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Bhadohi News: चीनी मांझा दे रहा घाव, अफसर बने हैं लाचार
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ज्ञानपुर। कालीन नगरी में चीनी मांझा घाव पर घाव दिए जा रहा है, लेकिन अफसर लाचार बने हैं। शुक्रवार शाम को एक व्यक्ति चीनी मांझे का शिकार हो गया। बीते एक साल में चार लोग इसकी चपेट में आकर अस्पताल पहुंच चुके हैं। सात साल पूर्व से प्रतिबंधित मांझे पर पूर्णतया रोक नहीं लग पा रही है, जिससे मकर संक्राति पर इसकी आमद एक बार फिर बढ़ने लगी है।
शुक्रवार को ज्ञानपुर इलाके के नंदापुर गांव निवासी विशाल शर्मा गोपीगंज किसी काम से गए थे। वहां से लौटते समय सोनखरी के समीप चीनी मांझे की चपेट में आने से गर्दन में कट लग गया। स्थानीय लोगों की मदद से उन्हें जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया। हालत चिंताजनक होने पर उन्हें भदोही के एक निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया। 14 जनवरी 2023 को चकटोडर निवासी रामवृक्ष चोटिल हो गए थे। दिसंबर 2022 में भदोही नगर के पंचभैया मोहल्ला निवासी शमशाद हसन अपने भतीजे हाशिम खान के साथ बाइक से रजपुरा चौराहे से आ रहे थे। गजिया ओवरब्रिज पर जैसे ही पहुंचे, प्रतिबंधित मांझे की चपेट में आ गए। मांझा फंसने से बाइक चला रहे हाशिम की गर्दन में गंभीर घाव हो गया, जबकि शमशाद हसन का होठ कट गया। संयोग था कि एक राहगीर ने तत्काल अपने गमछे को उनकी गर्दन में लपेट दिया अन्यथा अधिक रक्तस्राव से उनकी जान भी जा सकती थी। साल 2021 में सरोई के अहरा निवासी साइकिल सवार जगदीश दूबे, खरगपुर, डभका निवासी अंबुज दीक्षित और ज्ञानपुर थाना क्षेत्र के मिल्की निवासी आदित्यनाथ दुबे भी घायल होकर अस्पताल की शरण में पहुंच गए थे। संयोग था कि मांझे की जद में आने से मौत की घटना जैसी कोई अनहोनी तो नहीं हुई, लेकिन कब ऐसी घटना हो जाए, इससे इंकार नहीं किया जा सकता। सभी घटनाएं दिसंबर और जनवरी में हुई। बता दें कि एनजीटी ने जुलाई 2017 में चीनी मांझे की बिक्री पर पूरी तरह से प्रतिबंध लगा दिया था।
ज्ञानपुर। दरअसल, चीनी मांझा अन्य मांझों की तरह धागों से नहीं बनता। यह नायलॉन और एक मैटेलिक पावडर से बनाया जाता है। यह प्लास्टिक के जैसा दिखता है और स्ट्रेचेबल होता है। जब इसे खींचते हैं तो यह टूटने के बजाय बढ़ जाता है। इसे काटना काफी मुश्किल होता है। इस पर धागे जैसे नायलॉन पर कांच या लोहे के चूरे से धार भी लगाई जाती है, जिससे यह मांझा और भी घातक हो जाता है।
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ज्ञानपुर। चीनी मांझे की बिक्री पर पांच साल की सजा और एक लाख रुपये तक के जुर्माने का प्रावधान है। इसके बाद भी दुकानदार चीनी मांझे की बिक्री कर हादसों को बढ़ावा दे रहे हैं। कालीन नगरी के बाजार में कोड वर्ड में मांझा बेचा जा रहा है। दुकानदार और मांझे की कालाबाजारी करने वाले लोग कोड वर्ड का इस्तेमाल कर पुलिस को भी चकमा दे रहे हैं।
