भदोही : कोर्ट में थी ‘गुलाबी’ हथिनी के मामले की सुनवाई, वकीलों के कार्य बहिष्कार के कारण अगली सुनवाई 13 को
वन विभाग ने हथिनी को पशु एंबुलेंस से शुक्रवार को मथुरा स्थित एक एनजीओ के संरक्षण गृह के लिए रवाना कर दिया। हालांकि हथिनी को ले जाते समय वन विभाग की टीम को ग्रामीणों के विरोध का भी सामना करना पड़ा।
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बाद में उस अधिवक्ता के माध्यम जिला जज के यहां निगरानी याचिका दाखिल की गई। अधिवक्ता एवं डिस्ट्रिक्ट बार एसोसिएशन के अध्यक्ष एसडी पांडेय ने बताया कि पिछली सुनवाई के दौरान कहा गया कि अगली सुनवाई तक हाथी को जहां है, वहीं रखकर चारा-पानी का इंतजाम किया जाय। वन विभाग को ही चारा-पानी के लिए कहा गया।
हथिनी को ले जाते पर उठे कई सवाल
जिस समय हथिनी को पशु एंबुलेंस में चढ़ाया जा रहा था उस दौरान विरोध करने वाले कई सवाल उठा रहे थे। अधिवक्ता एसडी पांडेय ने कहा कि किस आधार पर हथिनी को यहां से ले जाया गया, यह किसी को पता नहीं, जबकि इस मामले की सुनवाई अभी चल रही है। सुनवाई के लिए 13 जुलाई अगली तिथि है। उधर, अन्य लोगों ने भी सवाल उठाया कि जब पिछले आदेश को आधार मानकर ले जाया गया तो फिर इतने दिन तक उसे क्यों रोके रखा गया। जब इतने दिन हाथी को रोका गया तो अगली सुनवाई का इंतजार क्यों नहीं किया गया।
आईजीआरएस पर भी हुई शिकायत
हाथियों की रक्षा, सुरक्षा पर काम करने वाली संगीता डोंगरा ने समन्वित शिकायत निवारण प्रणाली (आईजीआरएस) पर ‘गुलाबी’ हथिनी के मामले की शिकायत की है। उन्होंने कहा कि हथिनी को अवैध तरीके से एनजीओ वाइल्ड लाइफ एसओएस ले जाया गया। इस पूरे मामले की जांच होनी चाहिए। शिकायत में उन्होंने सुप्रीम कोर्ट का भी जिक्र किया है। कहा कि सुप्रीम कोर्ट का आदेश है कि बिना अनुमति के किसी भी हाथी को स्थानांतरित नहीं किया जाएगा। आरोप लगाया है कि अवैध तरीके से हाथी पर कब्जा करने के लिए डीएफओ व एनजीओ ने पुलिस के साथ धोखाधड़ी की है।