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महामारी में नहीं मिला आयुष्मान का ‘आशीर्वाद’
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ज्ञानपुर। स्वास्थ्य विभाग और प्राइवेट अस्पतालों के तिकड़म में भारत सरकार की अति महत्वाकांक्षी आयुष्मान भारत योजना फंसी हुई है। अभी तक इस योजना में कोरोना से जूझ रहे एक भी संक्रमितों का इलाज नहीं हो सका है। किसी गरीब ने यदि योजना के अंतर्गत इलाज का मन भी बनाया तो संचालक बहानेबाजी कर देते हैं। परिणाम होता है कि गरीब महंगे दाम पर इलाज कराने के लिए मजबूर हो जाते हैं।
देश की सबसे बड़ी स्वास्थ्य बीमा योजना आयुष्मान भारत 23 सिंतबर 2018 को शुरू हुई। इसमें गरीबी रेखा से नीचे तक के लाभार्थियों को पांच लाख रुपये तक का स्वास्थ्य बीमा का लाभ दिया जाना है। इसके तहत जिले में 94 हजार 867 लोगों का चयन किया गया है। स्वास्थ्य विभाग का दावा है कि कई मरीज रोते हुए अस्पताल में गए, लेकिन चंद दिनों में खुश होकर बाहर निकले, लेकिन धरातल पर स्थिति अलग है।वैश्विक महामारी को देखते हुए शासन की ओर से गाइडलाइन जारी किया गया था कि कोरोरा संक्रमितों का भी इलाज आयुष्मान भारत योजना से कराया जा सकता है। अधिकृत कोविड अस्पताल इसका लाभ गरीबों को उपलब्ध कराएंगे। यह सब कागजों में ही सिमट गया है। कोविड अस्पताल के संचालकों का कहना है कि स्पष्ट निर्देश जारी न होने से इस योजना का लाभ नहीं दिया जा सका है। हकीकत यह है कि अभी तक एक भी गरीबों को आयुष्मान भारत योजना का लाभ नहीं मिल पाया है। बताते चलें कि जिले में एक लाख 25 हजार लाभार्थियों को गोल्डन कार्ड वितरित हो चुके हैं। विभाग का दावा है कि अब तक आयुष्मान गोल्डन कार्ड से नौ हजार से अधिक मरीजों का उपचार हो चुका है।
कोरोना वायरस की दूसरी लहर में संक्रमितों की तेजी से मौत हुई। शुरूआती दिनों में पांच से छह की हर रोज मौत होती थी। निजी अस्पतालों में उपचार का अभाव होने से 145 की जान चली गई। सरकारी आंकड़ंो में यह संख्या 145 है जबकि हकीकत देखी जाए तो संख्या दस गुना से भी अधिक है।
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सीएमओ डा. लक्ष्मी सिंह का कहना है कि आयुष्मान भारत योजना का लाभ जिस तरीके से अन्य मरीजों को दिया जाता है उसी तरह से कोविड का भी इलाज किया जाना चाहिए। उन्होंने बताया कि शासन की ओर से अभी तक कोविड से अलग दर निश्चित होकर नहीं मिला है।
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देश की सबसे बड़ी स्वास्थ्य बीमा योजना आयुष्मान भारत 23 सिंतबर 2018 को शुरू हुई। इसमें गरीबी रेखा से नीचे तक के लाभार्थियों को पांच लाख रुपये तक का स्वास्थ्य बीमा का लाभ दिया जाना है। इसके तहत जिले में 94 हजार 867 लोगों का चयन किया गया है। स्वास्थ्य विभाग का दावा है कि कई मरीज रोते हुए अस्पताल में गए, लेकिन चंद दिनों में खुश होकर बाहर निकले, लेकिन धरातल पर स्थिति अलग है।वैश्विक महामारी को देखते हुए शासन की ओर से गाइडलाइन जारी किया गया था कि कोरोरा संक्रमितों का भी इलाज आयुष्मान भारत योजना से कराया जा सकता है। अधिकृत कोविड अस्पताल इसका लाभ गरीबों को उपलब्ध कराएंगे। यह सब कागजों में ही सिमट गया है। कोविड अस्पताल के संचालकों का कहना है कि स्पष्ट निर्देश जारी न होने से इस योजना का लाभ नहीं दिया जा सका है। हकीकत यह है कि अभी तक एक भी गरीबों को आयुष्मान भारत योजना का लाभ नहीं मिल पाया है। बताते चलें कि जिले में एक लाख 25 हजार लाभार्थियों को गोल्डन कार्ड वितरित हो चुके हैं। विभाग का दावा है कि अब तक आयुष्मान गोल्डन कार्ड से नौ हजार से अधिक मरीजों का उपचार हो चुका है।
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कोरोना वायरस की दूसरी लहर में संक्रमितों की तेजी से मौत हुई। शुरूआती दिनों में पांच से छह की हर रोज मौत होती थी। निजी अस्पतालों में उपचार का अभाव होने से 145 की जान चली गई। सरकारी आंकड़ंो में यह संख्या 145 है जबकि हकीकत देखी जाए तो संख्या दस गुना से भी अधिक है।
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सीएमओ डा. लक्ष्मी सिंह का कहना है कि आयुष्मान भारत योजना का लाभ जिस तरीके से अन्य मरीजों को दिया जाता है उसी तरह से कोविड का भी इलाज किया जाना चाहिए। उन्होंने बताया कि शासन की ओर से अभी तक कोविड से अलग दर निश्चित होकर नहीं मिला है।