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Bhadohi News: गोदामों में डंप 1000 करोड़ के कालीनों को अब मिलेंगे खरीदार

Sat, 07 Feb 2026 12:14 AM IST
Varanasi Bureau वाराणसी ब्यूरो
Updated Sat, 07 Feb 2026 12:14 AM IST
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Buyers will now be found for carpets worth 1,000 crore dumped in warehouses
भदोही नगर के एक कालीन इकाई के गोदाम में डंप तैयार कालीन। स्रोत- संवाद
भदोही। अमेरिकी टैरिफ घटकर 18 प्रतिशत होने के बाद बीते 10 महीने से भारतीय कालीन उद्योग पर आए संकट अब समाप्त हो गए हैं। उद्यमियों का कहना है कि बीते छह महीने से बंद पड़े अमेरिकी बाजार अब खुलने से भदोही के निर्यातकों के गोदामों में डंप पड़े 1000 करोड़ के कालीनों को अब खरीदार मिल जाएंगे। मई महीने तक देश-विदेश में आठ बड़े एक्सपो प्रस्तावित हैं। निर्यातक नए सिरे से सैंपलों की तैयारी में जुट गए हैं।
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भदोही के कालीन उद्यमी मानते हैं कि अमेरीका जैसे खरीदार हमारे पास नहीं हैं। भारतीय कालीनों का 60 प्रतिशत खरीदार अमेरीका है। जब अमेरीका ने भारतीय कालीनों के अमरीका में प्रवेश पर टैरिफ बढ़ाकर 50 प्रतिशत कर दिया था तब कालीन इकाईयों में बाजार थम गया था। गोदामों में कालीन डंप होने लगे थे। दो दिन पहले भारत-अमेरीका की बेच नए ट्रेड डील होने और टैरिफ 50 से 18 प्रतिशत होने से अब उद्यमी आगामी एक्सपो और प्रदर्शनियों में भागीदारी पर जोर दे रहे हैं। कालीन निर्यात संवर्धन परिषद (सीईपीसी) के उपाध्यक्ष असलम महबूब ने बताया कि एक्सपो के प्रति अब तक हमारे निर्यातक उदासीन बने थे। एकाएक टैरिफ घटने से उनमें उत्साह का संचार हो गया है। लोग अपनी-अपनी तैयारियों में जुट गए हैं। भदोही के निर्यातकों का रुझान नई दिल्ली में होने वाले इंडिया कारपेट एक्सपो और भारत सरकार द्वारा आयोजित भारत टेक्स पर रहता है।
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आने वाले महीने में लगने वाले एक्सपो

जांजगीर चांपा छत्तीसगढ़ एक्सपो 19 से 21 फरवरी
इंडिया कारपेट एक्सपो नईदिल्ली 11 से 14 अप्रैल
कोपेनहेगन लाइफस्टाइल एक्सपो डेनमार्क 22 - 26 अप्रैल
होम इनस्टाइल हांगकांग फेयर 27 से 30 अप्रैल
डोमोटेक्स चाइना फ्लोर शंघाई 27 से 29 मई
भारतटेक्स एक्सपो नई दिल्ली 14 से 17 जुलाई
नोट : यह जानकारी सीईपीसी के उपाध्यक्ष असलम महबूब ने दी है।

आर्थिक मंदी के कारण अमेरीका में भी सस्ते कालीनों की हो रही है मांग
भदोही। अमेरीका न केवल भारतीय कालीनों का सबसे बड़ा आयातक देश है बल्कि वह जगह जहां हर प्रकार के कालीनों की मांग रहती है। भारत में हैंडनाटेड, हैंडटफ्टेड, हैंडलूम, दरियां, तिब्बती सहित दर्जनों प्रकार के कालीनों का उत्पादन होता है। सीईपीसी के प्रशासनिक समिति के सदस्य इम्तीयाज अहमद की मानें तो अमरीका के लोग शौकीन हैं, उनके पास पैसा है। उन्होंने कहा कि इतना जरूर है कि विश्व में युद्ध जैसे हालात और आर्थिक मंदी के कारण अमेरीकी भी इन दिनों सस्ते कालीनों की मांग कर रहे हैं। हम ज्यादातर सस्ते कालीनों के सैंपल बनाने में लगे हैं। उन्होंने यह भी कहा कि आने वाले अगले छह महीनों में भदोही के उत्पादकों के यहां डंप करोड़ों रुपयों के कालीनों के खरीदार भी मिलने की पूरी आशा है।
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