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गंगा में समा गई आठ बीघे जमीन
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सीतामढ़ी के इटहरा में गंगा का जल स्तर बढ़ने से शुरु हुआ कटान।
- फोटो : BHADOHI
सीतामढ़ी। तेज हवाओं के कारण गंगा में लहरें उठने लगीं हैं। इसके चलते गंगा ने किनारे की कृषि योग्य भूमि को निगलना शुरू कर दिया है। शनिवार को आठ बीघा कृषि योग्य भूमि गंगा की जलधारा में समा गई। नदी किनारे भूमि की कटान शुरू हो जाने से किसानों की चिंता बढ़ गई है। कटान रोकने के लिए प्रशासन की ओर से कोई व्यवस्था नहीं किए जाने के कारण किसानों में नाराजगी है। हालांकि गंगा अभी खतरे के निशान 80 मीटर से पांच मीटर नीचे बह रही है। शनिवार को गंगा का जल स्तर 75 मीटर को पार कर गया।
भादो में बारिश के सहायक नदियों का पानी गंगा में आने जल स्तर बढ़ने लगा है। कोनिया के इटहरा में गंगा ने किसानों के सपनों को निगलना शुरू कर दिया है। तीन दिन में किसानों की करीब आठ बीघे से अधिक खेती योग्य भूमि गंगा की धारा में समा गई। बाढ़ के लिहाज से अतिसंवेदनशील कोनिया क्षेत्र के छेछुआ और भुर्रा में कटान का असर अभी न के बराबर है, लेकिन इटहरा में गंगा खेती योग्य जमीन को निगलने लगी हैं। किसानों ने बताया कि एक दशक में ही उनकी 500 बीघे से भी अधिक उपजाऊ कृषि जमीन गंगा की धारा में विलीन हो चुकी है। इटहरा के किसानों का आरोप है कि शासन प्रशासन और जनप्रतिनिधियों से कटान रोकने के लिए कई बार अनुरोध किया गया, लेकिन किसानों की समस्याओं के निदान के लिए किसी ने पहल तक नहीं की। बाढ़ आते ही हर साल बहुमूल्य और उपजाऊ जमीन कट कर गंगा में समा जाती है। एक-एक इंच जमीन के लिए लोग कोर्ट कचहरी के चक्कर लगाते है, लेकिन गंगा में बाढ़ आती है तो किसानों की सैकड़ों बीघे जमीन गंगा में समा जा रही है।
शनिवार को इटहरा के किसानों ने कटान रोकने के लिए पश्चिम वाहिनी गंगा घाट पर प्रदर्शन कर कटान रोकने के लिए आवाज बुंलद की। प्रदर्शन करने वालों में इटहरा के किसान अवधेश सिंह, जय सिंह, योगेंद्र सिंह, कुलदीप सिंह, शेर बहादुर सिंह, ननके सिंह, गायत्री सिंह, अंकित सिंह, प्रेमनाथ सिंह, राजेंद्र सिंह, सर्वेश सिंह, सोनू भारतीय, कप्तान गौतम आदि रहे।
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एक दशक से कटान की समस्या बढ़ी
सीतामढ़ी। गंगा बाढ़ की दृष्टि से अति संवेदनशील कोनिया क्षेत्र के इटहरा गांव में कटान एक दशक पूर्व शुरू हुई। गांव के किसान रामजी सिंह और प्रेमनाथ सिंह का कहना है कि गंगा की धारा पहले काफी दूर गंगा पार खैरा गांव के पास थी, लेकिन पानी के जहाजों के लिए जलमार्ग बनाने के लिए एक दशक पूर्व मशीनों से खुदाई कर गंगा की धारा में परिवर्तन कर दिया गया था। उसी समय से कटान की समस्या पैदा हुई, जिससे भदोही के इटहरा, मवैयाथान सिंह आदि गांवों में कटान की समस्या शुरू हो गई। महज 11 वर्षों में ही सैकड़ों बीघे उपजाऊ जमीनें गंगा में समा गईं। इसी गांव के किसान कमला शंकर मिश्रा कहते हैं कि धारा में परिवर्तन से गंगा पार मिर्जापुर जनपद के गोगांव, खैरा, बसेवरा आदि गांवों का रकबा बढ़ता जा रहा है, जबकि इटहरा के किसानों को बर्बादी झेलनी पड़ रही है।
