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Bhadohi News: पिता की मौत के बाद भाई ने दिया हौसला, लक्ष्मी ने भरी उड़ान

Mon, 23 Oct 2023 01:12 AM IST
Varanasi Bureau वाराणसी ब्यूरो
Updated Mon, 23 Oct 2023 01:12 AM IST
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After father's death, brother gave encouragement, Lakshmi took flight
कौलापुर। विपरीत परिस्थतियां व्यक्ति को मजबूत करती हैं। कठिन परिस्थितियों से उबरकर व्यक्ति खिल उठता है। ज्ञानपुर ब्लॉक के जगन्नाथपुर निवासी लक्ष्मी कन्नौजिया इसकी मिसाल हैं। इन्होंने जीवन में एक ऐसा दौर भी देखा जब इनके सारे सपने चूर-चूर हो गए, लेकिन फिर भाई की प्रेरणा से उठ खड़ी हुईं और मेहनत और लगन के दम पर पुलिस की वर्दी पाई। वह अमेठी जिले के संग्रामपुर थाने में कांस्टेबल के रूप में तैनात हैं। इनके पिता घुनासी कन्नौजिया लोगों का कपड़ा धोकर परिवार की आजीविका चलाते थे। अमर उजाला के साथ बातचीत में लक्ष्मी कन्नौजिया ने बताया कि एक धोबी की बेटी को बड़ा सपना देखना सबको मुनासिब नहीं लगता था, लेकिन पिता ने कभी भी हौसलों को कम नहीं होने दिया। बताया कि यूपीपी की तैयारी कर रही थी। इस बीच 2012 में अचानक उनके पिता का देहांत हो गया। पिता के देहांत के बाद आंखों से सामने अंधेरा सा छा गया। लगा कि अब सारे सपने चूर-चूर हो जाएंगे। लक्ष्मी ने बताया कि पिता ही एक ऐसे व्यक्ति थे, जो उनके सपनों को ऊंची उड़ान देने के लिए हमेशा प्रेरित करते रहते थे। पिता की मौत के बाद बड़े भाई शिवपूजन कन्नौजिया ने लक्ष्य के प्रति लगन देखकर लक्ष्मी को हौसला दिया। इसके बाद वह दुगुने उत्साह के साथ यूपी पुलिस भर्ती परीक्ष की तैयारी मेें जुट गईं और सफलता प्राप्त की। यूपी पुलिस में बतौर सिपाही लक्ष्मी ने कहा कि लक्ष्य अगर साफ हो तो सफलता तय है।
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फोटो:
नवरात्र में शीतला माता के दर्शन से कष्ट होते हैं दूर
संवाद न्यूज एजेंसी
ज्ञानपुर। नगर के पुरानी बाजार स्थित मां शीतला की मंदिर में भक्तों की विशेष आस्था है। नवरात्र में यहां दूर-दूर से लोग माता रानी के दर्शन को पहुंचते हैं। मान्यता है कि मां के दर्शन से परिवार के सारे दुख और कष्ट दूर हो जाते हैं। वर्तमान में पुरानी बाजार निवासी शिवम का परिवार मंदिर की देखरेख करता है। उन्होंने बताया कि माता रानी का उनके परिवार पर विशेष कृपा रही है। बताया कि इस मंदिर की मान्यता दूर-दूर तक है। उन्होंने बताया कि उनके मामा मुरली यादव मां शीतला के अनन्य भक्त थे। वह नियमित रूप से सुबह-शाम मां की अराधना करते थे। मां की प्रेरणा से उन्होंने ने 1992 में मंदिर की स्थाना कराई थी। जिसके बाद मंदिर को भव्य रूप दिया गया। इस मंदिर को लेकर लोगों की विशेष मान्यता है। बताया कि आज से 10 साल पहले राम क पुरा निवासी एक महिला के बेटे की तबीयत बुरी तरह से बिगड़ गई। ऐसा रहा कि चिकित्सकों ने भी जवाब दे दिया। नवरात्र में वह मां के दर्शन को पहुंची और बेटे की स्वास्थ्य को लेकर मनौती मांगी। जिसके बाद उनका बेटा पूरी तरह स्वस्थ हो गया। उसके बाद वे नियमित बेटे के साथ मां के दर्शन को पहुंचती है। मां के दर्शन मात्र से ही सारे कष्ट हर जाते हैं।
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मुहूर्त
बरजी गांव निवासी आचार्य मनोज तिवारी ने बताया कि नवरात्र के आखिरी दिन मां सिद्धिदात्री की पूजा अर्चना की जाती है। इस दिन भक्त को बैंगनी रंग के वस्त्र पहन कर मां की आराधना करनी चाहिए। मां सिद्धिदात्री शक्ति प्रदान करने वाली देवी मानी जाती है। मां को पूड़ी हलवा पसंद है। मां की अराधना के मंत्र
-सिद्ध गन्धर्व यक्षाद्यैरसुरैरमरैरपि।

सेव्यमाना सदा भूयात् सिद्धिदा सिद्धिदायिनी॥
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वन्दे वांछित मनोरथार्थ चन्द्रार्घकृत शेखराम्।

कमलस्थितां चतुर्भुजा सिद्धीदात्री यशस्वनीम्॥
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