चीनी मांझा पूर्ण रूप से प्रतिबंधित है। इसकी खरीद और बिक्री करने वाले दोषी होंगे। इसे लेकर जल्द ही एक सघन जांच अभियान चलाया जाएगा। अगर कोई चीनी मांझा बिक्री करते पाया गया तो उस पर सख्त कार्रवाई की जाएगी।
- मान सिंह, सदर एसडीएम।
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शुक्रवार को ज्ञानपुर इलाके के नंदापुर गांव निवासी विशाल शर्मा गोपीगंज किसी काम से गए थे। वहां से लौटते समय सोनखरी के समीप चीनी मांझे की चपेट में आने से गर्दन में कट लग गया। स्थानीय लोगों की मदद से उन्हें जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया। हालत चिंताजनक होने पर उन्हें भदोही के एक निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया। 14 जनवरी 2023 को चकटोडर निवासी रामवृक्ष चोटिल हो गए थे। दिसंबर 2022 में भदोही नगर के पंचभैया मोहल्ला निवासी शमशाद हसन अपने भतीजे हाशिम खान के साथ बाइक से रजपुरा चौराहे से आ रहे थे। गजिया ओवरब्रिज पर जैसे ही पहुंचे, प्रतिबंधित मांझे की चपेट में आ गए। मांझा फंसने से बाइक चला रहे हाशिम की गर्दन में गंभीर घाव हो गया, जबकि शमशाद हसन का होठ कट गया। संयोग था कि एक राहगीर ने तत्काल अपने गमछे को उनकी गर्दन में लपेट दिया अन्यथा अधिक रक्तस्राव से उनकी जान भी जा सकती थी। साल 2021 में सरोई के अहरा निवासी साइकिल सवार जगदीश दूबे, खरगपुर, डभका निवासी अंबुज दीक्षित और ज्ञानपुर थाना क्षेत्र के मिल्की निवासी आदित्यनाथ दुबे भी घायल होकर अस्पताल की शरण में पहुंच गए थे। संयोग था कि मांझे की जद में आने से मौत की घटना जैसी कोई अनहोनी तो नहीं हुई, लेकिन कब ऐसी घटना हो जाए, इससे इंकार नहीं किया जा सकता। सभी घटनाएं दिसंबर और जनवरी में हुई। बता दें कि एनजीटी ने जुलाई 2017 में चीनी मांझे की बिक्री पर पूरी तरह से प्रतिबंध लगा दिया था।
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ज्ञानपुर। दरअसल, चीनी मांझा अन्य मांझों की तरह धागों से नहीं बनता। यह नायलॉन और एक मैटेलिक पावडर से बनाया जाता है। यह प्लास्टिक के जैसा दिखता है और स्ट्रेचेबल होता है। जब इसे खींचते हैं तो यह टूटने के बजाय बढ़ जाता है। इसे काटना काफी मुश्किल होता है। इस पर धागे जैसे नायलॉन पर कांच या लोहे के चूरे से धार भी लगाई जाती है, जिससे यह मांझा और भी घातक हो जाता है।
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ज्ञानपुर। चीनी मांझे की बिक्री पर पांच साल की सजा और एक लाख रुपये तक के जुर्माने का प्रावधान है। इसके बाद भी दुकानदार चीनी मांझे की बिक्री कर हादसों को बढ़ावा दे रहे हैं। कालीन नगरी के बाजार में कोड वर्ड में मांझा बेचा जा रहा है। दुकानदार और मांझे की कालाबाजारी करने वाले लोग कोड वर्ड का इस्तेमाल कर पुलिस को भी चकमा दे रहे हैं।
चीनी मांझा पूर्ण रूप से प्रतिबंधित है। इसकी खरीद और बिक्री करने वाले दोषी होंगे। इसे लेकर जल्द ही एक सघन जांच अभियान चलाया जाएगा। अगर कोई चीनी मांझा बिक्री करते पाया गया तो उस पर सख्त कार्रवाई की जाएगी।
- मान सिंह, सदर एसडीएम।