास प्रमाणित है। जमीन से 15 फीट अंदर शिवलिंग काफी अलौकिक है। प्रत्येक साल माघ में यहां पर कल्पवास मेला लगता है। देश का पाचवां कुंभ भी सेमराधनाथ में ही लगता है।
भदोही के जंगीगंज कस्बे से 13 किमी दक्षिण और सीता समाहित स्थल सीतामढ़ी से 15 किमी पूर्व में उत्तरवाहिनी गंगा तट पर स्थित सेमराधनाथ महादेव मंदिर काशी, प्रयाग और विंध्य का अनूठा संगम है।
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पुराणों और ग्रंथों में इसे उप ज्योर्तिलिंग की संज्ञा दी गई है। मंदिर का उल्लेख पद्म पुराण, शिव पुराण, लिंग पुराण सहित श्रीमद्भावगत में मिलता है।
पद्म पुराण में उल्लेखित श्लोक है सेमराधनाथ (समृद्धनाथ) में यहां की पौराणिकता और ऐतिहासिकता का पता चलता है। जिसका उदाहरण पद्म पुराण में वर्णित है।
काशी और प्रयाग के मध्य सेमराधनाथ में शिव के त्रिशूल और श्रीकृष्ण के सुदर्शन चक्र के टकराने से एक दिव्य अलौकिक दीप प्रज्ज्वलित हुआ था, जिसमें से एक ज्योतिर्मय शिवलिंग का रूप धरती में समा गया।
कालांतर में भगवान शिव की प्रेरणा से एक सौदागर ने जब सेमराधनाथ स्थित उक्त स्थान की खुदाई प्रारंभ की तो जमीन से 15 फीट नीचे अद्भुत शिवलिंग मिला।
इसका आकार एक मीटर लंबा और आधा मीटर मोटे व्यास में है, जो बाईं ओर झुका हुआ है। अन्य कई पुराणों में सेमराध स्थल का वर्णन मिलता है।
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वेदों और पुराणों में सेमराधनाथ का इतिहास प्रमाणित है। जमीन से 15 फीट अंदर शिवलिंग काफी अलौकिक है। प्रत्येक साल माघ में यहां पर कल्पवास मेला लगता है। देश का पाचवां कुंभ भी सेमराधनाथ में ही लगता है।
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भदोही के जंगीगंज कस्बे से 13 किमी दक्षिण और सीता समाहित स्थल सीतामढ़ी से 15 किमी पूर्व में उत्तरवाहिनी गंगा तट पर स्थित सेमराधनाथ महादेव मंदिर काशी, प्रयाग और विंध्य का अनूठा संगम है।
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पुराणों और ग्रंथों में इसे उप ज्योर्तिलिंग की संज्ञा दी गई है। मंदिर का उल्लेख पद्म पुराण, शिव पुराण, लिंग पुराण सहित श्रीमद्भावगत में मिलता है।
पद्म पुराण में उल्लेखित श्लोक है सेमराधनाथ (समृद्धनाथ) में यहां की पौराणिकता और ऐतिहासिकता का पता चलता है। जिसका उदाहरण पद्म पुराण में वर्णित है।
काशी और प्रयाग के मध्य सेमराधनाथ में शिव के त्रिशूल और श्रीकृष्ण के सुदर्शन चक्र के टकराने से एक दिव्य अलौकिक दीप प्रज्ज्वलित हुआ था, जिसमें से एक ज्योतिर्मय शिवलिंग का रूप धरती में समा गया।
कालांतर में भगवान शिव की प्रेरणा से एक सौदागर ने जब सेमराधनाथ स्थित उक्त स्थान की खुदाई प्रारंभ की तो जमीन से 15 फीट नीचे अद्भुत शिवलिंग मिला।
इसका आकार एक मीटर लंबा और आधा मीटर मोटे व्यास में है, जो बाईं ओर झुका हुआ है। अन्य कई पुराणों में सेमराध स्थल का वर्णन मिलता है।