तरी और उपरवार में होती है सब्जी की खेती
सीतामढ़ी। इटहरा गांव क्षेत्रफल की दृष्टि से काफी बड़ा है। गांव तरी और उपरवार दो भागों में बंटा है। तरी की जमीनों में रबी और खरीफ की फसलों से अच्छी पैदावार होती है। साथ ही बड़े पैमाने पर सब्जी की खेती होती है। कोनिया के कछार की सब्जी पूर्वांचल के सब्जी बाजारों में ट्रकों में भर कर जाती है, लेकिन स्थिति खराब होती जा रही है। किसान अवधेश सिंह कहते हैं कि अगर कटान रोकने के लिए ठोस कदम नहीं उठाया गया तो किसान भूमिहीन हो जाएंगे। गांव के किसानों रामजी सिंह, संकठा सिंह, अजीत सिंह, अमीन सिंह, कुंवर बहादुर सिंह, अवधेश सिंह, सज्जन सिंह, योगेंद्र सिंह, कमला सिंग, अमर बहादुर सिंह, पंचधारी सिंह, राजेंद्र सिंह, चंद्रभूषन सिंह, कीर्तन सिंह सहित तमाम किसानों की सैकड़ों बीघे खेती की जमीन गंगा की धारा में समा चुकी है।
गंगा का जलस्तर 75 मीटर पार, जायजा लेने पहुंचे एसडीएम-तहसीलदार
सीतामढ़ी। बारिश और यमुना का पानी गंगा में आने से गंगा के जलस्तर में बढोतरी जारी है। केंद्रीय जल आयोग के मीटर गेज पर शनिवार को गंगा का जल स्तर 75 मीटर पार कर गया है। हालांकि शाम छह बजे जल स्तर 75.010 पर पहुंचने के बाद स्थिर हो गया। उधर ज्ञानपुर एसडीएम ज्ञानप्रकाश और तहसीलदार देवेंद्र कुमार ने डीघ क्षेत्र के कोनिया क्षेत्र के गंगा किनारे छेछुआ, भुर्रा, हरिरामपुर , सीतामढ़ी आदि गांवों में जाकर बाढ़ की स्थिति का जायजा लिया। अधिकारियों ने ग्रामीणों से सरकारी सुविधाएं मिलने के बाबत भी जानकारी ली। ग्रामीणों ने छेछुआ-भुर्रा में हर साल होने वाली कटान के बारे में जानकारी दी। कहा कि कटान में किसानों की काफी जमीन चली गई।
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भादो में बारिश के सहायक नदियों का पानी गंगा में आने जल स्तर बढ़ने लगा है। कोनिया के इटहरा में गंगा ने किसानों के सपनों को निगलना शुरू कर दिया है। तीन दिन में किसानों की करीब आठ बीघे से अधिक खेती योग्य भूमि गंगा की धारा में समा गई। बाढ़ के लिहाज से अतिसंवेदनशील कोनिया क्षेत्र के छेछुआ और भुर्रा में कटान का असर अभी न के बराबर है, लेकिन इटहरा में गंगा खेती योग्य जमीन को निगलने लगी हैं। किसानों ने बताया कि एक दशक में ही उनकी 500 बीघे से भी अधिक उपजाऊ कृषि जमीन गंगा की धारा में विलीन हो चुकी है। इटहरा के किसानों का आरोप है कि शासन प्रशासन और जनप्रतिनिधियों से कटान रोकने के लिए कई बार अनुरोध किया गया, लेकिन किसानों की समस्याओं के निदान के लिए किसी ने पहल तक नहीं की। बाढ़ आते ही हर साल बहुमूल्य और उपजाऊ जमीन कट कर गंगा में समा जाती है। एक-एक इंच जमीन के लिए लोग कोर्ट कचहरी के चक्कर लगाते है, लेकिन गंगा में बाढ़ आती है तो किसानों की सैकड़ों बीघे जमीन गंगा में समा जा रही है।
