फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Bhadohi News ›   Asha and ambulance workers are taking pregnant women to private hospitals.

Bhadohi News: आशा और एबुलेंसकर्मी प्रसूताओं को पहुंचा रहे निजी अस्पताल

Thu, 11 Sep 2025 12:29 AM IST
Varanasi Bureau वाराणसी ब्यूरो
Updated Thu, 11 Sep 2025 12:29 AM IST
विज्ञापन
Asha and ambulance workers are taking pregnant women to private hospitals.
ज्ञानपुर। सरकारी अस्पतालों में उपचार कराने वाली प्रसूताओं को आशाकर्मियों की मिलीभगत से प्रसव के समय निजी अस्पताल पहुंचा दिया जा रहा है। हर महीने सरकारी अस्पतालों में 4500 प्रसूताएं जांच कराने पहुंचती हैं। इसमें कम से कम 800 से 900 महिलाएं ऐसी होती हैं, जिनका 8वां या 9वां महीना रहता है। वहीं सरकारी अस्पताल में औसतन हर महीने 650 प्रसव कराए जाते हैं। अन्य को आशा और एबुलेंसकर्मी निजी अस्पताल की तरफ भेज देते हैं। जिला अस्पताल, एमबीएस और छह सीएचसी, 17 पीएचसी समेत 206 उप स्वास्थ्य केंद्रों पर हर महीने 4500 से 5000 प्रसूताओं की ओपीडी होती है। इस साल 31 अगस्त के बीच सरकारी अस्पतालों में 5091 प्रसव कराए गए हैं। इस लिहाज से औसतन महीने का प्रसव देखा जाए तो 638 प्रसव हर महीने सरकारी अस्पतालों में हुए हैं। हर दिन 150 ओपीडी वाले इन अस्पतालों में कम से कम 25 से 30 महिलाएं ऐसी होती हैं, जो आठ या नौ महीने की गर्भवती होती हैं लेकिन जब प्रसव की बारी आती है तो महीने में सरकारी अस्पताल में 650 के करीब ही प्रसव हो पाता है। अन्य को एंबुलेंसकर्मी और आशाकर्मी निजी अस्पतालों की ओर भेज देती हैं। कमीशन के चक्कर में प्रसूताओं को निजी अस्पताल पहुंचाकर उन्हें अच्छा और सस्ता इलाज का झांसा दिया जाता है। इसे लेकर कई बार आशाकर्मी पर आरोप भी लग चुके हैं। सुरियावां, दुर्गागंज सीएचसी के अधीन आने वाली दो आशाकर्मी को डांट भी पड़ी थी। इस मामले में परिजनों ने ही अधीक्षक से शिकायत की थी। आशा कार्यकर्ता निजी अस्पताल में ऑपरेशन करवाने की सलाह मरीज को दे रही थीं। जिले में कुल 1246 आशाकर्मी कार्यरत हैं। तीन वर्षों में सरकारी और निजी मिलाकर कुल 65371 प्रसव कराए गए हैं। इसमें सरकारी अस्पतालाें में कुल 53999 और निजी में 5093 प्रसव कराए गए हैं। भले ही सरकारी अस्पतालों का आंकड़ा ज्यादा बताई जाए लेकिन हकीकत यह है कि कई आशा कार्यकर्ता प्रसूताओं को निजी अस्पताल पहुंचाने से नहीं हिचकतीं। निजी अस्पतालों में 90 फीसदी प्रसव बिना ऑपरेशन के नहीं होते। एक ऑपरेशन पर 20 से 50 हजार रुपये का खर्च आता है। इसमें से आशाकर्मी को दस हजार रुपये पर 2500 कमीशन मिलता है। इसमें आशा, एएनएम व एबुलेंसकर्मी का भी हिस्सा होता है।
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed