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Bhadohi News: ‘सुरक्षित बचपन’ के दावे बुलंद, 120 स्कूल अब भी बिना चहारदीवारी के

Tue, 21 Jul 2026 01:31 AM IST
Varanasi Bureau वाराणसी ब्यूरो
Updated Tue, 21 Jul 2026 01:31 AM IST
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Claims of a 'safe childhood' are high, but 120 schools still lack boundary walls
चहारदीवारी विहिन कन्या पूर्व माध्यमिक विद्यालय दरवांसी। संवाद
ज्ञानपुर। जिले के 120 परिषदीय विद्यालयों में अब तक चहारदीवारी नहीं बनी है। इससे छुट्टा मवेशियों एवं कुत्तों के हमले से बच्चों के घायल होने का डर रहता है।
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मध्याह्न भोजन के समय परिसर में कुत्तों की संख्या अधिक होने पर शिक्षकों को निगरानी करनी पड़ती है। सोमवार को हमारी टीम ने सुरियावां, डीघ और औराई के ऐसे पांच विद्यालयों की पड़ताल की, जहां चहारदीवारी न होने से शिक्षक भी चिंतित दिखे। जिले के 885 प्राथमिक, पूर्व माध्यमिक और कंपोजिट विद्यालयों में कक्षा एक से आठ तक के एक लाख 33 हजार छात्र-छात्राएं पंजीकृत हैं। ऑपरेशन कायाकल्प के तहत विद्यालय भवनों को संवारने और सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए 19 बिंदुओं पर कार्य किया जा रहा है।
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इनमें एक चहारदीवारी भी है। इसके बावजूद अब तक 120 विद्यालयों में गेट लगी चहारदीवारी का निर्माण नहीं हो सका है। चहारदीवारी विहीन कई स्कूल या तो सड़क किनारे स्थित हैं या तालाब-पोखरों से सटे हैं। ऐसे में बच्चों के स्कूल आने-जाने के दौरान अभिभावकों में भय बना रहता है। मध्यावकाश में विद्यार्थी एमडीएम खाने के बाद खेलने जाते हैं तो चिंता और बढ़ जाती है। मध्याह्न भोजन के समय विद्यालयों में कुत्तों की संख्या बढ़ जाती है। बच्चों पर हमला होने की आशंका को देखते हुए शिक्षक निगरानी करते हैं।
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पूर्व माध्यमिक विद्यालय गोदमा के प्रधानाध्यापक अनिल कुमार मौर्य ने बताया कि कई बार लिखापढ़ी की गई, लेकिन अभी तक चहारदीवारी नहीं है। एमडीएम के दौरान शिक्षकों की ड्यूटी लगाई जाती है, ताकि कोई कुत्ता या मवेशी बच्चों पर हमला न कर सके। ऐसे विद्यालयों के परिसर में पूरे दिन पशुओं का जमावड़ा लगा रहता है। वहीं छुट्टी के दिनों में शरारती तत्व भी जमा रहते हैं।
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