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जरूरत से कम मिल रहा पैसा
अमर उजाला ब्यूरो /ज्ञानपुर
Updated Fri, 02 Dec 2016 10:54 PM IST
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बैंक ऑफ बड़ौदा की ज्ञानपुर शाखा पर लगी लोगों की कतार।
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नकदी की जबरदस्त किल्लत के बीच बैंकों में कर्मचारियों और उपभोक्ताओं के बीच हो रही किचकिच की सबसे बड़ी वजह कैश की भारी कमी है। बैंकों के लिए निर्धारित नकदी की सीमा से काफी कम धनराशि उन्हें मुहैया कराई जा रही है। जिन बैंकों की रोज की जरूरत 25 लाख रुपये की है, उन्हें महज 15 से 20 लाख में काम चलाना पड़ रहा है।
नोटबंदी शुरुआती दिनों में बैंकों को पूरी तो नहीं, लेकिन संतोषजनक नकदी मिली। इससे उपभोक्ताओं को संभालने में परेशानी थोड़ी कम हुई। लेकिन, पिछले तकरीबन हफ्तेभर से बैंकों को नकदी की पर्याप्त सप्लाई नहीं हो पा रही है। जिले की यूनियन बैंक की भदोही शाखा को 25 लाख रुपये प्रतिदिन की जरूरत होती है, लेकिन उसे 15 से 18 लाख रुपये मिल रहे हैं। इसी तरह ज्ञानपुर शाखा की भी प्रतिदिन के कैश की सीमा 25 लाख रुपये है, लेकिन यहां भी अधिकतम 20 लाख रुपये मिल पा रहे हैं। दुलहीपुर शाखा का प्रतिदिन का ट्रांजक्शन 10 लाख का है, लेकिन केवल चार लाख रुपये से बैंक को काम चलाना पड़ रहा है। एलडीएम अमिताभ सेन ने कहा कि कैश की जितनी सप्लाई होनी चाहिए, उतनी हो नहीं पा रही है। जो कैश मिल रहा है, उसे बांट दिया जा रहा है।
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नोटबंदी शुरुआती दिनों में बैंकों को पूरी तो नहीं, लेकिन संतोषजनक नकदी मिली। इससे उपभोक्ताओं को संभालने में परेशानी थोड़ी कम हुई। लेकिन, पिछले तकरीबन हफ्तेभर से बैंकों को नकदी की पर्याप्त सप्लाई नहीं हो पा रही है। जिले की यूनियन बैंक की भदोही शाखा को 25 लाख रुपये प्रतिदिन की जरूरत होती है, लेकिन उसे 15 से 18 लाख रुपये मिल रहे हैं। इसी तरह ज्ञानपुर शाखा की भी प्रतिदिन के कैश की सीमा 25 लाख रुपये है, लेकिन यहां भी अधिकतम 20 लाख रुपये मिल पा रहे हैं। दुलहीपुर शाखा का प्रतिदिन का ट्रांजक्शन 10 लाख का है, लेकिन केवल चार लाख रुपये से बैंक को काम चलाना पड़ रहा है। एलडीएम अमिताभ सेन ने कहा कि कैश की जितनी सप्लाई होनी चाहिए, उतनी हो नहीं पा रही है। जो कैश मिल रहा है, उसे बांट दिया जा रहा है।
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