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Bhadohi News: कृषि पंजीयन की ट्रैक्टरों का हो रहा व्यवसायिक उपयोग
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ज्ञानपुर। जिले की सड़काें पर अनट्रेंड ट्रैक्टर चालक मौत बनकर दौड़ रहे हैं। अनट्रेंड हाथों में ट्रैक्टर की स्टेयरिंग और कृषि कार्य के लिए लिए गए वाहनों का धड़ल्ले से व्यवसायिक उपयोग किया जा रहा है। मजे की बात है कि परिवहन विभाग के अधिकारियों की इस पर नजर भी नहीं पड़ रही।
जिले के परिवहन विभाग में मात्र 50 से 60 ट्रैक्टर पंजीकृत है। जिसमें लगभग 95 फीसदी ट्रैक्टरों का पंजीयन कृषि कार्य के लिए हैं। परिवहन विभाग में पंजीकरण के उलट जिले में धड़ल्ले से 800 से 900 से अधिक दौड़ रहे हैं। कृषि कार्य के लिए पंजीयन कराने के बाद तमाम वाहन चालक उसका व्यावसायिक उपयोग कर हैं।
परिवहन विभाग के नियमों के मुताबिक ट्रैक्टर का व्यावसायिक उपयोग करने के लिए उसका व्यवसायिक पंजीकरण कराना होता है, लेकिन अधिकर लोग कृषि पंजीयन ही कराते हैं, क्योंकि वह व्यवसायिक पंजीयन की अपेक्षा सस्ता होता है। जिले में कृषि पंजीयन वाले 90 फीसदी ट्रैक्टरों का प्रयोग धड़ल्ले से व्यावसायिक उपयोग में हो रहा है। कभी टेंट का सामान तो कभी बिल्डिंग मैटेरियल का सामान ढोया जाता है। कई बार तो इनका उपयोग लोगों को ढाेने के लिए भी किया जाता है।
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गौर करने वाली बात है कि तमाम ऐसे ट्रैक्टर चालक हैं, जो अपने ट्रालियों पर पीछे ओवरलोड लेकर चलते हैं। जिले की तमाम सड़कें अतिव्यस्त रहने वाली और सघन इलाकों से होकर गुजरती हैं। ऐसे में कई बार कम उम्र के अनट्रेंड चालक निर्धारित मानक से भी तेज गति से सड़कों पर ट्रैक्टर लेकर चलते रहते हैं। जिसका नतीजा दुर्घटनाओं के रूप में सामने आता है। दूसरी तरफ परिवहन विभाग के अधिकारी समय-समय पर अभियान तो चलाते हैं, लेकिन उस अभियान का कोई असर होता नहीं दिख रहा है।
जिले की सड़कों पर हर दिन बड़ी संख्या में ऐसे ट्रैक्टर दिख जाते हैं, जो टेंट के अलावा बिल्डिंग मैटेरियल और अन्य सामानों को ढोने के लिए कर रहे हैं।
इस संबंध में एआरटीओ प्रशासन राम सिंह ने बताया कि समय-समय पर अभियान चलाकर वाहनों की चेकिंग की जाती है। अगर कृषि कार्य में पंजीकरण होने पर व्यावसायिक उपयोग हो रहा है तो यह गलत है। इस पर कार्रवाई की जाएगी।
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जिले के परिवहन विभाग में मात्र 50 से 60 ट्रैक्टर पंजीकृत है। जिसमें लगभग 95 फीसदी ट्रैक्टरों का पंजीयन कृषि कार्य के लिए हैं। परिवहन विभाग में पंजीकरण के उलट जिले में धड़ल्ले से 800 से 900 से अधिक दौड़ रहे हैं। कृषि कार्य के लिए पंजीयन कराने के बाद तमाम वाहन चालक उसका व्यावसायिक उपयोग कर हैं।
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परिवहन विभाग के नियमों के मुताबिक ट्रैक्टर का व्यावसायिक उपयोग करने के लिए उसका व्यवसायिक पंजीकरण कराना होता है, लेकिन अधिकर लोग कृषि पंजीयन ही कराते हैं, क्योंकि वह व्यवसायिक पंजीयन की अपेक्षा सस्ता होता है। जिले में कृषि पंजीयन वाले 90 फीसदी ट्रैक्टरों का प्रयोग धड़ल्ले से व्यावसायिक उपयोग में हो रहा है। कभी टेंट का सामान तो कभी बिल्डिंग मैटेरियल का सामान ढोया जाता है। कई बार तो इनका उपयोग लोगों को ढाेने के लिए भी किया जाता है।
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गौर करने वाली बात है कि तमाम ऐसे ट्रैक्टर चालक हैं, जो अपने ट्रालियों पर पीछे ओवरलोड लेकर चलते हैं। जिले की तमाम सड़कें अतिव्यस्त रहने वाली और सघन इलाकों से होकर गुजरती हैं। ऐसे में कई बार कम उम्र के अनट्रेंड चालक निर्धारित मानक से भी तेज गति से सड़कों पर ट्रैक्टर लेकर चलते रहते हैं। जिसका नतीजा दुर्घटनाओं के रूप में सामने आता है। दूसरी तरफ परिवहन विभाग के अधिकारी समय-समय पर अभियान तो चलाते हैं, लेकिन उस अभियान का कोई असर होता नहीं दिख रहा है।
जिले की सड़कों पर हर दिन बड़ी संख्या में ऐसे ट्रैक्टर दिख जाते हैं, जो टेंट के अलावा बिल्डिंग मैटेरियल और अन्य सामानों को ढोने के लिए कर रहे हैं।
इस संबंध में एआरटीओ प्रशासन राम सिंह ने बताया कि समय-समय पर अभियान चलाकर वाहनों की चेकिंग की जाती है। अगर कृषि कार्य में पंजीकरण होने पर व्यावसायिक उपयोग हो रहा है तो यह गलत है। इस पर कार्रवाई की जाएगी।