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शनिवार को इटहरा के किसानों ने कटान रोकने के लिए पश्चिम वाहिनी गंगा घाट पर प्रदर्शन कर कटान रोकने के लिए आवाज बुंलद की। प्रदर्शन करने वालों में इटहरा के किसान अवधेश सिंह, जय सिंह, योगेंद्र सिंह, कुलदीप सिंह, शेर बहादुर सिंह, ननके सिंह, गायत्री सिंह, अंकित सिंह, प्रेमनाथ सिंह, राजेंद्र सिंह, सर्वेश सिंह, सोनू भारतीय, कप्तान गौतम आदि रहे।
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एक दशक से कटान की समस्या बढ़ी
सीतामढ़ी। गंगा बाढ़ की दृष्टि से अति संवेदनशील कोनिया क्षेत्र के इटहरा गांव में कटान एक दशक पूर्व शुरू हुई। गांव के किसान रामजी सिंह और प्रेमनाथ सिंह का कहना है कि गंगा की धारा पहले काफी दूर गंगा पार खैरा गांव के पास थी, लेकिन पानी के जहाजों के लिए जलमार्ग बनाने के लिए एक दशक पूर्व मशीनों से खुदाई कर गंगा की धारा में परिवर्तन कर दिया गया था। उसी समय से कटान की समस्या पैदा हुई, जिससे भदोही के इटहरा, मवैयाथान सिंह आदि गांवों में कटान की समस्या शुरू हो गई। महज 11 वर्षों में ही सैकड़ों बीघे उपजाऊ जमीनें गंगा में समा गईं। इसी गांव के किसान कमला शंकर मिश्रा कहते हैं कि धारा में परिवर्तन से गंगा पार मिर्जापुर जनपद के गोगांव, खैरा, बसेवरा आदि गांवों का रकबा बढ़ता जा रहा है, जबकि इटहरा के किसानों को बर्बादी झेलनी पड़ रही है।
तरी और उपरवार में होती है सब्जी की खेती
सीतामढ़ी। इटहरा गांव क्षेत्रफल की दृष्टि से काफी बड़ा है। गांव तरी और उपरवार दो भागों में बंटा है। तरी की जमीनों में रबी और खरीफ की फसलों से अच्छी पैदावार होती है। साथ ही बड़े पैमाने पर सब्जी की खेती होती है। कोनिया के कछार की सब्जी पूर्वांचल के सब्जी बाजारों में ट्रकों में भर कर जाती है, लेकिन स्थिति खराब होती जा रही है। किसान अवधेश सिंह कहते हैं कि अगर कटान रोकने के लिए ठोस कदम नहीं उठाया गया तो किसान भूमिहीन हो जाएंगे। गांव के किसानों रामजी सिंह, संकठा सिंह, अजीत सिंह, अमीन सिंह, कुंवर बहादुर सिंह, अवधेश सिंह, सज्जन सिंह, योगेंद्र सिंह, कमला सिंग, अमर बहादुर सिंह, पंचधारी सिंह, राजेंद्र सिंह, चंद्रभूषन सिंह, कीर्तन सिंह सहित तमाम किसानों की सैकड़ों बीघे खेती की जमीन गंगा की धारा में समा चुकी है।
गंगा का जलस्तर 75 मीटर पार, जायजा लेने पहुंचे एसडीएम-तहसीलदार
सीतामढ़ी। बारिश और यमुना का पानी गंगा में आने से गंगा के जलस्तर में बढोतरी जारी है। केंद्रीय जल आयोग के मीटर गेज पर शनिवार को गंगा का जल स्तर 75 मीटर पार कर गया है। हालांकि शाम छह बजे जल स्तर 75.010 पर पहुंचने के बाद स्थिर हो गया। उधर ज्ञानपुर एसडीएम ज्ञानप्रकाश और तहसीलदार देवेंद्र कुमार ने डीघ क्षेत्र के कोनिया क्षेत्र के गंगा किनारे छेछुआ, भुर्रा, हरिरामपुर , सीतामढ़ी आदि गांवों में जाकर बाढ़ की स्थिति का जायजा लिया। अधिकारियों ने ग्रामीणों से सरकारी सुविधाएं मिलने के बाबत भी जानकारी ली। ग्रामीणों ने छेछुआ-भुर्रा में हर साल होने वाली कटान के बारे में जानकारी दी। कहा कि कटान में किसानों की काफी जमीन चली गई।