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आठ महीने में फैसला : नाबालिग से दुष्कर्म के दोषी को 20 साल की सजा
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ज्ञानपुर। अपर सत्र न्यायाधीश पाॅक्सो मधु डोंगरा की अदालत ने मानसिक रूप से कमजोर नाबालिग से दुष्कर्म करने के दोषी को 20 साल कारावास और 50 हजार रुपये अर्थदंड की सजा सुनाई। अल्प समय में विवेचना होने एवं साक्ष्य आदि प्रस्तुत करने पर आठ महीने के अंदर कोर्ट ने अपना फैसला सुनाया। अभियोजन के मुताबिक पीड़िता के पिता ने तहरीर देकर शिकायत किया कि आठ मार्च को शाम पांच बजे उसकी 13 साल की मानसिक रूप से कमजोर नाबालिग बेटी नहीं मिली।
उसके बाद वह खोजते हुए गांव की तरफ गया तो महिलाओं ने बताया कि हरिरामपुर निवासी सतीश राजभर उसका हाथ पकड़कर ले जा रहा था। कुछ महिलाओं ने बताया कि उसकी बेटी को खेत की तरफ जाते देखा गया। वहां जाने पर जब देखा तो उसकी बेटी बिना कपड़े के पड़ी थी। पूछने पर उसने ईशारे में बताया कि छोटू ने गलत काम किया। शुरूआत में लोकलाज से बचा लेकिन उसके बाद तहरीर दी।
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पुलिस ने 13 मार्च 2024 को कोतवाली में मुकदमा दर्ज किया। इसके बाद पुलिस ने विवेचना कर आरोपपत्र न्यायालय में भेजा। मंगलवार को न्यायाधीश मधु डोगरा ने दोषी छोटू उर्फ सतीश राजभर निवासी हरीरामपुर को 20 साल का कारावास एवं 50 हजार अर्थदंड की सजा सुनाई। अर्थदंड की संपूर्ण धनराशि पीड़िता को प्रतिकर के रूप में प्रदान करने का आदेश दिया।
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