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13 घंटे एंबुलेंस में पड़ा रहा शव
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ज्ञानपुर। कोरोना संक्रमण काल में स्वास्थ्य विभाग की तैयारियों की कलई सोमवार को खुल गई। सुरियावां सीएचसी से रेफर एक कोरोना संदिग्ध प्रवासी की अस्पताल ले जाते समय रास्ते में मौत हो गई। 13 घंटे तक उसका शव एंबुलेंस में ही पड़ा रह गया। सोमवार को सुबह 10 बजे के बाद उसका सैंपल जांच के लिए भेजा गया।
सुरियावां क्षेत्र के कड़ोर गांव का एक व्यक्ति मुंबई में रहता था। वह रविवार को घर आ रहा था। जंघई तक किसी साधन से आने के बाद गांव जाने के लिए उसने किसी परिचित की साइकिल ले ली। सुरियावां के समीप मनीगंज बाजार पहुंचा तो उसकी तबीयत बिगड़ी और वह चक्कर आने से गिर गया। आसपास मौजूद लोगों की सूचना पर 108 एंबुलेंस ने शाम को उसे सुरियावां सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पहुंचाया। उसे सांस लेने में तकलीफ हो रही थी। इसे कोरोना संदिग्ध मानते हुए चिकित्सक ने महाराजा बलवंत सिंह राजकीय चिकित्सालय के लिए रेफर कर दिया।
रात करीब नौ बजे 108 एंबुलेंस उसे लेकर एमबीएस अस्पताल पहुंची, लेकिन वहां कोई चिकित्सक नहीं था। आरोप है कि एंबुलेंस कर्मियों को चिकित्सक ढूंढने में 40 से 45 मिनट लग गए। इसके बाद चिकित्सक ने पहुंचकर उसकी जांच की तो पता चला कि उसकी मौत हो चुकी है। इसके बाद अस्पताल ने उसे लेने से इनकार कर दिया। लिहाजा पूरी रात शव एंबुलेंस में ही पड़ा रहा। एंबुलेंस चालक और कर्मचारी गाड़ी खाली होने का इंतजार करते रहे।
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उनका कहना था कि 108 एंबुलेंस शव ढोने के लिए नहीं है। मगर सुनने वाला कोई नहीं था। सोमवार को सुबह 10 बजे के बाद पहुंची स्वास्थ्य विभाग की टीम ने शव को एंबुलेंस से उतरवाकर गाड़ी को सैनिटाइज कराया। इस संबंध में मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. लक्ष्मी सिंह ने कहा कि कोरोना संदिग्ध मरीज को रखने के लिए अलग से कोई व्यवस्था नहीं है। इसलिए उसे एंबुलेंस में ही रखवाया गया। उसका सैंपल जांच के लिए भेज दिया गया है।
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सुरियावां क्षेत्र के कड़ोर गांव का एक व्यक्ति मुंबई में रहता था। वह रविवार को घर आ रहा था। जंघई तक किसी साधन से आने के बाद गांव जाने के लिए उसने किसी परिचित की साइकिल ले ली। सुरियावां के समीप मनीगंज बाजार पहुंचा तो उसकी तबीयत बिगड़ी और वह चक्कर आने से गिर गया। आसपास मौजूद लोगों की सूचना पर 108 एंबुलेंस ने शाम को उसे सुरियावां सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पहुंचाया। उसे सांस लेने में तकलीफ हो रही थी। इसे कोरोना संदिग्ध मानते हुए चिकित्सक ने महाराजा बलवंत सिंह राजकीय चिकित्सालय के लिए रेफर कर दिया।
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रात करीब नौ बजे 108 एंबुलेंस उसे लेकर एमबीएस अस्पताल पहुंची, लेकिन वहां कोई चिकित्सक नहीं था। आरोप है कि एंबुलेंस कर्मियों को चिकित्सक ढूंढने में 40 से 45 मिनट लग गए। इसके बाद चिकित्सक ने पहुंचकर उसकी जांच की तो पता चला कि उसकी मौत हो चुकी है। इसके बाद अस्पताल ने उसे लेने से इनकार कर दिया। लिहाजा पूरी रात शव एंबुलेंस में ही पड़ा रहा। एंबुलेंस चालक और कर्मचारी गाड़ी खाली होने का इंतजार करते रहे।
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उनका कहना था कि 108 एंबुलेंस शव ढोने के लिए नहीं है। मगर सुनने वाला कोई नहीं था। सोमवार को सुबह 10 बजे के बाद पहुंची स्वास्थ्य विभाग की टीम ने शव को एंबुलेंस से उतरवाकर गाड़ी को सैनिटाइज कराया। इस संबंध में मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. लक्ष्मी सिंह ने कहा कि कोरोना संदिग्ध मरीज को रखने के लिए अलग से कोई व्यवस्था नहीं है। इसलिए उसे एंबुलेंस में ही रखवाया गया। उसका सैंपल जांच के लिए भेज दिया गया है।