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धान के लिए खेत को दें हरी खाद का पोषण
ब्यूरो/ अमर उजाला ,भदोही
Updated Fri, 29 Apr 2016 07:20 PM IST
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अप्रैल में आसमान से बरसती आग ने सामान्य जनजीवन को भले ही बेपटरी कर दिया हो, लेकिन कृषि के लिहाज से किसानों में एक उम्मीद भी जगा रही है। माना जा रहा है कि अप्रैल में भीषण गर्मी में इस बात के संकेत हो सकती है कि इस बार बरसात बेहतर होगी। इसको लेेकर किसान आशान्वित हैं। इस बीच खेती के जानकारों ने भी मौसम के रुख के मुताबिक अपनी तैयारियां पूरी कर लेने की सलाह दे दी है।
लंबे समय के बाद इस बार अप्रैल में आसमान में बादल नहीं दिखे और बंगाल के तटीय इलाके में आने वाले पोएला वैशाख की भी सूचना नहीं मिली। इससे माना जा रहा है कि इस बार मानसून उम्मीद से अधिक आ सकता है। यानी जून-जुलाई में अच्छी बरसात हो सकती है। इस पर किसानों ने थोड़ी राहत व्यक्त की है। बरसात अच्छी हो या औसत, लेकिन कृषि विशेषज्ञ किसानों को दोनों ही स्थितियों में तैयार रहने की सलाह दे रहे हैं। कृषि विज्ञान केंद्र बेजवां के कृषि वैज्ञानिक डॉ. एके चतुर्वेदी के मुताबिक अच्छी बरसात होगी तो क्षेत्र के हिसाब से धान की परंपरागत खेती अच्छी होगी। इसके अलावा गन्ने को भी फायदा मिल सकता है, लेकिन गन्ने की बुवाई तो हो चुकी है।
अगर बरसात कम या औसत होने की आशंका हो तो किसानों को अभी खाली समय में सनई और ढैंचा की बुवाई कर देनी चाहिए। डेढ़-दो माह में तैयार हो जाने वाली सनई और ढैंचा को बाद में उसे पलट कर धान की रोपाई कर सकते हैं। हरी खाद के असर से खेत में नमी बनी रहती है। साथ ही हल्की बारिश की स्थिति में सब्जी की खेती पर खास ध्यान दिया जाना चाहिए। ताकि नुकसान की कुछ हद तक भरपाई हो जाए। ऊंचाई वाले स्थान पर जहां पानी न टिके, सब्जियां रहेंगी तो अच्छा उत्पादन होगा। इसके अलावा धान की खेती की तैयारी समय पर कर लें।
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लंबे समय के बाद इस बार अप्रैल में आसमान में बादल नहीं दिखे और बंगाल के तटीय इलाके में आने वाले पोएला वैशाख की भी सूचना नहीं मिली। इससे माना जा रहा है कि इस बार मानसून उम्मीद से अधिक आ सकता है। यानी जून-जुलाई में अच्छी बरसात हो सकती है। इस पर किसानों ने थोड़ी राहत व्यक्त की है। बरसात अच्छी हो या औसत, लेकिन कृषि विशेषज्ञ किसानों को दोनों ही स्थितियों में तैयार रहने की सलाह दे रहे हैं। कृषि विज्ञान केंद्र बेजवां के कृषि वैज्ञानिक डॉ. एके चतुर्वेदी के मुताबिक अच्छी बरसात होगी तो क्षेत्र के हिसाब से धान की परंपरागत खेती अच्छी होगी। इसके अलावा गन्ने को भी फायदा मिल सकता है, लेकिन गन्ने की बुवाई तो हो चुकी है।
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अगर बरसात कम या औसत होने की आशंका हो तो किसानों को अभी खाली समय में सनई और ढैंचा की बुवाई कर देनी चाहिए। डेढ़-दो माह में तैयार हो जाने वाली सनई और ढैंचा को बाद में उसे पलट कर धान की रोपाई कर सकते हैं। हरी खाद के असर से खेत में नमी बनी रहती है। साथ ही हल्की बारिश की स्थिति में सब्जी की खेती पर खास ध्यान दिया जाना चाहिए। ताकि नुकसान की कुछ हद तक भरपाई हो जाए। ऊंचाई वाले स्थान पर जहां पानी न टिके, सब्जियां रहेंगी तो अच्छा उत्पादन होगा। इसके अलावा धान की खेती की तैयारी समय पर कर लें।
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