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आयुर्वेद शल्य चिकित्सा अत्यंत परिष्कृत विधा : पद्मश्री डॉ. मनोरंजन
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नीमा सर्जिकल सोसायटी की ओर से औराई के एक निजी अस्पताल में सर्जिकल कार्यशाला का आयोजन हुआ। जिसमें देशभर से आए आयुर्वेदिक चिकित्सकों ने शल्य चिकित्सा (सर्जरी) की बारीकियों को समझा। महाराष्ट्र के डॉ. योगेश बड़वे, डॉ अरूण कुमार सिंह, डॉ. मनोज यादव, डॉ. अरूण त्रिपाठी ने प्रशिक्षकों को नवीनतम तकनीकों से अपडेट रखने के लिए लाइव सर्जरी कर प्रशिक्षकों को प्रशिक्षित किया।
पद्मश्री डॉ. मनोरंजन साहू ने कहा कि प्रशिक्षित एमएस शल्य आयुर्वेदिक सर्जन विभिन्न प्रकार के ऑपरेशन कर रहे हैं। भारत सरकार ने उन्हें 58 प्रकार की सर्जरी करने की अनुमति दी है। इस तरह के कार्यशाला से वे उन्हें नवीनतम तकनीकों से अपडेट हो सकेंगे। उन्होंने बताया कि आयुर्वेद शल्य चिकित्सा अत्यंत परिष्कृत विधा है। जिसमें कई प्रकार की सर्जरी का उल्लेख मिलता है, लेकिन जानकारी के अभाव में आमजन इसे केवल औषधीय उपचार तक सीमित मानते हैं।
उन्होंने बताया कि केंद्र और राज्य सरकारें आयुर्वेदिक चिकित्सा प्रणाली को बढ़ावा देने के लिए लगातार प्रयासरत हैं। नीमा सोसायटी के अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह ने बताया कि इस कार्यशाला में देशभर के आयुर्वेदिक डॉक्टरों को सजीव सर्जरी का प्रसारण करके शल्य चिकित्सा की बारीकियां समझाई गईं।
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इसका उद्देश्य आयुर्वेदिक सर्जनों को आधुनिक दृष्टिकोण से प्रशिक्षित करना और उन्हें नई तकनीकों से अवगत कराना था, ताकि वे अपने कार्य में अधिक कुशलता ला सकें। मौके पर डॉ. प्रभाकर शंकर पांडेय, डॉ. हरिओम सिंह, डॉ. सत्येंद्र सिंह समेत प्रशिक्षु चिकित्सक मौजूद रहे। नीमा सर्जिकल सोसायटी उप्र के अध्यक्ष आनंद विद्यार्थी ने सभी का आभार जताया।
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पद्मश्री डॉ. मनोरंजन साहू ने कहा कि प्रशिक्षित एमएस शल्य आयुर्वेदिक सर्जन विभिन्न प्रकार के ऑपरेशन कर रहे हैं। भारत सरकार ने उन्हें 58 प्रकार की सर्जरी करने की अनुमति दी है। इस तरह के कार्यशाला से वे उन्हें नवीनतम तकनीकों से अपडेट हो सकेंगे। उन्होंने बताया कि आयुर्वेद शल्य चिकित्सा अत्यंत परिष्कृत विधा है। जिसमें कई प्रकार की सर्जरी का उल्लेख मिलता है, लेकिन जानकारी के अभाव में आमजन इसे केवल औषधीय उपचार तक सीमित मानते हैं।
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उन्होंने बताया कि केंद्र और राज्य सरकारें आयुर्वेदिक चिकित्सा प्रणाली को बढ़ावा देने के लिए लगातार प्रयासरत हैं। नीमा सोसायटी के अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह ने बताया कि इस कार्यशाला में देशभर के आयुर्वेदिक डॉक्टरों को सजीव सर्जरी का प्रसारण करके शल्य चिकित्सा की बारीकियां समझाई गईं।
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इसका उद्देश्य आयुर्वेदिक सर्जनों को आधुनिक दृष्टिकोण से प्रशिक्षित करना और उन्हें नई तकनीकों से अवगत कराना था, ताकि वे अपने कार्य में अधिक कुशलता ला सकें। मौके पर डॉ. प्रभाकर शंकर पांडेय, डॉ. हरिओम सिंह, डॉ. सत्येंद्र सिंह समेत प्रशिक्षु चिकित्सक मौजूद रहे। नीमा सर्जिकल सोसायटी उप्र के अध्यक्ष आनंद विद्यार्थी ने सभी का आभार जताया।