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अस्तित्व की लड़ाई लड़ रही वरुणा: पुनरोद्धार के लिए कागजों में चले अभियान, फिर भी सूख गई नदी; सिंचाई पर संकट

Tue, 30 Jun 2026 01:05 AM IST
वाराणसी ब्यूरो अमर उजाला नेटवर्क, वाराणसी।
अमर उजाला नेटवर्क, वाराणसी। Published by: वाराणसी ब्यूरो Updated Tue, 30 Jun 2026 01:05 AM IST
सार

Bhadohi News: वरुणा के तराई क्षेत्रों के करीब 400 किसान अपनी लगभग 900 बीघा से अधिक जमीन पर खेती के लिए निजी संसाधनों पर निर्भर हैं। इसके बचाव के लिए कागजों पर अभियान चलाए गए, इसके बावजूद इसका अस्तित्व समाप्त होने की कगार पर है।

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Campaigns to save Varuna remained confined to paper in bhadohi
बदहाल वरूणा नदी। - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

हजारों किसानों की खेती का आधार रही वरुणा नदी अब जिले में अपने अस्तित्व की लड़ाई लड़ रही है। वरुणा के पुनरोद्धार के लिए चलाए गए अभियानों के बावजूद इसका अस्तित्व समाप्त होने की कगार पर है। कागजों पर हुए पुनर्जीवन प्रयासों के बाद भी नदी में पानी नहीं बचा है और यह एक नहर की तरह सिमटकर रह गई है। 
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वरुणा के तराई क्षेत्रों के करीब 400 किसान अपनी लगभग 900 बीघा से अधिक जमीन पर खेती के लिए निजी संसाधनों पर निर्भर हैं। वह सुविधा भी कुछ लोगों को ही नसीब हो पाती है। छिछली हो चुकी वरुणा में बारिश के समय जब पानी आता है, तो किसानों की धान की सैकड़ों बीघा फसल डूब जाती है।
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प्रयागराज जिले के फूलपुर से निकलकर वरुणा नदी प्रतापगढ़, जौनपुर, भदोही होते हुए वाराणसी जाती है। जिले में इसकी लंबाई करीब 21 किलोमीटर है। यह जिले के कुल 70 गांवों से होकर गुजरती है, जिनमें अभोली, सुरियावां और भदोही ब्लॉक के गांव शामिल हैं। करीब दो दशक पहले तक नदी अपने पूरे सौंदर्य के साथ बहती थी, जिससे आसपास की हजारों बीघा जमीन पर फसलें लहलहाया करती थीं।
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जिले में वरुणा के संरक्षण के लिए कई अभियान चलाए गए। इसके तहत नदी किनारे पौधरोपण कराया गया और ड्रोन सर्वेक्षण भी किया गया। करीब एक वर्ष पहले डेनमार्क की दो सदस्यीय टीम भी पहुंची थी। टीम ने सर्वेक्षण कर वरुणा के पुनर्जीवन के लिए कार्ययोजना बनाई। ये अभियान कागजों तक ही सीमित रहे और धरातल पर इनका असर दिखाई नहीं दिया। वरुणा में जमा हो रही गाद और सिल्ट के कारण अब नदी का अस्तित्व समाप्त होने की स्थिति में पहुंच गया है। 

127 करोड़ से बनना है एसटीपी प्लांट 
जिले में वरुणा, गंगा और मोरवा नदी को प्रदूषणमुक्त करने के लिए 127.26 करोड़ रुपये की लागत से तीन सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट बनाए जा रहे हैं। इस परियोजना से न केवल दूषित जल शुद्ध होगा, बल्कि स्थानीय किसानों और शहरवासियों को भी राहत मिलने की बात कही गई है। साथ ही नदी को पुनर्जीवन मिलने की उम्मीद है।

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