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कटौती को लेकर भड़का गुस्सा, सड़क पर उतरे व्यापारी
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ज्ञानपुर। पूर्वांचल विद्युत वितरण निगम के निजीकरण के विरोध में कर्मचारियों के कार्य बहिष्कार के कारण लगातार दूसरे दिन बिजली आपूर्ति बहाल नहीं हो सकी। इससे नाराज व्यापारी सड़क पर आ गए। उपकेंद्रों पर प्रदर्शन कर आपूर्ति बहाल करने की मांग की।
अघोषित कटौती कर विरोध-प्रदर्शन में शामिल कर्मचारियों के खिलाफ नारेबाजी करते हुए व्यापार मंडल के पदाधिकारी उपकेंद्र ज्ञानपुर पहुंचे। विभाग और सरकार के खिलाफ नारेबाजी की। कहा कि उपभोक्ता बिल दे रहे हैं, उसके बाद भी कटौती की जा रही है। निजीकरण का विरोध करना ही था तो उस समय क्यों नहीं किया गया जब तीन वर्ष पहले ही बेसिल कंपनी ने अनुरक्षण कार्य की जिम्मेदारी उठाई और संविदा लाइनमैनों की अवैध वसूली कर नियुक्ति कर ली गई। जिला पंचायत के समीप कोको दुबे, अजय कुमार, अभय कुमार, सुमित, रमेश, अतीक, पिंटू पांडेय, मनोज द्विवेदी आदि सड़क पर उतरकर आपूर्ति बहाल करने की आवाज उठाई। वक्ताओं ने आरोप लगाया कि दो दिन से आम जनता पानी के लिए तरस रही है और विभागीय अधि कारी-कर्मचारी निजीकरण का विरोध कर रहे हैं। सरकार को चाहिए कि विभाग में भ्रष्टाचार को बढ़ावा देने वालों को चिह्नित कराकर हटाए। इसी क्रम में औराई तहसील गेट पर आधा दर्जन से अधिक गांवों के लोगों ने प्रदर्शन कर विद्युत विभाग के खिलाफ आवाज उठाई कि निजीकरण के नाम पर अधिकारी उपभोक्ताओं का शोषण कर अपनी मांगों को सरकार से मनवाने के लिए दबंगई कर रहे हैं और उपभोक्ता हवा-पानी के लिए परेशान हैं। 36 घंटे बीतने पर मोबाइल शोपीस बन गए हैं, इन्वर्टर आदि फेल होकर विभागीय कार्यप्रणाली को मुंह चिढ़ा रहे हैं। दो दिन से कारोबार भी प्रभावित हो चुका है लेकिन विभागीय अधिकारियों की नींद नहीं टूट रही है।
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अघोषित कटौती कर विरोध-प्रदर्शन में शामिल कर्मचारियों के खिलाफ नारेबाजी करते हुए व्यापार मंडल के पदाधिकारी उपकेंद्र ज्ञानपुर पहुंचे। विभाग और सरकार के खिलाफ नारेबाजी की। कहा कि उपभोक्ता बिल दे रहे हैं, उसके बाद भी कटौती की जा रही है। निजीकरण का विरोध करना ही था तो उस समय क्यों नहीं किया गया जब तीन वर्ष पहले ही बेसिल कंपनी ने अनुरक्षण कार्य की जिम्मेदारी उठाई और संविदा लाइनमैनों की अवैध वसूली कर नियुक्ति कर ली गई। जिला पंचायत के समीप कोको दुबे, अजय कुमार, अभय कुमार, सुमित, रमेश, अतीक, पिंटू पांडेय, मनोज द्विवेदी आदि सड़क पर उतरकर आपूर्ति बहाल करने की आवाज उठाई। वक्ताओं ने आरोप लगाया कि दो दिन से आम जनता पानी के लिए तरस रही है और विभागीय अधि कारी-कर्मचारी निजीकरण का विरोध कर रहे हैं। सरकार को चाहिए कि विभाग में भ्रष्टाचार को बढ़ावा देने वालों को चिह्नित कराकर हटाए। इसी क्रम में औराई तहसील गेट पर आधा दर्जन से अधिक गांवों के लोगों ने प्रदर्शन कर विद्युत विभाग के खिलाफ आवाज उठाई कि निजीकरण के नाम पर अधिकारी उपभोक्ताओं का शोषण कर अपनी मांगों को सरकार से मनवाने के लिए दबंगई कर रहे हैं और उपभोक्ता हवा-पानी के लिए परेशान हैं। 36 घंटे बीतने पर मोबाइल शोपीस बन गए हैं, इन्वर्टर आदि फेल होकर विभागीय कार्यप्रणाली को मुंह चिढ़ा रहे हैं। दो दिन से कारोबार भी प्रभावित हो चुका है लेकिन विभागीय अधिकारियों की नींद नहीं टूट रही है।
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